ब्रिटेन की पीएम Liz Truss का इस्तीफ़ा, सिर्फ़ 6 हफ्ते बाद ही क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी

By Prerna Bhardwaj
October 20, 2022, Updated on : Thu Oct 20 2022 14:58:20 GMT+0000
ब्रिटेन की पीएम Liz Truss का इस्तीफ़ा, सिर्फ़ 6 हफ्ते बाद ही क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी
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6 सितंबर 2022 को लिज़ ट्रस ने क्वीन एलिज़ाबेथ के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की शपथ ली थी. 44 दिन बाद इंग्लैंड के नए मोनार्क किंग चार्ल्स को जानकारी देते हुए आज ट्रस ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के अपने दफ्तर के बाहर प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया है. महज 44 दिन पहले देश की कमान संभालने वाली लिज़ ट्रस ने अपने इस्तीफे में कहा कि वे अपने वादे पूरे करने में सफल नहीं रहीं और इस नाकामी को स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रही हैं.


इसी के साथ लिज ट्रस ब्रिटेन के इतिहास में सबसे कम कार्यकाल वाली पीएम के रूप में दर्ज हो गईं हैं. महज 6 हफ्ते में ही उनकी सरकार इतने संकटों में फंस गई कि आखिरकार उन्हें इस्तीफा देने का एलान करना पड़ा. प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही लिज ट्रस को अपनी आर्थिक नीतियों के कारण लगातार कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था. लिज ट्रस के पहले उनकी कैबिनेट के दो मंत्री भी इस्तीफा दे चुके हैं. इनमें वित्त मंत्री क्वासी क्वार्टेंग और गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन शामिल हैं. दोनों के इस्तीफे के बाद से कयास लगाए जा रहे थे कि ट्रस भी ज्यादा दिन तक पद पर नहीं रहेंगी. इन सब के बीच उन्होंने एक बयान मैं कहा था कि वे मैदान छोड़ने की बजाय हालात का सामना करेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब अगले एक हफ्ते में कंजर्वेटिव पार्टी के लीडरशीप का चुनाव किया जाएगा जिसका मतलब है कि अगले एक हफ्ते में ब्रिटेन को अपना नया प्रधानमंत्री मिलेगा. ट्रस के इस्तीफे के साथ ही भारतीय मूल के ऋषि सुनक की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी मजबूत हो गई है. अगला प्रधानमंत्री चुने जाने तक ट्रस पद पर बनी रहेंगी. 


ब्रिटेन की इस राजनीतिक अस्थिरता के पीछे बड़ा कारण आर्थिक संकट है. ब्रिटेन में मुद्रास्‍फीति बढ़ी है. खाद्य सामग्री की कीमतों में इजाफा हुआ है.


मुद्रास्‍फीति बढ़ने का कारण सिर्फ कोविड पैन्डमिक के दौरान लॉकडाउन या रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं है, बल्कि ब्रिटेन में ब्‍याज दर का बढ़ना और वैश्विक आर्थिक मंदी की आहटें हैं.


ऐसे में ट्रस सरकार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती देश को आर्थिक समस्‍याओं से उबारना था. टैक्‍स में कटौती, यूरोपीय संघ के कानूनों से छुटकारा पाना, राष्‍ट्रीय बीमा वृद्धि को उलटने और हरित ऊर्जा लेवी की वसूली पर रोक लगाने का वादा उनके लिए भारी पड़ गया. ट्रस के इन वादों की वजह से पार्टी के अंदर ही कई लोग उनसे नाराज थे और ट्रस पर इस्तीफा देना पड़ा.