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मुंबई में ज़रूरतमंदों के लिए फरिश्ता है एक ऑटो ड्राइवर, मुफ्त में पहुंचाता है अस्पताल तक

3rd Dec 2015
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16 साल से मुंबई की सड़कों पर दौड़ा रहे हैं ऑटो...

फेसबुक या ट्विटर के जरिये बुक कर सकते हैं ऑटो...

बुजुर्गों को किराये में देते हैं रियायत...

लोगों को अस्पताल तक पहुंचाते हैं मुफ्त...

ऑटो में वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग और दूसरी कई सुविधाएं...

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के हैं फैन...


‘मुन्नाभाई एसएससी’ ये किसी फिल्म या किरदार का नाम नहीं है, ये नाम है एक ऑटो ड्राइवर का। जिसे सारी मुंबई इसी नाम से जानती है। असलियत में इनका नाम है संदीप बच्चे। जो पिछले 16 सालों से मुंबई में ऑटो रिक्शा चला रहे हैं। इनका दावा है कि जो सुविधाएं प्राइवेट टैक्सी या हवाई जहाज में भी नहीं मिलती उससे कहीं ज्यादा सुविधाएं ये अपने ऑटो में देते हैं। बावजूद इसके वो बुजुर्गों को किराये में राहत देते हैं, नेत्रहीन और अस्पताल जाने वालों को मुफ्त में सवारी कराते हैं। इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर अपनी जेब से मरीजों की मदद भी करते हैं। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के बहुत बड़े फैन संदीप हर सवारी से मिलने वाले किराये में से दो रुपये इकट्ठा कर बीमार और गरीबों की मदद करते हैं।

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कैसे बने ऑटो ड्राइवर

संदीप ने अपनी पढ़ाई दसवीं तक की है और बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के फैन होने के कारण उनके साथियों ने उनको ‘मुन्नाभाई एसएससी’ नाम दिया है। संदीप ऑटो चलाने से पहले एक टूर एंड ट्रैवल कंपनी में नौकरी करते थे। उस दौरान उनको लक्जरी बसों में काम करने का मौका मिला। वहां इनको मालूम हुआ कि कैसे इन बसों में थोड़े बदलाव कर उनको और बेहतर बनाया जाता है, लेकिन कुछ वक्त बाद इनको वो नौकरी छोड़नी पड़ी। तब इन्होने देखा कि मुंबई के ऑटो वाले अक्सर सवारी के साथ बहस में उलझे रहते थे। जहां सवारी चलने को कहती थी वो वहां जाने से इंकार कर देते थे। इसके अलावा जो लोग मुंबई के बाहर से यहां घुमने के लिए आते थे उनको काफी बुरा तजुर्बा होता था। तब इन्होने सोचा कि क्यों ना वो खुद ऑटो रिक्शा चलायें ताकि लोगों का ऑटो रिक्शा वालों के प्रति नजरिया थोड़ा बदल सकें।

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ऑटो में सुविधाएं

आज इनके हाईटेक ऑटो में गाने सुनने के लिए रेडियो है, किसी से फोन पर बात करनी है तो पीसीओ की सुविधा है, किसी को मोबाइल चार्ज करना चाहता है तो वो सफर के दौरान कर सकता हैं, किसी के मोबाइल में बैलेंस खत्म हो गया है तो उसे इनके ऑटो में बैठ कर रिचार्ज किया जा सकता है, अगर कोई सफर के दौरान कॉफी पीने के मजे लेना चाहता है तो उसका भी इंतजाम है, यात्रा के दौरान अगर कोई बोर हो रहा हो या किसी को कुछ जरूरी काम निपटाने के लिए इंटरनेट की जरूरत हो तो उसकी भी चिंता नहीं क्योंकि इनके ऑटो में वाई-फाई की सुविधा है, तो कुछ खाने के लिए चॉकलेट का इंतजाम भी है। अगर सवारी महिला हो तो उसके लिये आइने की सुविधा है। इनके रिक्शे में बैठ कर कोई भी रोज सोने, चांदी और डॉलर के भाव जान सकता है। स्टॉक मार्केट का हाल पता कर सकता है, मौसम की जानकारी ले सकता है। प्यास बुझाने के लिए पानी की बोतल तो वक्त और दिन देखने के लिए घड़ी और कलैंडर की भी व्यवस्था है।

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लोगों की मदद

संदीप ने भले ही अपने ऑटो को काफी हाईटेक बनाया हो लेकिन इसी ऑटो के जरिये वो सामाजिक सेवा भी करते हैं। वो अपने ऑटो में बैठने वाली बुजर्ग सावारियों को किराये में छूट देते हैं। जैसे मुंबई में मीटर से ऑटो किराया 18 रुपये से शुरू होता है लेकिन ये बुजुर्गों से शुरूआती मीटर का किराया 10 रुपये लेते हैं। इतना ही नहीं नेत्रहीनों को कहीं जाना हो या फिर किसी आम व्यक्ति को किसी भी अस्पताल जाना हो उससे ये किराया नहीं लेते। इनका कहना है कि “मुझे कई बार ऐसे लोग भी मिलते हैं जो मना करने के बाद भी मेरी सेवाओं को देखते हुए किराये से ज्यादा पैसा देते हैं। तो मैं वो पैसा गरीबों पर खर्च कर देता हूं।” इसके अलावा संदीप 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर, रक्षाबंधन और अभिनेता संजय दत्त का जन्मदिन के दिन लोगों को मुफ्त में सफर कराते हैं।

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संदीप के ऑटो में फर्स्ट एड किट भी हर वक्त तैयार रहती है और ये उसका इस्तेमाल रास्ते में मिलने वाले ऐसे लोग जो अपना इलाज नहीं कर पाते और उनको चोट लगी होती है उसके लिये करते हैं। साल 2004 में इनकी मां को कैंसर हो गया था इसलिए ये उस तकलीफ को समझते हैं। ये बताते हैं कि “जब भी मुझे वक्त मिलता है तो मैं कैंसर पीड़ितों से मिलता हूं उनको अपनी ओर से जितनी भी मदद हो सकती है वो करता हूं। भले ही मैं ये मदद खाने पीने में करूं या फिर पैसे से।” इसके अलावा ये डायलिसिस करवाने वाले गरीब लोगों की भी आर्थिक मदद करते हैं। संदीप का कहना है कि “मैं ज्यादा आर्थिक मदद नहीं कर सकता लेकिन जिसको जितनी जरूरत होती है उतनी मदद करने की कोशिश करता हूं। मैं उनको ज्यादा से ज्यादा 7सौ रुपये तक की मदद करता हूं।” इसके अलावा जो लोग इनके ऑटो में बैठते हैं उनसे से निवेदन करते हैं कि वो अपने पुराने कपड़े इनको दें, ताकि वो गरीब बच्चों और महिलाओं में उनको बांट सकें जिनको ज्यादा जरूरत है।

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संजय दत्त के फैन

संदीप फिल्म अभिनेता संजय दत्त के बहुत बड़े फैन हैं। तभी तो जब से संजय दत्त यरवदा जैल में बंद हैं तब से संदीप ने अपने पैरों में चप्पल या जूते पहनना बंद कर दिया है। पिछले ढाई साल से वो नंगे पैर ही हर जगह जाते हैं। खास बात ये है कि संजय दत्त भी इनका सम्मान करते हैं। जब संजय दत्त को साथी कैदियों से जेल में पता चला की संदीप ने उनके लिए जूते चप्पल पहनना छोड़ दिया है तो उसके बाद जब वो पैरोल पर बाहर आये तो संदीप को उन्होने अपने घर चाय पर बुलाया और उन्होने इनसे पूछा कि चप्पल कब पहनोगे ? जिसके जवाब में संदीप ने उनसे कहा कि जिस दिन वो उनके घर चाय पीने आएंगे उस दिन से वो चप्पल पहनना शुरू कर देंगे। इतना ही इन्होने अपने बाएं कंधे पर संजय दत्त का एक टैटू भी बनाया है।

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हाईटेक हैं संदीप

संदीप का ऑटो ही हाईटेक नहीं है बल्कि वो खुद भी हाईटेक हैं तभी तो उनकी मौजूदगी फैसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और हाइक पर भी हैं। वो इनके जरिये ऑनलाइन ऑटो की बुकिंग सुविधा भी देते हैं। इसके लिए ये 50 रुपये बुकिंग चार्ज लेते हैं और आधे घंटे में बुलाई गई जगह पर पहुंचने का दावा करते हैं। पिछले 16 साल से रिक्शा चला रहे संदीप को आरटीओ विभाग इनके अच्छे व्यवहार के कारण सम्मानित कर चुका है। संदीप के इस खास ऑटो में बॉलिवुड अभिनेता सलमान खान जैसे अभिनेता भी सफर कर चुके हैं। इसके अलावा कई टीवी और रेडियो शो इनके ऑटो में हो चुके हैं। इस वजह से सिर्फ मुंबई में नहीं बल्कि विदेशों में भी इनके चाहने वाले हैं फिर चाहे बात लंदन की हो या कैलिफोर्निया की या फिर जोहिनसबर्ग या ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की, हर किसी से ये इंटरनेट के जरिये जुड़े रहते हैं।

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मुंबई के बंद्रा खार इलाके में रहने वाले संदीप के परिवार में उनके पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। आज उनकी सामाजिक सेवाओं की बदलौत इनको कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। संदीप कहते हैं कि “ऑटो रिक्शा ने मुझे बहुत कुछ दिया। यही वजह है कि मैंने अपने हाथ में टैटू बनाया है जिसमें ऑटो का नंबर भी लिखा हुआ है। मुझे गर्व है कि मैं ऑटो रिक्शा ड्राइवर हूं।” गांधीगिरी के सिद्धांतों का पालन करने वाली संदीप ने अपने ऑटो में भी लिखा है “नो भाईगिरी ओनली गांधीगिरी”।

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