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अपना ट्यूबेल लगवाकर लोगों को मुफ्त में पिलाते हैं पानी, ताकि न होना पड़े बूंद-बूंद को मोहताज

Ashutosh khantwal
6th Dec 2015
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बाबूलाल कुम्हार राजस्थान के बूंदी जिले में लोगों को मुफ्त पानी देते हैं...

उनके इलाका थोड़ा उंचाई में है जहां पानी की किल्लत बनी रहती है और पानी के लिए लोगों को दूर जाना पड़ता है...

अपने इलाके के अलावा बूंदी जिले में ही अपने गांव जावरा में भी लोगों को पानी की समस्या से दिलाया छुटकारा...

पिछले कई सालों से लोगों को मुफ्त में पानी मुहैया करवा रहे हैं बाबूलाल...

शहर में लगभग 1500 और ग्रामीण इलाके में लगभग 800 लोगों की पानी की समस्या का किया समाधान....


कहा जाता है कि तीसरा विश्व युद्ध अगर हुआ तो कारण होगा पानी। मीठे पानी की लगातार बढ़ती किल्लत और ग्लोबर वॉर्मिंग की वजह से समुद्र के बढ़ते जलस्तर ने दुनिया के सामने एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है। दिन ब दिन पानी की समस्या जीने मरने का सवाल बनती जा रही है। हमारे देश में पानी की समस्या इतना विकराल रूप धारण कर चुकी है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान न निकाला गया तो आने वाले समय में हमें इसका काफी बड़ा मूल्य चुकाना होगा। पानी की समस्या अब केवल एक या दो राज्यों तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे भारत में चाहे वो गांव हो या फिर शहर लगभग हर जगह पानी का संकट देखने को मिल रहा है। हर साल देश के कई इलाकों में अकाल पड़ रहा है इस समस्या से लड़ने के लिए सरकार अपने स्तर पर काम भी कर रही है लेकिन पानी का संकट इतना व्यापक है कि सरकारी प्रयास भी नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं।

राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य जहां हमेशा से ही पानी की किल्लत रही है। गर्मियों के महीनों में तो ये समस्या और ज्यादा व्यापक हो जाती है। ऐसे में राजस्थान के बूंदी जिले के निवासी बाबूलाल पिछले कई वर्षों से लोगों की पानी की समस्या को दूर करने की अपनी मुहिम में लगे हुए हैं।

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बाबूलाल का जन्म राजस्थान के बूंदी जिले में हुआ यहीं उनकी शिक्षा दीक्षा भी हुई और यही उनकी कर्मभूमि भी है। वे एलआईसी में एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। उनका पैत्रिक गांव उनके निवास से 26 किलोमीटर दूर है जो बूंदी जिले में ही आता है। उनका बचपन वहीं बीता और नौकरी लगने के बाद वे शहर में आ गए। बाबूलाल जब भी लोगों को पानी के लिए परेशान होता देखते थे तो उन्हें काफी दुख होता था वे हमेशा से मानते थे कि पानी एक ऐसी चीज है जिस पर हर व्यक्ति का हक होना चाहिए लेकिन उनके इलाके में लोगों को पानी की कमी के कारण काफी परेशान होना पड़ता था। पानी लेने के लिए लोग कई किलोमीटर दूर जाया करते थे जहां वे लाइन लगा कर काफी घंटों तक इंतजार किया करते थे।

बाबूलाल ने सोचा कि क्यों न वे अपने प्रयास से लोगों की इस समस्या का समाधान करें। बाबूलाल ने अपने घर में ट्यूबवेल लगवाया और लोगों को अपने घर से ही पानी लेने को कहा। यह एक निशुल्क सेवा थी और लोग इनके यहां से अपनी जरूरत के अनुसार पानी लेने के लिए आने लगे। और सन 2008 से लेकर आज तक ये लोगों को मुफ्त में पानी देते हैं। ट्यूबवेल चलाने में बिजली का खर्च काफी ज्यादा आता है लेकिन ये सब खर्च खुद उठाते हैं और उस इलाके के लगभग 1500 लोगों को बाबूलाल के प्रयास से फायदा हो रहा है।

इस बीच बाबूलाल एक बार अपने गांव गए तो देखा कि उनके गांव में पानी की समस्या काफी व्यापक होती जा रही है। गांव के जो भी कुएं थे वहां के पानी में क्लोराइड की मात्रा काफी ज्यादा हो चुकी थी जो कई बीमारियों की जड़ थी। उस पानी के प्रयोग से लोगों को जोड़ों में दर्द होने लगा उसके अलावा लोगों को कई और छोटी बड़ी परेशानियां होने लगीं । बाबूलाल ने सोचा कि क्यों न वे अपने गांव के गरीब लोगों की भी मदद करें। बाबूलाल के पास भी एक कुंआ था जो नदी के पास था जिस कारण यहां का पानी थोड़ा साफ था। बाबूलाल ने सरकारी ऑफिसों के चक्कर काटकर और काफी प्रयास के बाद सांसद कोष से 80 हजार रुपये पास करवाए इन्होंने इस कुएं में मोटर लगवाई और गांव में पाईपलाइन लगवाई इसके अलावा गांव में दो पानी की टंकियां लगाई गई जहां से लोग साफ पानी ले जा सकते हैं। आज गांव में लगभग 500 लोगों को बाबूलाल के प्रयासों से सीधे तौर पर फायदा हो रहा है।

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उनके गांव से दो किलोमीटर दूर भी एक पिछड़ा इलाका है जहां पर बाबूलाल ने अपने अथक प्रयासों से सरकार का ध्यान खींचा और लोगों के लिए वहां भी पानी की मोटर लगवाई, जहां से साफ पानी सीधा टंकी में जाता है और लोग उस पानी को प्रयोग कर सकते हैं।

बाबूलाल के इस प्रयास में उनकी धर्मपत्नी कमलेश कुमारी का भी अहम योगदान है जब भी वे घर से दूर होते हैं उस समय लोगों को पानी भरवाने का काम कमलेश ही करतीं हैं। वो हमेशा बाबूलाल को लोगों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और हर कठिन समय में उनके साथ खड़ी होती हैं।

बाबूलाल बताते हैं कि लोगों को निशुल्क पानी मुहैया करवाने के काम को वे अपना धर्म मानते हैं। उन्हें इस काम से काफी संतुष्टि होती है वे कहते हैं कि वे कभी भी पैसे के पीछे नहीं भागते लोगों की मदद करने में ही उन्हें आनन्द आता है और वे हमेशा इस काम में लगे रहेंगे। वे अपने काम के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहते हैं।

बाबूलाल कहते हैं कि समाज के हर वर्ग को एक दूसरे की मदद के लिए आगे आना चाहिए। सबको मिलजुल कर रहना चाहिए । हमें धर्म जाति से उपर उठकर भाईचारे के साथ जीना चाहिए। देश में कई समस्याएं हैं जब तक लोग खुद एक दूसरे की मदद के लिए आगे नहीं आएंगे तब तक सरकार कितना भी प्रयास न कर लें कुछ नहीं हो सकता। इसलिए अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश को आगे बढ़ाएं।

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