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नोटों पर पाबंदी को वापस लेने की संभावना को जेटली ने खारिज किया

नोटों को बंद करने पर अनावश्यक भय पैदा किया जा रहा है, फैसला वापस नहीं होगा : जेटली

PTI Bhasha
18th Nov 2016
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संसद के अंदर और बाहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संयुक्त विपक्ष के जोरदार हमले के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बड़े नोटों पर पाबंदी के फैसले को वापस लिए जाने की संभावना को खारिज करते हुए कहा है, कि सरकार राजनीति तथा देश की अर्थव्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने को प्रतिबद्ध है। वित्त मंत्री ने कहा कि ऊंचे मूल्य के नोटों को बंद करने फैसला बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया गया। उन्होंने कहा, कि बैंक शाखाओं में अब भीड़ घट रही है। प्रतिदिन 22,000 एटीएम को नए नोटों के अनुकूल व्यवस्थित किया जा रहा है।

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अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस मामले में अनावश्यक भय पैदा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने राज्यसभा में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के बयान की कड़ी आलोचना की और उनके बयान को एक गैर जिम्मेदाराना राजनीतिक बयान बताया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, कि वह उम्मीद करते हैं कि प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक, राजनीतिक दल, राज्य सरकारें इस बड़े प्रयास में सहयोग देंगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, बैंकिंग पहुंच बढ़ेगी, कराधान की मात्रा बढ़ेगी। बैंकों के पास अर्थव्यवस्था को समर्थन के लिए अधिक धन होगा।

जेटली ने कहा है, कि ‘अब कुछ लोगों द्वारा इस मामले में अनावश्यक भय पैदा किया जा रहा है। मैं उम्मीद नहीं करता कि एक या दो राज्यों के मुख्यमंत्री भी ऐसा करें।’ राजनीतिक दलों आम आदमी पार्टी (आप) तथा तृणमूल कांग्रेस की नोटों को बंद करने के फैसले को वापस लेने की मांग को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘आप और तृणमूल कांग्रेस ने इसे वापस लेने की जो मांग की है, उसका सवाल ही नहीं पैदा होता। यह प्रधानमंत्री तथा सरकार का राजनीति तथा देश की अर्थव्यवस्था की सफाई के लिए उठाया गया स्पष्ट फैसला है। हम इस पर कायम हैं।’ 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 500 और 1,000 का नोट बंद करने के सरकार के फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में रिज़र्व बैंक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन का आयोजन किया। उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग की क्योंकि इससे आम आदमी परेशान हो रहा है।

नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में जोरदार हंगामा हुआ। इससे राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। नोटबंदी पर संसद में मोदी से जवाब की विपक्ष की मांग पर जेटली ने कहा, ‘सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। यह सरकार का अधिकार है, कि बहस का जवाब कौन दे। ज्यादातर बहस हो चुकी है। मैं बहस में शामिल हुआ हूं। सरकार तय करेगी कि बहस का जवाब कौन देगा। यदि सरकार को किसी उचित समय पर यह लगता है कि प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करने की जरूरत है, हम उस वक्त इस पर विचार करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री का हर बहस में शामिल होना जरूरी नहीं है।’ जेटली ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद की कुछ टिप्पणियों की भी आलोचना की है।

यह पूछे जाने पर कि सरकार सिर्फ कालेधन को निकालने के लिए नोटों पर रोक क्यों लगा रही है?, जेटली ने कहा कि कालेधन के सृजन को रोकने के लिए नकदी को कम करना जरूरी है। जेटली ने इन आलोचनाओं को भी खारिज किया कि बैंकों ने बड़े औद्योगिक घरानों के ऋण को बट्टे खाते में डाल दिया है।

उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह गलतबयानी है। ये कर्ज कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दिए गए थे। सिर्फ कॉलम बदला है। कुछ निष्पादित आस्तियां गैर निष्पादित आस्तियां बनी हुई हैं। हम ऋण वसूली का प्रयास करते रहेंगे।

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