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प्लास्टिक मनी, नुकसान कम फायदे ज्यादा... लेकिन संभल के!

नोटबंदी के चलते प्लास्टिक मनी का प्रयोग तेज़ी से बढ़ा है और कैश रखने का झंझट भी धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है। यह डिजीटलाइजेशन आपके लिए फायदेमंद हो न हो, लेकिन नुकसानदेह बिल्कुल नहीं होना चाहिए। आईये जानें उन सावधानियों के बारे में जो प्लास्टिक मनी के प्रयोग में ज़रूरी हैं...

29th Dec 2016
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8 नवंबर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी ने कैश की जगह प्लास्टिक मनी नाम से प्रसिद्ध क्रेडिट और डेबिट कार्ड को तेजी से प्रचलन में ला दिया है। लगभग सभी बैंक अपने ग्राहकों को डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुविधा दे रहे हैं। सभी के हाथों में प्लास्टिक मनी आ गया है, जिसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कैश कैरी करने के झंझट से मुक्ति मिल गई है। बड़ी रकम ले कर चलने वालों को कैश चोरी होने, खोने, गुम हो जाने का जो डर बना रहता था, उनके लिए डेबिट कार्ड एक बेहतर विकल्प है। वैसे देखा जाये तो प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल अच्छा ही है, लेकिन इसके इस्तेमाल में कई तरह की बातों का ध्यान रखना भी ज़रूरी होता है। एक बार कार्ड गुम हुआ तो पता लगाना मुश्किल होता है, इसलिए योरस्टोरी टीम आपको बतायेगी प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल और रख रखाव के बारे में। शुरू से लेकर अंत तक की सारी जानकारी आप इस लेख में पढ़ पायेंगे। क्योंकि प्लास्टिक मनी जहां ग्राहकों के लिए एक बड़ी सहूलियत है वहीं यदि सावधानी न रखी जाये, तो उपभोक्ता बड़ी मुश्किल में भी फंस सकते हैं।

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"इंटरनेट की कंज़्यूमर कोर्ट वेबसाइट पर प्रज्ञा की एक शिकायत दर्ज़ हुई। प्रज्ञा मुंबई की रहने वाली है और मॉरिशस घूमने गई थीं। वहां किसी ने उनका पर्स चुरा लिया, पर्स में क्रेडिट कार्ड कैश और छोटी डायरी थी, डायरी में ही प्रज्ञा बैंक संबंधित जानकारी लिख रखी थी, लेकिन वही जानकारी प्रज्ञा ने कहीं और भी लिख कर रखी थी, जिसके चलते कस्टमर केयर की मदद से कार्ड ब्लॉक हो गया, लेकिन ब्लॉक कराने में समय लगा और इसी बीच अकाउंट से पचास हज़ार का ट्रांजक्शन हो चुका था।"

बैंक के कार्ड के जरिये आप विदेश में शॉपिंग तो कर सकते हैं, लेकिन वहां कार्ड से संबंधित कोई भी दिक्कत होने पर वहां के कस्टमर केयर में फोन करना होता है, जिस देश में आपका अकाउंट होता है और हां, आप कितने भी वादों और गारंटियों वाला कार्ड लें, जितनी सावधानियां आप को कैश ले कर चलते समय बरतनी पड़ती है, कार्ड के इस्तेमाल के वक्त भी उतना ही सतर्क रहना होता है। एक छोटी-सी भूल या लापरवाही से मिनटों में आपको हज़ारों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अपने बैंक का कस्टमर केयर नंबर हमेशा अपने साथ रखें। मसलन, यदि आपका प्लास्टिक मनी कार्ड खो जाये, तो सबसे पहले आप अपने बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करके उसे ब्लॉक करायें। लेकिन कार्ड ब्लॉक कराने का काम इतना आसान भी नहीं है, जितना की कहने में लगता है। यदि कार्ड खो गया है, तो ज़ाहिर सी बात है कि आपके पास कार्ड का नंबर, उसकी एक्सपायरी डेट और बाकी की छुटपुट जानकारियां न हों, इसलिए इन सभी के बारे में अपनी किसी डायरी में लिख कर सुरक्षित रख लें। क्योंकि कार्ड ब्लॉक करवाते समय इन सबकी ज़रूरत पड़ेगी। जानकारी कभी पर्स में या मोबाईल में नोट करके न रखें, क्योंकि कभी-कभी पूरा पर्स गुम हो जाता है और पर्स के साथ मोबाईल डेबिट/क्रेडिट कार्ड और छोटी डायरी भी चली जाती है और उन सबका फायदा उसको मिल जाता है, जो जाने या अनजाने आपके पर्स, मोबाईल और कार्ड का मालिक बन जाता है।

कई बार ऐसा होता है, कि यूज़र के मन में यह सवाल भी रहता है, कि कार्ड के नाम पर बैंक बहुत पैसा काट लेता है, जिसका हिसाब कुछ समझ नहीं आता। कुछ बैंक्स अपने कार्ड से दूसरे बैंक के एटीएम में ट्रांजक्शन फ्री देते हैं और कुछ लिमिट लगाते हैं, जैसे महीने में 2-3 बार ही फ्री ट्रांजक्शन होगा, उसके बाद चार्ज लगेगा, ऐसे में ज़रूरी है, कि यूज़र कार्ड बैंक के एटीएम में ही यूज़ करें। क्योंकि सभी बैंक्स के अलग अलग नियम कायदे होते हैं। सेम बैंक सेम कार्ड यूज़ करने से कार्ड फंस जाने की स्थिति में भी यदि ब्रांच खुली है, तो कार्ड तुरंत वापिस मिल जायेगा। लेकिन कुछ बैंक्स दूसरे बैंक के कार्ड डिस्ट्रॉय भी कर देते हैं। यदि आप अपना कार्ड दूसरे बैंक के एटीएम में इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन बैंक्स के एटीएम यूज़ करे जिनमें कार्ड स्वाईप करके पैसा निकलता हो। हालांकि आजकल कैश निकालने का झंझट भी खतम हो चुका है, सीधे कार्ड स्वाईप करके ही बिल जमा कर दें। कैश निकालना ही नहीं पड़ेगा और जहां कार्ड स्वाईप नहीं होता वहां पेटीएम चल जाता है। लेकिन कार्ड की सुरक्षा का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। क्योंकि पर्स में सिर्फ उतना कैश होता था, जितना की ज़रूरी है, मगर अब कार्ड में पूरा बैंक साथ चलता है, जिसकी सुरक्षा बहुत संभाल कर करनी होगी।

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प्लास्टिक मनी के इस्तेमाल से पहले इन दस बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है:-

प्रीमियम कस्टमर बनने से पहले जांच लें कि आपको उसके लिए सालाना या मासिक रूप से कोई राशि तो नहीं अदा करनी। कई बार बैंक कहते हैं, कि आपको कुछ नहीं देना, फिर भी 500 या हज़ार रुपये बैंक आपके अकाउंट से कांट लेते हैं।

यदि आपके पास कई कार्ड हैं, तो सभी कार्ड्स को एक साथ पर्स में रख कर बाहर न जायें, सिर्फ वही कार्ड अपने साथ रखें, जिससे आप ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

यदि आप मोबाईल बैंकिंग लेते हैं तो आप के अकाउंट से जब भी कोई ट्रांजक्शन होगा, आपके पास मैसिज आयेगा।

अपने कार्ड का नंबर, पिन नंबर, कस्टमर आईडी नंबर, बैंक का कस्टमर केयर नंबर वगैरह लिखकर आलमारी या किसी अन्य सुरक्षित जगह पर रखें। कार्ड खोने की स्थिति में सबसे पहले बैंक को फोन करके सूचित करें। अपना कार्ड ब्लॉक करावायें और पुलिस में एफआईआर ज़रूर लिखवायें।

अपना पिन नंबर कभी किसी को नहीं बतायें।

हर तीन महीने में अपना एटीएम पिन बदलते रहें।

यदि एटीएम काम नहीं कर रहा है, तो मदद के लिए किसी अनजान व्यक्ति या सिक्योरिटी गार्ड पर भरोसा न करें।

यदि कार्ड एटीएम में फंस गया है, तो तुरंट कस्मर केयर पर कॉल करें या फिर एटीएम बैंक का है, तो बैंक से मदद लें।

डेबिट कार्ड से पैसा अदा करने से पहले दुकानदार से यह पूछ लें, कि वह किसी प्रकार का एक्स्ट्रा टैक्स तो नहीं ले रहा है। जैसे कहीं कहीं 2 प्रतिशत ज्यादा लेते हैं खरीदारी पर।

अपने पिन नंबर को कभी कागज़ पर लिखकर पर्स में रखें और न ही नंबर उल्टा लिखें। ऐसा करके आप चोर के लिए अपनी परेशानी बढ़ा रहे हैं।

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और जाते-जाते थोड़ी जानकारी क्रेडिट कार्ड के बारे में भी ले लें। क्रेडिट कार्ड द्वारा बैंक में पैसा होने न होने पर भी बैंक से पैसा उधार लिया जा सकता है, यानी क्रेडिट पर पैसा ले सकते हैं, जिसे आपको एक निश्चित समय पर बैंक को वापिस करना होता है। कुछ बैंक उस पैसे को किश्तों में चुकाने की सहूलियत भी देते हैं। याद रहे कोई भी बैंक बिना फायदे के आप को कोई पैसा नहीं देती। इसलिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी तभी करें जब बहुत ज़रूरी हो।

इसलिए प्लास्टिक मनी विकल्प तो बहुत अच्छा है, लेकिन सावधानी बरतते हुए। वरना कहीं ये नोटबंदी आपको परेशानी में न डाल दे।

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