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वीवीएस लक्ष्मण ने किया ऐसा काम, बचेगी लोगों की जिंदगी

29th Oct 2018
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वीवीएस लक्ष्मण अब स्टेम सेल डोनर बन गए हैं। उन्होंने बीते दिनों ब्लड-स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराने के बाद कहा कि सभी को दाता बनना चाहिए ताकि रक्त कैंसर से जूझ रहे हजारों लोगों को जीवनदान मिल सके।

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लक्ष्मण ने कहा कि वह थैलेसिमिया से पीड़ित कुछ बच्चों से मिले और यह जानकार उन्हें बहुत दुख हुआ कि इनमें से कई को महज 20 दिन पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है और उनकी जिंदगी की बहुत कम उम्मीद बची है।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सितारे क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने वो काम किया है जिससे किसी की जिंदगी बचाई जा सकेगी। दरअसल वीवीएस लक्ष्मण अब स्टेम सेल डोनर बन गए हैं। उन्होंने बीते दिनों ब्लड-स्टेम सेल डोनर के रूप में पंजीकरण कराने के बाद कहा कि सभी को दाता बनना चाहिए ताकि रक्त कैंसर से जूझ रहे हजारों लोगों को जीवनदान मिल सके। लक्ष्मण ने एक गैर-लाभकारी संस्था दात्री में अपना पंजीकरण कराया है। यह संस्थान अपनी मर्जी से ब्लड स्टेम सेल दान करने वालों की सूची रखता है और रक्त कैंसर तथा थैलेसिमिया जैसी रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों की मदद करता है।

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि जिंदा रहते हुए बहुत कम लोगों को जीवन बचाने का मौका मिलता है। जो व्यक्ति सिर्फ आपकी वजह से जीवित है, उससे मिलना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।' उन्होंने कहा कि 1.35 अरब जनसंख्या वाले देश में महज 3,72,000 लोग दात्री के साथ पंजीकृत हैं। लक्ष्मण ने कहा कि हजारों की संख्या में मरीज, दाताओं (डोनर) का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सभी से आगे आने और इस दिशा में प्रयास करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा, 'मुझे हाल ही में पता चला कि रक्त कैंसर और ऐसी कई जानलेवा बीमारियों को सामान्य ब्लड स्टेम सेल के जरिए ठीक किया जा सकता है। दान करने की प्रक्रिया बहुत आसान है.... किसी की जान बचाने के लिए बस आपके कुछ घंटे खर्च होने हैं।' लक्ष्मण ने कहा कि वह थैलेसिमिया से पीड़ित कुछ बच्चों से मिले और यह जानकार उन्हें बहुत दुख हुआ कि इनमें से कई को महज 20 दिन पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत होती है और उनकी जिंदगी की बहुत कम उम्मीद बची है।

विश्व में अब तक 75 किस्म की बीमारियों में स्टेम सेल का उपयोग हो चुका है। इन कोशिकाओं से दांत भी उगाए जा सकते हैं। मांसपेशियों की मरम्मत तो आम बात है। इसी प्रकार अल्जाइमर, दिल की बीमारियों, कैंसर, ऑर्थराइटिस जैसी लाइलाज बीमारियों का इलाज भी इस तकनीक से संभव है।

यह भी पढ़ें: ‘चलते-फिरते’ क्लासरूम्स के ज़रिए पिछड़े बच्चों का भविष्य संवार रहा यह एनजीओ

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