निर्भया के दोषियों को फांसी देने जा रहे जल्लाद का बड़ा बयान, कहा- ऐसे मरने जा रहे हैं आरोपी...

By yourstory हिन्दी
January 25, 2020, Updated on : Sat Jan 25 2020 08:31:31 GMT+0000
निर्भया के दोषियों को फांसी देने जा रहे जल्लाद का बड़ा बयान, कहा- ऐसे मरने जा रहे हैं आरोपी...
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निर्भया के दोषियों को फांसी देने जा रहे जल्लाद पवन कुमार ने आरोपियों को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। पवन अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के जल्लाद हैं।

जल्लाद पवन कुमार

जल्लाद पवन कुमार



दिल्ली के निर्भया कांड के दोषियों की फांसी को लेकर स्थिति लगभग स्पष्ट हो चुकी है। अगर सबकुछ सही रहा तो इन सभी चारों दरिंदों को अगले महीने फांसी पर लटकाया जा सकता है।


इसी बीच चर्चित जल्लाद पवन कुमार ने दोषियों को लेकर बयान जारी किया है। पवन कुमार ने न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी से बातचीत में चारों के लिए शून्य सहानुभूति कहा,

“ये जानवरों की तरह मरने जा रहे हैं, न कि इन्सानों की तरह।”

तीसरी पीढ़ी के जल्लाद हैं पवन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश स्थित मेरठ के निवासी पवन कुमार अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के जल्लाद हैं। पवन को इनके काम के एवज में हर महीने 5 हज़ार रुपये की राशि मिलती है, जिससे परिवार का गुज़ारा बामुश्किल ही हो पता है, लेकिन पवन कहते हैं,

“मेरे आस-पास और मेरे परिवार के लोगों ने हमेशा मेरे साथ अच्छा बर्ताव किया है, लेकिन इस फांसी के बाद मेरे लिए इज्जत और बढ़ जाएगी।”

पवन का मानना है कि देश में इस तरह के अपराध पर तभी लगाम लगेगी, जब दोषियों को फांसी होगी। पवन के अनुसार दोषी आजीवन कारावास पाने के बाद अपील करते हैं और जमानत पर बाहर आकर फिर से अपराध करते हैं।

1 फरवरी को होगी फांसी!

निर्भया के आरोपियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश जारी किया गया है। 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए इस जघन्य अपराध में एक नाबालिग समेत 6 लोगों ने मेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में दुष्कर्म करने के साथ उसपर लोहे की रोड से हमला किया था। हमले में बुरी तरह घायल पीड़िता और उसके मित्र को आरोपी चलती बस से सड़क पर फेंक कर फरार हो गए थे।


पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान 2 हफ्तों में पीड़िता ने दम तोड़ दिया था। घटना के बाद देशभर में लोगों के बीच बेहद आक्रोश का माहौल था, लोग महिलाओं की सुरक्षा को मुद्दा बनाते हुए सड़कों पर उतर आए थे।


वारदात में कुल 6 लोग दोषी थे, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल था। नाबालिग को बाल सुधार गृह में 3 साल के लिए रखा गया था, जबकि एक अन्य आरोपी ने जेल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।