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#MeToo कैंपेन का असर: ऑफिस में उत्पीड़न होने पर 'शी बॉक्स' में दर्ज कराएं शिकायत

9th Nov 2017
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नए शी-बॉक्स पोर्टल पर सरकारी और निजी कर्मचारियों सहित देश की सभी महिला कर्मियों के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा है। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- एचटी मीडिया)

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- एचटी मीडिया)


विश्व स्तर पर चलाए जा रहे सोशल मीडिया के अभियान #MeToo को देखते हुए यह महिला और बाल विकास मंत्रालय का सकारात्मक कदम है जिसमें महिलाएं यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न झेलने के अपने अनुभव साझा करती हैं। 

शी-बॉक्स इन सूची में शामिल संस्थानों या संगठनों को अपने क्षमता निर्माण गतिविधियों को मंत्रालय के साथ साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराएगा। जिससे देश भर के सूची में शामिल इन संस्थाओं की गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी।

अगर ऑफिस में किसी महिला को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है तो वह अब सीधे महिला और बाल विकास मंत्रालय से इसकी शिकायत कर सकेगी। सरकार ने सेक्शुअल हैरसमंट इलैक्ट्रॉनिक (SHe) बॉक्स की शुरुआत की है। पहले इसमें सिर्फ सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए ही शिकायत की सुविधा थी, लेकिन अब प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाली महिलाएं भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगी। इसकी शुरुआत इस वर्ष जुलाई में ही की गई थी, लेकिन अब इसे सभी विभागों के लिए खोल दिया गया है। हालांकि उसी वक्त महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा था कि वह इसका विस्तार भी करेंगी।

नए शी-बॉक्स पोर्टल पर सरकारी और निजी कर्मचारियों सहित देश की सभी महिला कर्मियों के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा है। यौन उत्पीड़न अधिनियम के अंतर्गत गठित संबंधित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) या स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) में पहले से ही लिखित शिकायत दर्ज करवाने वाली महिलाएं भी इस पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं।

ऑनलाइन सुविधा का शुभारंभ करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक कदम है क्योंकि किसी भी देश की सरकार ने शायद पहली बार कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। सरकार कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। मंत्री महोदया ने बताया कि इसलिए महिला और बाल विकास मंत्रालय ने सभी कार्यस्थलों पर आंतिरक शिकायत समितियां गठित करने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने आंतरिक शिकायत समितियों के लिए निर्देशिका जारी की है और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इस दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम पीड़ित महिलाओं को सीधे अपनी शिकायत दर्ज करवाने के लिए मंच उपलब्ध कराने के लिए शी-बॉक्स का शुभारंभ है, ताकि महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए उचित कार्यवाही की जा सके। मेनका गांधी ने आश्वासन दिया कि मंत्रालय इन शिकायतों की निगरानी करेगा।

शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न झेल रही महिलाओं की शिकायतों का निवारण उपलब्ध करवाने का एक प्रयास है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाने पर यह सीधे संबंधित नियोक्ता की आईसीसी/एलसीसी को भेज दी जाएगी। इस पोर्टल के जरिए मंत्रालय के साथ ही शिकायतकर्ता भी आईसीसी/एलसीसी द्वारा की जा रही जांच की प्रगति की निगरानी कर सकती हैं। विश्व स्तर पर चलाए जा रहे सोशल मीडिया के अभियान #MeToo को देखते हुए यह महिला और बाल विकास मंत्रालय का सकारात्मक कदम है जिसमें महिलाएं यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न झेलने के अपने अनुभव साझा करती हैं। पोर्टल निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है: http://shebox.nic.in/

इंटरनल कंप्लेन कमिटी नियमों के मुताबिक कार्रवाई करेगी और शिकायत का स्टेटस अपडेट करेगी। मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक यह पोर्टल यौन उत्पीड़न झेल रही महिलाओं को राहत देगा। मेनका गांधी ने अधिकारियों को पोर्टल को ज्यादा से ज्यादा इंटरैक्टिव बनाने के लिए कहा है। शी-बॉक्स के जरिए शिकायत की जा सकती है, साथ ही शिकायत करने वाले अपनी शिकायत का स्टेटस भी देख सकते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विभिन्न मंत्रालयों में महिला कर्मचारियों से शिकायतें मिलने के बाद पिछले साल अक्टूबर में यौन उत्पीड़न मामलों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का फैसला किया था।

शी-बॉक्स का उपयोग करने वालों के लिए समय-सीमा के भीतर प्रतिक्रिया मिलने के आश्वासन के साथ इस पोर्टल के जरिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से बातचीत करने का भी विकल्प है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर प्रशिक्षण/कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए मंत्रालय द्वारा सूची में सम्मिलित किए गए 112 संस्थानों की जानकारी भी इस पोर्टल पर उपलब्ध है। विभिन्न संगठनों में इस विषय पर प्रशिक्षण में योगदान देने के इच्छुक व्यक्तियों और संस्थानों के लिए अपने आवेदन जमा कराने के भी विकल्प हैं। शी-बॉक्स इन सूची में शामिल संस्थानों या संगठनों को अपने क्षमता निर्माण गतिविधियों को मंत्रालय के साथ साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराएगा। जिससे देश भर के सूची में शामिल इन संस्थाओं की गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी।

मंत्रालय ने यौन उत्पीड़न अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी प्रदान करने के लिए इस अधिनियम पर पुस्तिका और प्रशिक्षण निर्देशिका भी प्रकाशित की है, ताकि इनका व्यावहारिक रूप में आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। निजी संगठनों को अपने सेवा नियमों तथा निर्दिष्ट अनुशानात्मक प्रक्रियाओं के अनुरूप प्रशिक्षण निर्देशिका को रूचिकर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

किसी भी डिजिटल समाज के लिए महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के विचार को साकार करने की दिशा में मंत्रालय लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को हासिल करने में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। यह कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की शिकायतों के जल्द निवारण के लिए डिजिटल स्थान का उपयोग करने का प्रयास है।

यह भी पढ़ें: धनंजय की बदौलत ट्रांसजेंडरों के लिए टॉयलट बनवाने वाली पहली यूनिवर्सिटी बनी पीयू

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