संस्करणों
विविध

इंजीनियर से एजूकेटर बने गौरव, शिक्षकों को दिलाना चाहते हैं उनका सम्मान वापस

एक ऐसा इंजीनियर, जिसने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ ठानी देश के भविष्य को सुरक्षित करने की।

2nd Nov 2017
Add to
Shares
946
Comments
Share This
Add to
Shares
946
Comments
Share

इकोईंग ग्रीन फैलोशिप पुरस्कार समारोह में 3.2.1 फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ गौरव सिंह ने कहा कि "हमारे देश का भविष्य किसी और के हाथों में नहीं बल्कि देश के बच्चों के हाथों में है। हमें अपने भविष्य को सुरक्षित करना होगा।" अब आप सोच रहे होंगे कि ये बात तो कई बड़े विद्वान कहते रहे हैं फिर ये गौरव सिंह कौन हैं?

साभार: यूट्यूब

साभार: यूट्यूब


दरअसल गौरव सिंह वह इजीनियर हैं जिसने इंजीनियर की नौकरी छोड़ देश के भविष्य को सुरक्षित करने की ठानी। गौरव सिंह को अमेरिका में केआईपीपी स्कूलों के साथ फिशर फैलोशिप के पहले वैश्विक बैच के लिए चुना गया था।

शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय अभ्यासों को जानने के लिए गौरव सिंह ने एक साल तक फिनलैंड, चीन, यूके जैसे देशों की यात्रा की। गौरव सिंह ने 2012 में 3.2.1 शिक्षा फाउंडेशन की शुरुआत की और अपने शानदार काम के लिए 2013 में उन्हें प्रतिष्ठित अशोक फैलोशिप और इकोईंग ग्रीन फेलोशिप से सम्मानित किया गया।

इकोईंग ग्रीन फैलोशिप पुरस्कार समारोह में 3.2.1 फाउंडेशन के संस्थापक और सीईओ गौरव सिंह ने कहा कि "हमारे देश का भविष्य किसी और के हाथों में नहीं बल्कि हमारे सभी बच्चों के हाथों में है। हमें अपने भविष्य को सुरक्षित करना होगा।" अब आप सोच रहे होंगे कि ये बात तो कई बड़े विद्वान कहते रहे हैं फिर ये गौरव सिंह कौन हैं? जी हां, दरअसल गौरव सिंह वह इजीनियर हैं जिसने इंजीनियर की नौकरी छोड़ देश के भविष्य को सुरक्षित करने की ठानी। गौरव सिंह को अमेरिका में केआईपीपी स्कूलों के साथ फिशर फैलोशिप के पहले वैश्विक बैच के लिए चुना गया था। शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय अभ्यासों को जानने के लिए गौरव सिंह ने एक साल तक फिनलैंड, चीन, यूके जैसे देशों की यात्रा की। गौरव सिंह ने 2012 में 3.2.1 शिक्षा फाउंडेशन की शुरुआत की और अपने शानदार काम के लिए 2013 में उन्हें प्रतिष्ठित अशोक फैलोशिप और इकोईंग ग्रीन फेलोशिप से सम्मानित किया गया।

अब से 7 साल पहले वर्ष 2010 में जब गौरव सिंह टीच फॉर इंडिया (टीएफआई) फेलोशिप के दूसरे वर्ष में थे तब उनके ऐसे आइडिया थे जिन पर वे काम करना चाहते थे। लेकिन सबसे ज्यादा किसी आइडिया ने उन्हें प्रभावित किया था वह था एक ऐसे वर्क प्लेस की स्थापना करना जहां वो लोग आकर मेहनत करें जो वाकई में कुछ करना चाहते हैं। गौरव चाहते थे कि एक ऐसा मॉडल वर्क प्लेस हो जहां लोग किसी उद्देश्य और कुछ प्रेरणा हासिल करने के लिए आएं और साथ में वो लोग एक साथ मिलकर स्केलेबल प्रोग्राम बनाएं। जो देश के शिक्षकों को उनका खोया हुआ सम्मान वापस दिलाने में मदद करे साथ ही देश की शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी असर डाले। इसी आइडिया ने गौरव को सबसे ज्यादा प्रभावित किया और उन्होंने 2012 में 3.2.1 फाउंडेशन की शुरुआत की।

गौरव सिंह अपने फाउंडेशन के लोगो के बारे में बात करते हुए कहते हैं कि "3.2.1 फाउंडेशन के लोगो में एक सोने की चिड़िया है क्योंकि मुझे विश्वास है कि शिक्षा में सार्थक प्रभाव डालकर भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया बनने वाला है।"

 गौरव सिंह जिस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं वह ब्राबिंगनैगियन है। इसके लिए सिर्फ मन की बातों में बदलाव नहीं बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक तौर पर बदलाव की आवश्यकता है। और उनका ये संगठन अपने इस मिशन में अच्छा काम कर रहा है। वर्तमान में स्कूलों में लाखों शिक्षक हैं और लाखों लोग हर साल प्रवेश करते हैं। उनमें से अधिकांश शिक्षकों की नवीनतम अध्यापन और सर्वोत्तम प्रथाओं तक पहुंच नहीं है जिसकी उनके छात्रों को जरूरत है। शिक्षकों की एक ऐसे समुदाय तक पहुंच नहीं है जिसका वे एक हिस्सा हो सकते हैं। जहां वे एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव शेयर कर सकें एक दूसरे को सिखा सकें। शिक्षकों के पास उच्च गुणवत्ता वाली कोचिंग और सलाह देने व मॉनीटरिंग करने की व्यवस्था नहीं है।

साभार: ट्विटर

साभार: ट्विटर


गौरव और उनका फाउंडेशन शिक्षको को शिक्षित करने का काम कर रहा है। जब उनसे पूछा गया कि वे जो कर रहे हैं वो आखिर क्यों कर रहे हैं? तो गौरव कहते हैं कि उनका संगठन शिक्षक की नौकरी का सम्मान और प्रतिष्ठा को वापस लाना चाहता है।

3.2.1 फाउंडेशन का जिस फ्लैगशिप प्रोग्राम को चलाती है उसका नाम इग्नाइट (IGNITE) है। जब इस फाउंडेशन के लोग किसी स्कूल में कार्यक्रम शुरू करते हैं तो जो पहली चीज करते हैं वह यह कि उस स्कूल के शिक्षक के हर उस अच्छे काम को स्वीकारना जिसे उन्होंने अच्छे से किया है। जिसके बाद वे स्कूल में एक विशाल समारोह आयोजित करते हैं जहां वे शिक्षक और उनके परिवारों को शिक्षकों की सफलता का प्रदर्शन करने के लिए आमंत्रित करते हैं। यह शिक्षक को गर्व की महान भावना देता है। जिसे उनके अंदर वो जज्बा पैदा होता है जो उन्हें देश के नन्हें भविष्य को अच्छे तैयार करने में मदद करता है।

3.2.1 फाउंडेशन उत्सव के माध्यम से एक ऐसा संदेश भेजने की कोशिश करता है जिसे लगे कि शिक्षक अभी भी राष्ट्र निर्माता हैं। इस समारोह के माध्यम से वे इस बारे में शिक्षकों को भी ये सब याद दिलाने का प्रयास करते हैं। आयोजन के बाद फाउंडेशन का अगला काम प्रशिक्षण देना है। गौरव बार-बार उल्लेख करते हैं कि उनकी टीमों ने पुस्तकों को अच्छी तरह से पढ़ने का प्रयास किया है। टीम के लोगों ने प्रशिक्षण सामग्री और शोध पत्रों की गहराई से समझ हासिल कर ली है। अब ये लोग शिक्षकों को एक साधारण और सुपर मज़ेदार तरीके से पेश करते हैं ताकि उन्हें अच्छे से समझ आए जाए।

ये भी पढ़ें: बेघर हुईं आवारा पशुओं की देखभाल करने वाली अम्मा, पाल रही थीं 400 आवारा कुत्ते

Add to
Shares
946
Comments
Share This
Add to
Shares
946
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags