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धनंजय की बदौलत ट्रांसजेंडरों के लिए टॉयलट बनवाने वाली पहली यूनिवर्सिटी बनी पीयू

7th Nov 2017
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धनंजय ने शुरू से ही अलग टॉयलट की मांग की थी, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिल पा रहा था जिसके बाद उन्होंने आंदोलन करने का फैसला किया।

धनंजय चौहान

धनंजय चौहान


मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चंडीगढ़ शहर में करीब 2200 ट्रांसजेंडर्स हैं लेकिन सामाजिक बंधनों और दबाव के चलते ज्यादातर ने अपनी पहचान नहीं उजागर की है।

पंजाब यूनिवर्सिटी ने पिछले साल में सीनेट की बैठक में 23 लाख का बजट टॉयलेट्स के निर्माण के लिए मंजूर किया था। इस राशि से 5 टॉयलेट्स का निर्माण होना है। इस लिहाज से एक को बनाने में करीब 4 लाख 60 हजार का खर्च आया है।

चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय ट्रांसजेंडरों के लिए अलग टॉयलट बनवाने वाला पहला विश्वविद्यालय बन गया है। लंबे समय से ट्रांसजेंडर धनंजय चौहान और उनके साथियों द्वारा अलग टॉयलट की मांग की जा रही थी। इसके लिए छात्रों ने आंदोलन भी चलाया था और विश्वविद्यालय प्रशासन ने धनंजय से टॉयलट बनवाने का वादा भी किया थ। पिछले साल ही इसके लिए प्रशासन ने 23 लाख रुपये अनुमोदित किये थे। पंजाब यूनिवर्सिटी ने 2015 में पहली बार फॉर्म में ट्रांसजेंडरों के लिए तीसरे कॉलम की व्यवस्था प्रदान की थी।

पंजाब यूनिवर्सिटी में मानवाधिकार की पढ़ाई कर रहे चौहान 2014 से ट्रांसजेंडरों के अधिकार को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट भी ट्रांसजेंडरों के लिए अलग से टॉयलट की व्यवस्था करने के निर्देश जारी कर चुका है जिसके बाद यह मुहिम तेज हुई। केंद्र सरकार ने भी कहा था कि एलजीबीटी समुदाय के लोगों के लिए अलग से टॉयलट होने चाहिए। धनंजय ने शुरू से ही अलग टॉयलट की मांग की थी, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिल पा रहा था जिसके बाद उन्होंने आंदोलन करने का फैसला किया। उसके बाद उनसे कहा गया कि अगर यूनिवर्सिटी में और ट्रांसजेंडर स्टूडेंट ऐडमिशन लेते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं।

इस यूनिवर्सिटी में अभी पांच ट्रांसजेंडर छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। 46 वर्षीय धनंजय ने बताया कि उन्हें मजबूरी में दूसरे टॉयलट में जाना पड़ता था। वह कहते हैं, 'शुरू से ही मुझे ऐसा लगा कि एक इंसान के तौर पर मेरा कोई अधिकार ही नहीं है। हमेशा से मुझे उपेक्षित रहना पड़ा। लेकिन मैं इस हालात को बदलना चाहता था। कठिन प्रयासों के बाद ऐसा संभव हुआ है इससे आने वाले तमाम ट्रांसजेंडर स्टूडेंट्स को फायदा मिलेगा और देश के बाकी संस्थान भी इससे प्रेरणा लेंगे। मुझे लगता है कि हमारे संघर्षों से समाज थोड़ा बेहतर बन रहा है। आने वाले समय में LGBT समुदाय को उपेक्षा का कम सामना करना पड़ेगा।'

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चंडीगढ़ शहर में करीब 2200 ट्रांसजेंडर्स हैं लेकिन सामाजिक बंधनों और दबाव के चलते ज्यादातर ने अपनी पहचान नहीं खोली है। चुनाव आयोग की लिस्ट के अनुसार शहर में केवल 13 ट्रांसजेंडर हैं लेकिन अब जागरूकता आने पर इस वर्ग के कैंडिडेट लगातार सामने आ रहे हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स सेंटर पर टॉयलेट बनाने के लिए अप्रैल में निर्माण को लेकर संबंधित ठेकेदार को लेटर जारी किया गया और मई में काम शुरू हुआ। इसके बाद काफी दिनों के लिए काम रोक दिया गया। टॉयलट बनने में करीब महीने का समय लगा। अंतत: 5 नवंबर को पहला टॉयलेट बनकर तैयार हो गया। इसी सप्ताह 6 नवंबर को इसको इस्तेमाल के लिए खोल दिया गया। इसमें दो टॉयलेट सीट्स हैं और दो वॉशवेशन हैं। इसके अलावा फुल साइज का शीशा लगा हुआ है। पंजाब यूनिवर्सिटी ने पिछले साल में सीनेट की बैठक में 23 लाख का बजट टॉयलेट्स के निर्माण के लिए मंजूर किया था। इस राशि से 5 टॉयलेट्स का निर्माण होना है। इस लिहाज से एक को बनाने में करीब 4 लाख 60 हजार का खर्च आया है।

इसके अलावा दिसंबर में पंजाब यूनिवर्सिटी में 4 और टॉयलट बनने हैं। फिजिक्स , केमिस्ट्री, लॉ और मैथ विभाग में चार और टॉयलेट का निर्माण पीयू प्रशासन करेगा। निर्माण समय पर पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार पर जुर्माना होगा। यूनिवर्सिटी में धनंजय के अलावा 4 और ट्रांसजेंडर छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें ओशीन का दाखिला जर्मन में है वहीं प्रीत फैशन टेक्नोलॉजी इंस्टीटयूट और दिव्या हिंदी विषय की पढ़ाई कर रहे हैं। एक और ट्रांसजेंडर स्टूडेंट लॉ की पढ़ाई कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चंडीगढ़ शहर में करीब 2200 ट्रांसजेंडर्स हैं लेकिन सामाजिक बंधनों और दबाव के चलते ज्यादातर ने अपनी पहचान नहीं खोली है। चुनाव आयोग की लिस्ट के अनुसार शहर में केवल 13 ट्रांसजेंडर हैं लेकिन अब जागरूकता आने पर इस वर्ग के कैंडिडेट लगातार सामने आ रहे हैं। यूनियन टेरिटरी ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड के डायरेक्टर राजीव गुप्ता ने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी का कदम काबिले तारीफ है। शहर में और कई जगहों पर ऐसे ही टॉयलट बनाने की बात चल रही है।

यह भी पढ़ें: 181 साल बाद उत्तराखंड में शुरू होगी राज्य में पैदा की जाने वाली चाय की बिक्री

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