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इंटरनेट साथी के जरिए महिलाओं को रोजी रोटी कमाने के अवसर देगी गूगल

महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाने के लिए गूगल की एक बेहतरीन पहल...

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6th Dec 2017
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 ग्रामीण महिलाओं को इंटरनेट साथी के तौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये महिलाओं गावों में जाकर दूसरी महिलाओं को इंटरनेट सिखाएंगी। इसकी शुरुआत जुलाई 2015 में हुई और इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में महिलाओं में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है।

इंटरनेट साथी की पहल का फायदा उठातीं ग्रामीण महिलाएं

इंटरनेट साथी की पहल का फायदा उठातीं ग्रामीण महिलाएं


इससे ग्रामीण भारत में इंटरनेट साथियों के लिए आय सृजन के नये अवसर पैदा होंगे। पिछले साल अगस्त में उत्तर प्रदेश के 33 जिलों की 40 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को इसके जरिए जोड़ने का प्रयास किया गया था।

इस कार्यक्रम के तहत न केवल महिलाओं को सूचना हासिल करने और सेवाओं का लाभ उठाना बताया जा रहा है बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाया जा रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी और प्रमुख टेक्नॉलजी कंपनियों में से एक गूगल भारत में इंटरनेट साथी प्रोग्राम के जरिए महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है। इस काम में उसे टाटा ट्रस्ट का भी सहयोग मिल रहा है। इसकी शुरुआत जुलाई 2015 में हुई और इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में महिलाओं में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है। कंपनी ने इस कार्यक्रम के तहत अब तक 30,000 इंटरनेट साथिनों को प्रशिक्षण दिया है जिसका असर देश में 1.2 करोड़ महिलाओं पर हुआ है।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट यूजरबेस वाला देश है। लेकिन यहां महिला और पुरुष के बीच भेद भी काफी होता है। इंटरनेट साथी योजना के तहत कंपनी ग्रामीण महिलाओं के साथ सक्रियता के साथ काम कर रही है ताकि गांवों में इंटरनेट सेवा मुहैया कराई जा सके। टाटा ट्रस्ट की मदद से गूगल ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को साइकल, मोबाइल, टेबलेट और प्रशिक्षण सामग्री दे रही है। इन महिलाओं को इंटरनेट साथी के तौर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये महिलाओं गावों में जाकर दूसरी महिलाओं को इंटरनेट सिखाएंगी।

गूगल की मार्केटिंग हेड सपना चड्ढा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट साथी कार्यक्रम का हिस्सा बनी महिलाओं का मानना है कि प्रशिक्षण के बाद उनकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है। उन्होंने कहा, इनमें से अनेक ने खुद का कारोबार स्थापित किया। इससे हमें एक ऐसा टिका ढांचा बनाने की प्रेरणा मिली जो कि इंटरनेट साथिनों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करे।

टाटा ट्रस्ट ने फाउंडेशन फोर रूरल इंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट फ्रेंड स्थापित किया है। यह संस्थान कंपनियों व संस्थानों को इंटरनेट साथिनों की सेवाओं के इस्तेमाल में मदद करेगा। चड्ढा ने कहा कि इससे ग्रामीण भारत में इंटरनेट साथियों के लिए आय सृजन के नये अवसर पैदा होंगे। पिछले साल अगस्त में उत्तर प्रदेश के 33 जिलों की 40 लाख से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को इसके जरिए जोड़ने का प्रयास किया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने टाटा ट्रस्ट और गूगल की मदद से इन जिलों के 27,000 गांवों में 40 लाख महिलाओं को इंटरनेट चलाने का प्रशिक्षण देने की योजना बनाऊ थी। इन महिलाओं को इंटरनेट साथी कार्यक्रम से जोड़ते हुए यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खास बात यह है कि इंटरनेट का प्रशिक्षण देने के लिए गांवों की महिलाओं को ही चुना गया।

टाटा ट्रस्ट के इनोवेशन हेड गणेश नीलम ने कहा, 'इस कार्यक्रम के तहत न केवल महिलाओं को सूचना हासिल करने और सेवाओं का लाभ उठाने के बताया जा रहा है बल्कि उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाया जा रहा है।' गूगल इंडिया इन महिलाओं को छह महीने तक प्रतिमाह 1000 रुपये दे रही है। गूगल इंडिया की मार्केटिंग प्रमुख सपना चड्ढा ने कहा, 'ये महिलाएं सूचना देकर ग्रामीणों को भी बदल सकती हैं। वे बदलाव की वाहक बन सकती हैं।'

यह भी पढ़ें: कैब और बाइक के बाद अब साइकिल की सवारी करवाएगा ओला, आईआईटी कानपुर से हुई शुरुआत

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