संस्करणों
विविध

दिल जीतने वाला काम: बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए इंटरनेट से जुटाए गए 16 लाख रुपये

posted on 6th November 2018
Add to
Shares
619
Comments
Share This
Add to
Shares
619
Comments
Share

नन्हीं आरुषि कॉन्जेनिटल स्यूडोर्थरोसिस से पीड़ित है। यह ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डी के बीच में दरार आ जाती है और फिर वह अपने आप ठीक नहीं होती। इसके लिए आरुषि का ऑपरेशन होगा जिसके लिए 16 लाख रुपयों की जरूरत होगी।

आरुषि अपने भाई औऱ दादा-दादी के साथ

आरुषि अपने भाई औऱ दादा-दादी के साथ


आरुषि का एक जुड़वा भाई भी है। उसकी मां दोनों बच्चों को जन्म देने के दौरान चल बसी थीं। इसके बाद उसकी देखभाल दादा और दादी ने की। आरुषि के जन्म के वक्त उसकी मां को तेज रक्तस्राव हुआ जो कि बंद ही नहीं हुआ।

जब भी किसी जरूरतमंद की मदद की बात आती है तो इंटरनेट के जरिए होने वाली क्राउड फंडिंग एक सशक्त माध्यम के रूप में उभर रहा है। इसके जरिए न जाने कितने लोगों की जरूरतें पूरी हो चुकी हैं और न जाने कितनों की जान बच चुकी है। ऐसा ही हुआ 2 साल की आरुषि के साथ जिसके इलाज के लिए इंटरनेट यूजर्स ने करीब 16 लाख रुपये जुटा लिये। नन्हीं आरुषि कॉन्जेनिटल स्यूडोर्थरोसिस से पीड़ित है। यह ऐसी बीमारी है जिसमें हड्डी के बीच में दरार आ जाती है और फिर वह अपने आप ठीक नहीं होती। इसके लिए आरुषि का ऑपरेशन होगा जिसके लिए 16 लाख रुपयों की जरूरत होगी।

आरुषि का एक जुड़वा भाई भी है। उसकी मां दोनों बच्चों को जन्म देने के दौरान चल बसी थीं। इसके बाद उसकी देखभाल दादा और दादी ने की। आरुषि के जन्म के वक्त उसकी मां को तेज रक्तस्राव हुआ जो कि बंद ही नहीं हुआ। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर जान बचाने की कोशिश जरूर की लेकिन वे सफल नहीं हुए। आरुषि के पिता इस ग़म को सह नहीं पाए और 20 दिन के भीतर ही उनका भी देहांत हो गया। इसके बाद दादा और दादी पर दोनों बच्चों को पालने का जिम्मा आ गया।

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे नाम के फेसबुक पेज पर बात करते हुए दादा और दादी ने कहा, 'ये बच्चे बिना मां के पले हैं। हमने अपना बेटा भी खो दिया है। मेरा बेटा अपनी पत्नी को खोने का ग़म बर्दाश्त नहीं कर पाया और हमें भी छोड़कर चला गया और साथ में इन बच्चों को छोड़ गया। ये बच्चे कभी नहीं जान पाएंगे कि उनके मम्मी पापा कैसे थे।' जब आरुषि एक साल की हो गई तो उसके पैर में एक झुकाव देखा गया। उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया को पता चला कि उसे कॉन्जेनिटल स्यूडोर्थरोसिस नाम की बीमारी है। अगर इसे सही नहीं किया गया तो आने वाले वक्त में उसके पैर में और भी फ्रैक्चर्स हो सकते हैं, जो कि उसके लिए घातक साबित होगा।

अभी वह 2 साल की हो गई है और उसने अपने कदम नहीं रखे हैं क्योंकि वह चल नहीं सकती। दादा ने कहा, 'मुझे नहीं पता ये कैसे ठीक होगी, लेकिन मुझे अपनी पोती को हर हाल में बचाना है। मुझे पता है कि अगर मेरा बेटा जिंदा होता तो वह इसे बचाने के लिए कुछ न कुछ जरूर करता। अब ये बच्चे हमारी जिम्मेदारी हैं और हमें ही इन्हें पालना है।' हालांकि अभी 16 लाख रुपये इकट्ठा होने के लिए कुछ और पैसों की जरूरत होगी। अगर आप भी आरुषि की मदद करना चाहते हैं तो यहां से अपना योगदान दे सकते हैं।

यह भी पढ़ें: मां-बाप ने एक दिन की बच्ची को फेंका लावारिस, पुलिस ने बचाया

Add to
Shares
619
Comments
Share This
Add to
Shares
619
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें