स्वच्छता अभियान में अनोखा योगदान, अब रद्दी बेचने के लिए 'जंककार्ट' को whatsapp कीजिए, घर आएंगे लोकल वेंडर्स

    By Ashutosh khantwal
    January 26, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:18:13 GMT+0000
    स्वच्छता अभियान में अनोखा योगदान, अब रद्दी बेचने के लिए 'जंककार्ट' को whatsapp कीजिए, घर आएंगे लोकल वेंडर्स
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    नीरज गुप्ता, शुभम शाह, प्रशांत कुमार और शैलेंद्र यादव ने रखी वीकएण्ड वर्क्स की नीव...

    जून 2015 में रखी कंपनी की नीव...

    लोकल वेंडर्स को जोड़कर सीधे लोगों के घरों से एकत्र कर रहे हैं वेस्ट...

    जंककार्ट के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा वेस्ट को किया जा सके री साइकिल, यही है मूल मकसद...


    इस समय स्वच्छ भारत अभियान की चर्चा हर तरफ हो रही है। यह अभियान सच में इतना अच्छा है कि हर व्यक्ति अपने आसपास साफ सफाई रखकर खुद को इस अभियान से जुड़ा पाता है। ऐसे में कई युवा उद्यमी आगे आए हैं जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपने काम द्वारा इस अभियान में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। ऐसी ही एक स्टार्टअप है वीकएण्ड वर्क्स, जिसकी नीव जून 2015 में रखी गई। इस कंपनी का उद्देश्य कई तरह के कामों जैसे फ्लीट मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट पर काम करना है। वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत इनका एक प्रोजेक्ट है जंककार्ट।

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    नीरज गुप्ता, शुभम शाह, प्रशांत कुमार और शैलेंद्र यादव नाम के इन चार युवाओं ने वीकएण्ड वर्क्स कंपनी की नीव रखी। नीरज और शुभम झारखंड से हैं। नीरज अभी दिल्ली विश्वविद्यालय के एसआरसीसी कॉलेज से स्नातक के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। नीरज नेत्रहीन हैं लेकिन अपने सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए उनमें गजब का उत्साह है। वहीं शुभम ने कोलकाता विश्वविद्यालय से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की है। प्रशांत और शैलेंद्र उत्तर प्रदेश से हैं और सॉफ्टवेयर कंपनी के लिए काम करते हैं। यह सभी चाहते थे कि वे समाज के लिए कुछ अलग व ऐसा काम करें जो लोगों से सीधे तौर पर जुड़ा हो और उनकी कोशिशें समाज की बेहतरी के लिए हों।

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    नीरज बताते हैं, 

    नई-नई स्टार्टअप्स के बारे में पढना और उनकी सक्सेस स्टोरी को जानना उन्हें बहुत अच्छा लगता था। मैं अक्सर देखता रहता था कि कौन-कौन सी नई स्टार्टअप्स आ रही हैं और वे किस प्रकार काम कर रही हैं। तभी एक दिन मेरे मन में विचार आया कि गली मुहल्लों में रोज ही रद्दी वाले चक्कर लगाते रहते हैं। क्यों न इन्हीं के काम को एक सही व व्यवस्थित तरीके से सेट किया जाए। जिससे जनता को भी फायदा मिलें और इन रद्दी वालों को भी फायदा हो। 

    जब नीरज ने इस आइडिया को अपने बाकी साथियों के साथ शेयर किया तो उन्हें भी यह आइडिया काफी पसंद आया और चारों इस काम की रूपरेखा तैयार करने में जुट गए। नीरज बताते हैं कि जंककार्ट में हम लोग लोकल वेंडर्स को अपने साथ जोड़ते हैं और उन्हें रद्दी व घर का पुराना बेकार सामान की बिक्री के ऑर्डर दिलवाते हैं। हम लोग बहुत ही सुव्यवस्थित तरीके से इस काम को करते हैं। कोई भी व्यक्ति हमारी वेबसाइट पर आकर हमें मैसेज कर सकता है। वट्सऐप कर सकता है या हमें सीधा फोन करके भी अपनी रद्दी बेचने के लिए ऑर्डर कर सकता है। हम सीधा उस ऑर्डर को उन वेंडर्स तक पहुंचा देते हैं जो हमसे जुड़े होते हैं और जल्दी ही वह वेंडर उस पते पर जाकर ऑर्डर ले लेते हैं।

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    अकसर देखा गया है कि लोग सभी रद्दीवालों पर यकीन नहीं करते और अक्सर तराजू सही नहीं होने की शिकायत भी करते हैं। ऐसे में हम लोगों ने अपने सभी वेंडर्स को इलैक्ट्रॉनिक तराजू दिया हुआ है ताकि किसी ग्राहक के मन में तोल को लेकर शंका न हो। इसके अलावा हमारा हर वेंडर हमारी कंपनी की टोपी व बैच लगाकर ग्राहक के पास जाता है।

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    नीरज बताते हैं कि अक्सर यह भी देखा गया है कि कई सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहे वेंडर्स को भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां नहीं होती। जैसे यह लोग ग्राहकों से उनका कुछ सामान जोकि वेंडर्स को लगता है कि आगे नहीं बिकेगा, लेने से इंकार कर देते हैं। ऐसे में हम उन वेंडर्स को जानकारी देते हैं कि क्या-क्या सामान बाजार में बिकेगा और रीसाइकिल हो सकता है अत: वे वस्तुएं जो रीसाइकिल हो सकती हैं उन्हें लेने से इनकार न करें।

    जंककार्ट इस समय साउथ दिल्ली में सुचारु रूप से काम कर रहा है और इसी क्षेत्र में ये लोग अपनी मार्किटिंग पर फिलहाल फोकस कर रहे हैं। नीरज बताते हैं कि उनके दिल्ली के बाकी हिस्सों के लिए भी वेंडर्स से टाइअप हो चुका है और वे दिल्ली के बाकी हिस्सों में भी अपनी सेवाएं देने में सक्षम हैं। आगे नीरज बताते हैं कि हमें आगे बढने और पैसा कमाने की कोई जल्दबाजी नहीं है। हम जो भी काम अपने हाथ में ले रहे हैं पहले उसे अच्छी तरह पूरा करना चाहता है। हम एक-एक कदम आगे बढ़ाकर अपने काम को विस्तार देना चाहते हैं।

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    इस समय बाजार में जो भी लोग वेस्ट मैनेजमेंट पर काम कर रहे हैं अधिकांश के अपने वेयरहाउज हैं और अपना स्टाफ भी है। लेकिन कार्यक्षेत्र बड़ा होने और सीमित स्टाफ और संसाधन होने के कारण उन्हें लोगों के घरों तक पहुंचने और वेस्ट लेने में अमूमन दो से तीन दिन का समय लग जाता है जबकि जंककार्ट का अपना कोई स्टाफ नहीं है। यह लोग ऑडर्स को सीधा लोकल वेंडर्स तक तुरंत पहुंचा देते हैं जिसके चलते काम काफी जल्दी और आसानी से हो जाता है। नीरज बताते हैं कि हम लोगों के ऑडर को उसी दिन पूरा कर देते हैं इसलिए अब लोग हमारे काम को काफी सराह रहे हैं। आने वाले समय में हम इस काम को और बेहतर करना चाहते हैं।

    नीरज बताते हैं कि हमारा मकसद है कि हमारे काम से सभी को फायदा हो। जो भी हमसे जुड़ा हो चाहे वह ग्राहक हो या फिर वेंडर्स सभी को फायदा मिले। हम ग्राहकों को विभिन्न तरह के कूपन्स भी देते हैं। आगे नीरज बताते हैं कि आने वाले समय में हम लोग सेकेंड हैंड सामान को भी शामिल करना चाहते हैं। एक ऐसा मंच जहां लोग अपना पुराना सामान बेच सकें और यदि कोई सेकेंड हैंड सामान खरीदना चाहे तो खरीद भी सके। नीरज बताते हैं कि हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा वेस्ट रीसाइकिल हो। इससे हमारा या हमारे ग्राहकों का ही फायदा नहीं है बल्कि देश और पर्यावरण दोनों का फायदा है।

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