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सीधे खेतों से फल और सब्ज़ियां उपलब्ध करवा रहा जयपुर के दो युवाओं का यह स्टार्टअप

जयपुर के दो युवाओं ने शुरू किया किसानों और आम जनता के हित में स्टार्टअप...

11th Apr 2018
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लोगों की सेहत और ज़रूरत का ख़्याल रख रहा है, जयपुर आधारित स्टार्टअप, फ़्रेशोकार्ट्ज़ ऐग्री प्रोडक्ट्स। यह एक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस है, जहां पर किसानों के उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है और सप्लाई चेन को छोटा करते हुए ग्राहकों को बेहतर उत्पाद, कम क़ीमतों में उपलब्ध कराए जाते हैं।

राजेंद्र लोरा और नागेंद्र यादव

राजेंद्र लोरा और नागेंद्र यादव


फ़्रेशोकार्ट्ज़ दावा करता है कि उनका प्लेटफ़ॉर्म फ़िलहाल 200 किसानों और बी टू बी (बिज़नेस टू बिज़नेस) सेक्टर में 100 से ज़्यादा ग्राहक जुटा चुका है। ग्राहकों में आईटीसी होटल्स, हिल्टन जयपुर, कान्हा स्वीट्स जैसे कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं।

स्टार्टअप: फ़्रेशोकार्ट्ज़

फ़ाउंडर्स: राजेंद्र लोरा और नागेंद्र यादव

शुरूआत: 2016

आधारित: जयपुर

सेक्टर: ऐग्रीटेक

कामः ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्राहकों को सीधे किसानों से जोड़ना

फ़ंडिंगः जानकारी नहीं (राजस्थान सरकार द्वारा सहायता प्राप्त)

हम सभी यह चाहते हैं कि जो फल या सब्ज़ियां हम खा रहे हैं, वे ताज़े हों और पूरी तरह से प्राकृतिक हों। उन्हें उगाने में या भंडारण आदि के दौरान किसी तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल न किया गया हो। लोगों की सेहत और ज़रूरत का ख़्याल रख रहा है, जयपुर आधारित स्टार्टअप, फ़्रेशोकार्ट्ज़ ऐग्री प्रोडक्ट्स। यह एक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस है, जहां पर किसानों के उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है और सप्लाई चेन को छोटा करते हुए ग्राहकों को बेहतर उत्पाद, कम क़ीमतों में उपलब्ध कराए जाते हैं।

कंपनी के फ़ाउंडर्स, राजेंद्र लोरा और नागेंद्र यादव, दोनों ने ही हायर एजुकेशन के लिए 25 साल की उम्र में अपना गांव छोड़ा था। दोनों बताते हैं कि गांव छोड़ने के बाद से ही उनके ज़हन में ख़्याल था कि पढ़ाई पूरी करने के दौरान वह किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए कोई उपयोगी काम ज़रूर करेंगे। राजेंद्र, राजस्थान के नागौर ज़िले के रहने वाले हैं और उनका परिवार प्याज़ की खेती करता था। राजेंद्र ने आईआईआईटी (जबलपुर) से ग्रैजुएशन किया और इसके बाद वह काम के लिए मुंबई चले गए। वहीं नागेंद्र ने स्कूल की पढ़ाई गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) से की है। स्टार्टअप शुरू करने से पहले वह एक मल्टी नैशनल कंपनी में काम करते थे। नागेंद्र मध्य-पूर्व के कई देशों और ऑस्ट्रेलिया में भी काम कर चुके हैं। नागेंद्र के पास बतौर तकनीकी सलाहकार काम करने का भी अच्छा अनुभव है।

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राजेंद्र, फ़्रेशोकार्ट्ज़ के आइडिया की शुरूआत की कहानी साझा करते हुए बताते हैं, "एक बार मैं मुंबई में बेहद महंगे दामों पर प्याज़ ख़रीद रहा था। मैंने उसी समय अपने पिता जी को फोन लगाकर पूछा कि गांव में प्याज़ के दाम कैसे चल रहे हैं। पता चला कि शहर में गांवों की अपेक्षा दोगुने दाम पर प्याज़ बेचा जा रहा है। मैंने अपने कॉलेज के समय के दोस्त नागेंद्र को फोन लगाकर इस अंतर के बारे में बताया। लंबी चर्चा के बाद, हमने निष्कर्ष निकाला कि बाज़ार में बिचौलियों की वजह से ऐसा हो रहा है, जिसका नुकसान ग्राहक भुगत रहे हैं।"

राजेंद्र और नागेंद्र ने तय किया कि वे टियर-II शहरों से शुरूआत करेंगे। राजेंद्र ने बताया कि वह नागेंद्र के साथ जयपुर गए और वहां के बाज़ारों की स्थिति पर रिसर्च की। राजेंद्र कहते हैं कि जयपुर में बिचौलियों की स्थिति बेहद ख़राब थी और लोगों तक सामान भी अच्छा नहीं पहुंच रहा था और उन्हें क़ीमत भी ज़्यादा चुकानी पड़ रही थी। पूरी रिसर्च के बाद 2016 में फ़्रेशोकार्ट्ज़ ऐग्री प्रोडक्ट्स की शुरूआत हुई। दोनों ने मिलकर एक ऐसा तकनीक-आधारित ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया, जिसकी मदद से ग्राहकों और किसानों को सीधे तौर पर जोड़ा जा सके। आप फ़्रेशोकार्ट्ज़ की मोबाइल ऐप या वेबसाइट के ज़रिए फल और सब्ज़ियां वगैरह ऑर्डर कर सकते हैं। फ़्रेशोकार्ट्ज़ के मुताबिक़, स्टार्टअप ग्राहकों की मांग के आधार पर सीधे खेतों से सामग्री मंगवाता है और कम से कम क़ीमत पर ग्राहकों तक पहुंचाता है।

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दोनों फ़ाउंडर्स बताते हैं कि किसानों से ख़रीदे गए फलों और सब्ज़ियों को बेचना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम था। दोनों ने तय किया कि वे पहले बड़े ख़रीददारों को टार्गेट करेंगे। उन्होंने सबसे पहले होटलों, रेस्तरां, कैफ़े, रीटेलर्स और कैटरर्स से संपर्क करना शुरू किया। राजेंद्र कहते हैं, "हमारा एक ही लक्ष्य है कि फलों और सब्ज़ियों के सेक्टर में बेहद लंबी सप्लाई चेन के चलते होने वाले नुकसान को कम करना। फ़िलहाल भारत में खेतों से बाज़ार तक पहुंचने में नुकसान का प्रतिशत, 35% है। हम तकनीक की मदद से इस जटिल सप्लाई चेन को मैनेज करते हुए, पूरे देश में नुकसान के इस स्तर तो 5 प्रतिशत की दर तक लाने की कोशिश कर रहे हैं।"

फ़्रेशोकार्ट्ज़ दावा करता है कि उनका प्लेटफ़ॉर्म फ़िलहाल 200 किसानों और बी टू बी (बिज़नेस टू बिज़नेस) सेक्टर में 100 से ज़्यादा ग्राहक जुटा चुका है। ग्राहकों में आईटीसी होटल्स, हिल्टन जयपुर, कान्हा स्वीट्स जैसे कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं। फ़्रेशोकार्ट्ज़ के मुताबिक़, एक ही साल में कंपनी ने 2 करोड़ रुपए का आंकड़ा छू लिया। राजेंद्र बताते हैं कि कंपनी का मासिक रेवेन्यू 25 लाख रुपए तक है और कंपनी अभी मुनाफ़े में चल रही है। राजेंद्र ने बताया कि फ़्रेशोकार्ट्ज़ फ़िलहाल 20 लोगों की टीम के साथ काम कर रहा है। साथ ही, उन्होंने बताया कि कंपनी पूरी प्रक्रिया के दौरान 30 प्रतिशत तक का मार्जिन रखती है और 6-7 प्रतिशत का नेट प्रॉफ़िट होता है। अभी मासिक आधार पर 15-20 ग्राहक जुड़ते हैं।

कंपनी का लक्ष्य है कि अगले साल तक सालाना रेवेन्यू को 10 करोड़ रुपए के आंकड़े तक पहुंचाया जाए। भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए राजेंद्र ने बताया कि कंपनी का लक्ष्य है कि अगले दो सालों में 60 करोड़ रुपए का बिज़नेस किया जाए और पास के गांवों में कलेक्शन सेंटर खोले जाएं। राजेंद्र ने जानकारी दी कि टियर-II शहरों के बाद कंपनी टियर-I शहरों में भी अपने ऑपरेशन्स शुरू करेगी।

फ़्रेशोकार्ट्ज़ को प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग मिला। राजस्थान सरकार प्रदेश के स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए आईस्टार्ट नाम से एक इनक्यूबेशन प्रोग्राम चलाती है। फ़्रेशोकार्ट्ज़ को भी इस प्रोग्राम का फ़ायदा मिला। आईस्टार्ट की मदद से फ़्रेशोकार्ट्ज़ को को-वर्किंग स्पेस और विशेषज्ञों की सलाह का भरपूर सहयोग मिला। सरकार ने फ़्रेशोकार्ट्ज़ को 20 लाख रुपयों का भामाशाह टेक्नो फ़ंड और 10 लाख रुपयों का मार्केट असिस्टेंस फ़ंड मुहैया कराया।

यह भी पढ़ें: बेंगलुरु के इस दंपती ने अपने स्टार्टअप के माध्यम से उठाया पर्यावरण को सुधारने का जिम्मा

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