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बच्चों की पीठ का बोझ कम करने के लिए ई-बस्ता कार्यक्रम पर काम कर रही सरकार

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15th Nov 2017
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स्कूली छात्रों पर बस्ते का बोझा कम करने के लिये सरकार ई बस्ता कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। इसके जरिये छात्र अपनी रूचि और पसंद के मुताबिक पाठ्य सामग्री डाउनलोड कर सकेंगे । साथ ही स्कूलों में डिजिटल ब्लैकबोर्ड भी लगाया जायेगा।

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)


मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि देशभर के छात्रों को डिजिटल शिक्षा पद्धति से जोड़ने की पहल के तहत आने वाले वर्षो में देश के सभी स्कूलों में आपरेशन डिजिटल ब्लैक बोर्ड को लागू किया जायेगा।

सीबीएसई बस्ते का बोझ कम करने के लिए निर्देश जारी करती है लेकिन इनका अनुपालन सुनिश्चित करना अभी भी दूर की कौडी बना हुआ है। 

आजकल स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को भारी बैग के तले दबे देखकर निराशा ही मिलती है। कम समय में ज्यादा पढ़ा-सिखाने की मानसिकता इस बैग के बोझ के पीछे जिम्मेदार है। इसे कम करने के लिए कई सारी समीतियां गठित हुईं, कई सारे विशेषज्ञों ने अपनी सलाह भी दी, लेकिन अंत में नतीजा वही रहा। लेकिन अब सरकार इस ओर काम कर रही है। स्कूली छात्रों पर बस्ते का बोझा कम करने के लिये सरकार ई बस्ता कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है। इसके जरिये छात्र अपनी रूचि और पसंद के मुताबिक पाठ्य सामग्री डाउनलोड कर सकेंगे । साथ ही स्कूलों में डिजिटल ब्लैकबोर्ड भी लगाया जायेगा ।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि स्कूली बच्चों पर बस्ते के बढ़ते बोझा को कम करने के लिये यह कार्यक्रम शुरू किया गया था और छात्रों, शिक्षकों ने इसमें काफी रूचि दिखाई है। यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जहॉं छात्र, शिक्षक एवं रिटेलर्स एक साथ मिलकर एक दूसरे की ज़रूरत को पूरा कर सकते हैं । ई -बस्ता के जरिये गॉंव एवं छोटे शहरों के छात्र भी आसानी से इसका लाभ उठा सकते हैं।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि देशभर के छात्रों को डिजिटल शिक्षा पद्धति से जोड़ने की पहल के तहत आने वाले वर्षो में देश के सभी स्कूलों में आपरेशन डिजिटल ब्लैक बोर्ड को लागू किया जायेगा। इसका मकसद देश के सभी छात्रों को डिजिटल शिक्षा पद्धति से जोड़ना है । प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के तहत शिक्षा को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके तहत ई बस्ता और ई पाठशाला कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है ।

राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद :एनसीईआरटी: स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा के लिए ई सामग्री तैयार कर रही है। परिषद को यह काम एक वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है। एनसीईआरटी के आंकड़ों के अनुसार, ई बस्ता के संदर्भ में अब तक 2350 ई सामग्री तैयार की जा चुकी है । इसके साथ ही 53 तरह के ई बस्ते तैयार किये गए हैं । अब तक 3294 ई बस्ता को डाउनलोड किया जा चुका है । इसके अलावा 43801 ई सामग्री डाउनलोड की जा चुकी है ।

सीबीएसई बस्ते का बोझ कम करने के लिए निर्देश जारी करती है लेकिन इनका अनुपालन सुनिश्चित करना अभी भी दूर की कौडी बना हुआ है। जाने माने शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक प्रो. यशपाल के नेतृत्व वाली समिति ने स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम के बोझ में कमी की सिफारिश की थी, लेकिन दो दशक से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ई बस्ता के संबंध में एक एप भी तैयार किया है जिसके जरिये छात्र टैबलेट, एंड्रायड फोन आदि के माध्यम से सामग्री डाउनलोड कर सकते हैं। स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को आगे बढ़ाने की इस पहल के तहत मंत्रालय ने कुछ समय पहले 25 केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा आठ के सभी बच्चों को टैबलेट दिए जाने की एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की थी।

यह भी पढ़ें: राजस्थान पुलिस में पहली बार ट्रांसजेंडर कॉन्सटेबल को मिली नौकरी

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