खेती को ऑटोमैटिक कर रहा है बेंगलुरु का यह एग्रीटेक स्टार्टअप

CultYvate, Farm2Fork Technologies Pvt Ltd का एक कृषि-तकनीक प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म स्मार्ट सिंचाई सिस्टम बनाता है जो किसानों के लिए सिंचाई को ऑटोमैटिक करने के साथ-साथ इसे आसान भी बनाता है।
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मल्लेश टी कर्नाटक के मांड्या जिले के एक किसान परिवार में पले-बढ़े। भारत की सबसे अधिक लाभदायक फसलों में से एक धान उगाने वाला जिला होने के बावजूद मल्लेश महसूस कर सकते थे कि मांड्या के किसान निराशा में हैं।

मल्लेश ने योरस्टोरी को बताया, “मांड्या से होकर कावेरी सहित लगभग पांच नदियों गुजरती हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां के किसानों ने खराब सिंचाई की शिकायत की। इस जिले में पूरे राज्य के मुकाबले किसान आत्महत्या की दर भी सबसे ज्यादा है। यह काफी भ्रमित करने वाला था क्योंकि पास के कोलार जिले में भूजल की कमी थी, लेकिन फिर भी यह व्यावसायिक फसलें उगाकर खूब फल-फूल रहा था।”

मल्लेश कहते हैं कि उन्होंने महसूस किया कि समस्या जल संसाधनों की कमी नहीं बल्कि उचित सिंचाई तकनीकों की कमी थी। उन्होंने इस स्थिति में ऑटोमेशन यानी स्वचालन की गुंजाइश देखी। यह एक ऐसा आइडिया था जिसके परिणामस्वरूप अंततः CultYvate की नींव पड़ी। CultYvate एक एग्रीटेक प्लेटफॉर्म है जिसका उद्देश्य सीमांत किसानों के लिए कृषि उत्पादकता को बढ़ाना है।

CultYvate को 2016 में स्थापित किया गया था और यह Farm2Fork Technologies Pvt Ltd के तहत चलाया जाता है। स्टार्टअप कुशलतापूर्वक फसलों की सिंचाई करने के लिए विभिन्न अवधारणाओं, उपकरणों और विधियों को लागू करता है। यह उत्पादों को विकसित करने के लिए IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट, मशीन लर्निंग (ML) और विभिन्न फसल मॉडल को एक साथ जोड़ता है।

स्मार्ट सिंचाई सिस्टम के अलावा, CultYvate स्मार्ट फर्टिगेशन सिस्टम भी तैयार करता है - जिसका उर्वरकों को डालने, मिट्टी में संशोधन करने, पानी में संशोधन करने और अन्य पानी में घुलनशील उत्पादों को एक सिंचाई सिस्टम और ग्रीनहाउस ऑटोमेशन तकनीकों में इस्तेमाल किया जाता है। यह भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करता है।

यह कैसे काम करता है

CultYvate उन कंपनियों के साथ सहयोग करता है जो एक गाँव में सिंचाई उपकरण की आपूर्ति करती हैं और फिर यह फसल की किस्म, मिट्टी के प्रकार और अन्य कृषि-जलवायु स्थितियों जैसी जानकारी के आधार पर स्मार्ट सिंचाई सिस्टम विकसित करता है।

मल्लेश बताते हैं, “हम एक सिस्टम विकसित करने के लिए लगभग 10,000 रुपये का निवेश करते हैं जो लगभग पांच एकड़ भूमि के लिए सिंचाई को ऑटोमैटिक कर सकता है। सिस्टम एक सीजन के लिए एक्सपेरिमेंट आधार पर स्थापित किया जाता है। हमारे साथ सहयोग करने वाली कंपनियां एक्सपेरिमेंट के लिए भुगतान करती हैं। किसान इस सिस्टम को अपनाते हैं और इसके लाभों का एहसास होने के बाद सीधे भुगतान करते हैं।”

स्मार्ट सिस्टम किसान को खेत में कदम रखने की आवश्यकता के बिना समय पर खेत में पानी की आपूर्ति पूरी करता है। सिस्टम सिंचाई के हर दौर के बाद किसान के मोबाइल फोन पर पानी की मात्रा, मिट्टी की नमी और मौसम की स्थिति पर एक रिपोर्ट भी भेजता है।

CultYvate का कहना है कि यह समाधान पेश करने से पहले फसल, जलवायु परिस्थितियों और मिट्टी के बारे में जानकारी एकत्र करने को प्राथमिकता देता है। यह इसे इकोफ्लो इंडिया, ब्लूरेन और गैल्कन जैसे सेगमेंट के अन्य खिलाड़ियों से अलग करता है।

मल्लेश कहते हैं, “भारतीय किसान बिजली, श्रम और अपनी खुद की गट फीलिंग के आधार पर अपनी जमीन की सिंचाई करते हैं। लेकिन अगर सही मात्रा में और सही समय पर फसलों को पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो निश्चित रूप से फसलों को नुकसान होगा।

फंडिंग

CultYvate ने हाल ही में Sunicon, The Chennai Angels, LV Angel Fund और Prodapt Technology Holding सहित अन्य मार्की निवेशकों के साथ Sirius One Capital Fund के नेतृत्व में एक प्री-सीरीज A राउंड ऑफ फंडिंग में 4.5 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

इसे कर्नाटक सरकार से भी ग्रांट मिला है।

सीरियस वन कैपिटल के जनरल पार्टनर, गुरुस्वामी रामसुब्रमण्यम ने CultYvate में अपने निवेश के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा, "पानी एक दुर्लभ संसाधन है और हर दिन दुर्लभ होता जा रहा है। CultYvate कृषि में इसके इस्तेमाल को ऑप्टिमाइज करने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है। एक सही टेक्नोलॉजी समाधान के साथ विश्व स्तर पर प्रासंगिक समस्या को हल करने के लिए जुनून और इनसाइट के साथ एक आंत्रप्रेन्योर का संयोजन हमारे लिए फायदे का सौदा साबित हुआ।"

धन जुटाने से पहले, CultYvate लगभग 200-300 किसानों पर ही असर डाल सका था। जुटाए गए फंड की मदद से स्टार्टअप का कहना है कि उसने कई राज्यों में लगभग 10,000 किसानों तक पहुंच बनाई है।

CultYvate, जिसमें प्रमुख संस्थानों के सलाहकारों सहित 24 सदस्यीय टीम है, का कहना है कि इसने लगभग 600 करोड़ लीटर पानी के संरक्षण में मदद की है। पिछले 24 महीनों में, इसने पांच राज्यों - आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पंजाब के 1,250 किसानों के जीवन को प्रभावित किया है।

भविष्य की उपज

मार्केट्स एंड मार्केट्स रिसर्च ग्रुप ने अनुमान लगाया है कि वैश्विक सिंचाई ऑटोमेशन मार्केट का साइज 2020 से 18.5 प्रतिशत की अनुमानित सीएजीआर से बढ़कर 2025 तक 6.7 बिलियन डॉलर के मूल्य तक पहुंच जाएगा।

CultYvate का कहना है कि वह सेटेलाइट कनेक्शन के माध्यम से बड़े क्षेत्रों को कवर करने के लिए अपने सिस्टम विकसित करके इस अवसर का लाभ उठाने की योजना बना रहा है।

फार्म-टू-फोर्क सेगमेंट में स्टार्टअप्स में Ninjacart, SaaS-आधारित प्लेटफॉर्म जैसे CropIn, EM3 Agri Services और CultYvate की तरह प्लेटफॉर्म जैसे Aibono, Fasal और DeHaat शामिल हैं।

टीम मशीन लर्निंग प्रोडक्ट्स को डेवलप करने के लिए, विशेष रूप से गन्ना और कपास के लिए सिंचाई समाधान विकसित करने के लिए Google के साथ भी काम कर रही है।

Edited by Ranjana Tripathi

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