Budget 2023: R&D बेस्ड इंसेंटिव और नियमों का सरलीकरण चाहता है फार्मा उद्योग

By yourstory हिन्दी
January 20, 2023, Updated on : Fri Jan 20 2023 08:42:57 GMT+0000
Budget 2023: R&D बेस्ड इंसेंटिव और नियमों का सरलीकरण चाहता है फार्मा उद्योग
बजट में फार्मा इंडस्ट्री के लिए सपोर्टिव पॉलिसीज, सरल प्रावधान और सरल GST नियमों पर सोचा जाना चाहिए.
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फार्मा उद्योग (Pharma Industry) के विभिन्न संगठनों ने उम्मीद जताई है कि आगामी आम बजट में सरकार इनोवेशन के साथ शोध एवं विकास (R&D) पर ध्यान देते हुए क्षेत्र के लिए नियमनों के सरलीकरण के लिए कदम उठाएगी. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आगामी बजट में उद्योग की अपेक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए भारतीय फार्मास्युटिकल गठबंधन (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा है कि घरलू फार्मा उद्योग का आकार फिलहाल 50 अरब डॉलर का है. इसके 2030 तक 130 अरब डॉलर, जबकि 2047 तक 450 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.


उन्होंने बताया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए आम बजट 2023-24 इनोवेशन और शोध एवं विकास को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए, जिससे फार्मा उद्योग को आगे बढ़ने के लिए गति मिल सके. बजट में इस इंडस्ट्री के लिए सपोर्टिव पॉलिसीज, सरल प्रावधान और सरल जीएसटी नियमों पर सोचा जाना चाहिए.

जीवन-विज्ञान क्षेत्र पर भी दिया जाए ध्यान

आईपीए- सनफार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब, अरविंदो फार्मा, सिप्ला, ल्यूपिन और ग्लेनमार्क समेत 24 घरेलू फार्मा कंपनियों का गठबंधन है. भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पादक संगठन (ओपीपीआई) के महानिदेशक विवेक सहगल ने कहा है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ में वास्तविक योगदान के लिए जीवन-विज्ञान क्षेत्र को सक्षम बनाने के लिए सरकार को राजकोषीय प्रोत्साहन और अनुकूल नीतियां बनाने की जरूरत है. सरकार को निवेश के प्रमोशन के लिए R&D फोकस्ड इंसेंटिव्स लाने की जरूरत है. निवेश इंडस्ट्री के लिए लगातार और जरूरी डिमांड बना हुआ है. ओपीपीआई शोध आधारित फार्मा कंपनियों… एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन और मर्क आदि का प्रतिनिधित्व करता है.

पेशेवर चिकित्सा कर्मियों की कमी का हल निकालना भी जरूरी

नोवार्टिस इंडिया के भारत में प्रेसिडेंट अमिताभ दुबे के मुताबिक, सरकार को अनुसंधान आधारित प्रोत्साहन योजनाओं पर बल देने की जरूरत है क्योंकि इससे जीवनरक्षक दवाइयों की उपलब्धता बेहतर होती है. फोर्टिस हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशुतोष रघुवंशी का कहना है,‘‘पेशेवर चिकित्सा कर्मियों की कमी की समस्या को सुलझाने की जरूरत है. इसके लिए दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में काम करने के इच्छुक डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी कर्मियों को चिह्नित करने की जरूरत है.’’


जहां तक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की बात है, तो इंडस्ट्री बॉडी Nathealth के प्रेसिडेंट श्रवण सुब्रमण्यम ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चरल क्षमताओं का निर्माण करना अनिवार्य है ताकि लोगों की गुणवत्ता और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक अधिक पहुंच हो. उन्होंने कहा कि टियर-1 और टियर-2 शहरों में अस्पताल स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा वायबिलिटी गैप फंडिंग आवश्यक है, जिससे हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा मिले.


Edited by Ritika Singh