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‘Glitstreet’ से घर बैठे लीजिए शॉपिंग का मज़ा

दिल्ली के हर मार्केट का माल यहां मिलता है!

Sahil
28th Jun 2015
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Glitstreet एक ऐसी वेबसाइट है जो यूजर्स को दिल्ली के बेहतरीन कपड़ों के बाजार में विंडो शापिंग की ऑनलाइन सुविधा देती है। शाहपुर जाट, हौजख़ास विलेज, लाजपत नगर जैसे बाज़ार इसके ज़रिए ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को पता चल सके कि दिल्ली के प्रीमियम बुटिक्स और अपैरल स्टोर्स में कौन-सी चीज़ें किस कीमत पर बेची जा रही हैं। ये वेबसाइट यूजर को मनचाही चीज़, मनचाही जगह से मनचाही कीमत पर ढूंढ़ने की सुविधा देती है।

भरोसे की एक जांची-परखी कोशिश

आमतौर पर कंपनी शुरू करने के लिए युवा संस्थापकों को अपनी बड़ी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़नी पड़ती है। हालांकि, ये कहानी बिल्कुल अलग है। बिट्स पिलानी से ग्रेजुएशन और मैनेजमेंट कंसल्टेट का कोर्स करने वाले प्रणव गुप्ता ने ओपेरा कंपनी से अपनी नौकरी छोड़ दी थी, जबकि दूसरे सह-संस्थापक नीतीश भूषण और कार्तिक धर आईआईटी दिल्ली से हैं, और दोनों अपने नियोक्ता बेन एंड कंपनी से खुद का उद्यम शुरू करने के लिए छुट्टी पाने में भाग्यशाली रहे। वे दावा करते हैं, "हमारे नियोक्ता ने इस बारे में अविश्वसनीय रूप से समर्थन किया है।" मन में सुरक्षा की भावना के साथ तीनों ने एक अंकल के बेसमेंट से 2014 की शुरुआत में काम शुरू की। जैसे-जैसे महीने बीतते गए, उनकी उद्यमशीलता में रुचि बढ़ती गई और उनके नियोक्ता को भी धीरे-धीरे पता चल गया कि अब ये लोग कर्मचारी के तौर पर वापस आने वाले नहीं हैं।

Glitstreet कैसे काम करती है?

ग्लिटस्ट्रीट.कॉम ऐसी वेबसाइट है जो लोगों को दिल्ली के अपैरल स्टोर्स और बुटीक में से डिजाइनर्स के आधुनिकतम संग्रह को ढूंढ़ने में मदद करती है। ग्लिटस्ट्रीट का इस्तेमाल करके लोग सभी स्टोर्स में मौजूद सामान देख सकते हैं, मनचाहे कपड़ों को छांट सकते हैं और स्टोर जाकर उन्हें खरीद सकते हैं। नीतीश कहते हैं, “ऑनलाइन शॉपिंग की तमाम वेबसाइट मौजूद हैं, लेकिन रिटेल इन-स्टोर शॉपिंग को बेहतर बनाने के लिए कुछ ख़ास नहीं किया जा रहा है। हमारी ज्यादातर शॉपिंग अब भी घटिया स्टोर्स में होती है, हम इसी मार्केट के लिए काम कर रहे हैं।”

फिलहाल ये लोग दिल्ली के 50 से ज्यादा स्टोर्स को वेबसाइट में शामिल कर चुके हैं और कुछ ही महीनों में ये संख्या सैकड़ों में हो जाएगी। ग्लिटस्ट्रीट ने जान बूझकर हौजख़ास विलेज और शाहपुर जट जैसे मार्केट्स को टारगेट किया है, क्योंकि इनकी ऑनलाइन मौजूदगी न के बराबर है। कार्तिक का कहना है, “हम अपने यूजर को ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट जैसा ही जुड़ाव देना चाहते थे और साथ-साथ एक फैशन वेबसाइट का लुक और फील भी बनाए रखना चाहते थे।” डिजाइनर्स और बुटीक्स को वेबसाइट में लाने की प्रक्रिया इन मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। नीतीश कहते हैं, “समयसीमा तय करना और निश्चितता हमारी आदत थी। सड़कों पर जाना और लोगों को वेबसाइट के बारे में समझाना, ये अपने आप में एक अलग ही यात्रा थी। लेकिन, हमने इससे काफी कुछ सीखा। अगर हमें कोई कॉल मिलती है, तो 90% बार हम उसे उपभोक्ता में बदलने में कामयाब हो जाते हैं।” ग्लिटस्ट्रीट डिजाइनर्स और बुटीक को उनकी फोटो और पोर्टफोलियो वेबसाइट में डालने में अच्छा सौदा देता है।

हालांकि, वेबसाइट दिल्ली पर केंद्रित है लेकिन ग्लिटस्ट्रीट की योजना इस साल के अंदर दो और शहरों में पैर जमाने की है। ये लोग मोबाइल फोन उपभोक्ताओं पर भी अधिकार बनाना चाहते हैं। इस टीम के टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट प्रणव का कहना है, हमारे आईओएस और एन्ड्रॉयड एप्स अभी तैयार किए जा रहे हैं, ये लोगों को एकदम नए फीचर्स और एक्सपीरियंस के साथ शॉपिंग में मदद करेंगे। हम ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार करने के लिए भी निवेश कर रहे हैं, जिसमें कोई भी विक्रेता अपने कलेक्शन को महज कुछ क्लिक्स में अपडेट कर सकेगा। ग्लिटस्ट्रीट के जरिए हम भारत में इन-स्टोर शॉपिंग के अनुभव को पूरी तरह बदलना चाहते हैं।

ई-कॉमर्स के क्षेत्र में रोज़ नई कंपनियां शुरू हो रही हैं। पेरीफेरल इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है। भुगतान का तरीका और उपभोक्ता का अनुभव बेहतर हुआ है। लॉजिस्टिक्स कंपनियां तेज़ी से बढ़ी हैं।

ग्लिटस्ट्रीट में किसी प्रोडक्ट के बारे में पूरी जानकारी मौजूद है, जबकि प्राइसबाबा जैसे कई प्लेयर हैं, जो प्रोडक्ट की कीमत बताते हैं। मुंबई स्थित शापसेंस इन स्टोर अनुभव को बेहतर बनाने के लिए स्टोर पर एक कियोस्क मुहैया कराता है, ताकि आने वाले ग्राहकों को कोई परेशानी न हो।

बाज़ार बढ़ रहा है, ये देखना दिलचस्प होगा कि ग्लिटस्ट्रीट लोगों को संतोष जनक अनुभव दिलाने की दिशा में किस तरह आगे बढ़ता है।

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