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बिहार में सीएम नीतीश की पहल ने कई दुल्हों को पहुंचाया जेल

बिहार में सीएम नीतीश की पहल का असर, बाल विवाह करने वालों को पकड़ रही है पुलिस...

9th Oct 2017
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वैशाली जिले के देसरी प्रखंड के चौनपुर नन्हकार गांव में गुरुवार की रात दो नाबालिग बहनों की शादी मुखिया और ग्रामीणों के हस्तक्षेप से रुकी। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)


इसकी जानकारी गांव के लोगों को मिल गई। ग्रामीणों ने इसकी सूचना मुखिया सुबोध ठाकुर को दी। मुखिया ने भी आगे बढ़कर बाल विवाह का विरोध किया और शादी रोकी गई।

बाल विवाह को रोकने की मुहिम चलाई जा रही है। इसके लिए कई सारी कोशिशें की जा रही हैं। हेल्पलाइन और गांव के जागरूक लोगों के सहयोग के साथ ही सरकार अब शादी कराने वाले पंडितों को भी इसमें शामिल कर रही है। 

बिहार में बाल विवाह और दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए अभियान का असर अब राज्य में देखने को मिल रहा है। इससे गांव के लोग न केवल अपनी बेटियों की शादी तय उम्र के बाद ही कर रहे हैं बल्कि दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन पर भी काफी सारे लोगों की कॉल आ रही हैं जिससे ऐसा काम करने वालों को पकड़ा भी जा रहा है। बिहार में काफी समय से बाल विवाह के रैकेट चलने की खबरें आती रहती हैं। इस समस्या को रोकने के लिए काफी दिनों से बिहार में बाल विवाह को रोकने और दहेज प्रथा को खत्म करने की मुहिम चलाई जा रही है।

महात्मा गांधी की 148 वीं जयंती समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अभियान शुरू किया था। बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद यह बिहार में काफी प्रचलित है। खासकर बिहार के ग्रामीण इलाकों में यह कुप्रथा बहुत बड़े स्तर पर फैली हुई है। कुछ वर्ष पहले तक बिहार में होने वाले कुल विवाह में से करीब 69 प्रतिशत बाल विवाह होते थे, लेकिन हाल ही में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में खुलासा हुआ कि लड़कियों की शिक्षा पर जोर के कारण पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा घटा है। नीतीश ने इस मौके पर कहा कि इसमें समाज के हर तबके का सहयोग जरूरी है और इसके लिए अगले साल 21 जनवरी को मानव श्रृंखला बनाकर समाज को जागरूक किया जाएगा।

सरकार इस अभियान से जुड़े लोगों से जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए सोशल मीडिया, विशेषकर फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल कर रही है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक वैशाली जिले के देसरी प्रखंड के चौनपुर नन्हकार गांव में गुरुवार की रात दो नाबालिग बहनों की शादी मुखिया और ग्रामीणों के हस्तक्षेप से रुकी। गांव के राम बाबू पासवान अपनी 15 वर्षीय और 13 वर्षीय दो पुत्रियों की शादी दोगुने उम्र के लड़कों के साथ अपने घर पर ही कर रहे थे। इसकी जानकारी गांव के लोगों को मिल गई। ग्रामीणों ने इसकी सूचना मुखिया सुबोध ठाकुर को दी। मुखिया ने भी आगे बढ़कर बाल विवाह का विरोध किया और शादी रोकी गई।

इसके अलावा नालंदा में भी ऐसा ही मामला देखने को मिला जहां उत्तर प्रदेश के एक अधेड़ की शादी बिहार के नालंदा की एक नाबालिग लड़की से कराए जाने की तैयारी थी लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस ने कार्रवाई कर सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि दनियावां के सूर्य मंदिर में बाल विवाह के तहत शादी का पूरा कार्यक्रम था। लेकिन नाबालिग लड़की के भाई ने इसकी सूचना मोबाइल के जरिए पुलिस को दे दी। इसके बाद एसएसपी के निर्देश पर दनियावां थानााध्यक्ष नदीम अख्तर ने दूल्हा और शादी मे शामिल लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में शादी करवा रहे दलाल को भी पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक अधेड़ की शादी कराने वाले लोग बाल विवाह कराने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं। पुलिस को इनसे एक और सदस्य के बारे में पता चला जो कि मौके से फरार हो गया। उसकी भी तलाश जारी है। बताया जा रहा है कि शादी के लिए लड़की के पिता को पैसों का लालच दिया जा रहा था। बिहार में ऐसे ही कई सारे मामले हाल में देखने में आए हैं जहां चाइल्ड लाइन या गांव वालों के हस्तक्षेप की वजह से बाल विवाहों को रोका गया और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। इससे पहले राज्य में शराबबंदी जैसा बड़ा फैसला लिया गया था जिसके बाद घरेलू हिंसा जैसे मामले में काफी कमी आई है।

अब बाल विवाह को रोकने की मुहिम चलाई जा रही है। इसके लिए कई सारी कोशिशें की जा रही हैं। अभी हाल में ही बिहार में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए एक अनोखी पहल के तहत ऐप लॉन्च किया गया है। संयुक्त राष्ट्र पॉप्युलेशन फंड द्वारा समर्थित इस ऐप को 270 सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन ने मिलकर तैयार किया है। जेंडर अलायंस बिहार पहल के तहत लॉन्च किए गए इस ऐप का नाम 'बंधन तोड़' है। 

हेल्पलाइन और गांव के जागरूक लोगों के सहयोग के साथ ही सरकार अब शादी कराने वाले पंडितों को भी इसमें शामिल कर रही है। अब शादी संपन्न कराने वाले पंडितों को यह लिखकर देना होगा कि जिस लड़की की उन्होंने शादी कराई है वह लड़की बालिग है। हालांकि इन सारे प्रावधानों के बावजूद बाल विवाह पर पूरी तरह से अंकुश लगना तो मुश्किल है लेकिन इतना जरूर है कि इसमें भारी कमी आएगी। इसके अलावा सरकार को शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि जब तक शिक्षा का विकास और गरीबी का उन्मूलन नहीं होता तब तक ना बाल विवाह और दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करना मुश्किल है।

यह भी पढ़ें: 'बंधन तोड़' ऐप के जरिए बिहार में बाल विवाह रोकने की मुहिम शुरू

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