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किसानों की जिंदगी बदलने का काम कर रही हैं ‘रूबी रे’

ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश...किसानों से लेकर कोलकाता में बेचती हैं सब्जियां...लोगों को सब्जियां बांटने का काम करते हैं 6 डिलीवरी बॉय...

20th Aug 2015
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ये बात दिसंबर, 2013 की है जब रूबी रे की जिंदगी एक दम बदल गई। ये वो वक्त था जब वो अपने परिवार और दोस्तों के साथ अंडमान में छुट्टियां बिताने गई थी ताकि वो रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ वक्त अपने लिये निकाल सके। लेकिन ऐसा हो ना सका क्योंकि अपने बॉस के दबाव में ऑफिसियल लैपटॉप वो अपने साथ लेकर आई थीं। इस कारण जब उनके परिवार वाले और दोस्त अंडमान की खूबसरत जगहों में घूमने का आनंद ले रहे होते थे तो उस वक्त रूबी एक कौने में बैठकर अपने लैपटॉप पर ऑफिस का कुछ काम निपटा रही होती थीं। उस पूरे टूर के दौरान रूबी अपने परिवार और दोस्तों के साथ कम और अपने लैपटॉप के साथ ज्यादा वक्त गुजारने को मजबूर हुई। जिसके बाद उनके परिवार वाले और दोस्त उनसे काफी नाराज भी हुए। रूबी इस बात से काफी आहत थीं कि एक ओर वो घूम भी नहीं सकीं और दूसरी ओर उनके परिवार वाले और दोस्त उनसे नाराज थे। इस कारण कोलकता लौटने से पहले रूबी ने एक फैसला कर लिया था, जो सबको चौकाने वाला था।

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कोलकता लौटने के अगले दिन ही रूबी अपने बॉस के कमरे में एक कागज के टुकड़े को लेकर गई। जिसमें उन्होने अपना इस्तीफा लिखा हुआ था। रूबी एक जानी मानी कंपनी में मार्केटिंग का काम संभालती थी, लेकिन जैसे ही उन्होने अपने बॉस को वो कागज दिया तो वो कुछ देर के लिए समझ ही नहीं पाए कि रूबी ऐसा क्यों कर रही है। लेकिन रूबी तय कर चुकी थी कि अब वो नौकरी नहीं करेंगी। लिहाजा बॉस के समझाने की सारी कोशिश पानी पानी हो गई।

रूबी की जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू हो चुका था, लेकिन शुरूआत के दो महिनों तक रूबी की समझ में ये नहीं आया कि वो करे तो क्या करें। इस दौरान वो अपने दोस्तों से मिली और कुछ समय अपने लिये निकाला। इस दौरान वो तेज भागती जिंदगी की रफ्तार का थोड़ा सा थामने में कामयाब हो सकीं। वो इन छुट्टियों का मजा ले रही थीं और ऐसा करके उनको मजा भी आ रहा था। हालांकि ऐसा सबके नसीब में नहीं होता। निश्चित रूप से रूबी भी कभी ऐसा नहीं चाहती थीं। बावजूद कुछ महिने खाली बैठने के बाद रूबी कुछ काम करने के लिए बैचेन होने लगीं। तब उन्होने कुछ नया करने के लिए अपने आसपास कुछ परोपकारी काम शुरू करने का फैसला लिया। उन्होने देखा की शहर में कई स्वंयसेवी संस्थाएं हैं जो पढ़ाई से वंचित बच्चों को पढ़ाने का काम करती हैं और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम चलाती हैं।

इस दौरान वो DRCSC के संपर्क में आई। जो एक स्वंय सेवी संस्था है। ये किसानों के लिए काम करती है और उनको बताती है कि ऑर्गेनिक खेती की जरूरत और उसके क्या फायदे हैं। इसके अलावा ये संगठन ऐसे किसानों की भी मदद करता है जो अपनी खेती को ऑर्गेनिक खेती में बदलना चाहते हैं। इस काम में रूबी का भी मन लगने लगा और वो उनके साथ जुड़ गई। इस दौरान रूबी ने DRCSC की मदद से शहरी बागवानी और ऑर्गेनिक खेती के तरीके सीखे। संगठन के साथ काम करने के दौरान रूबी को पता चला कि पुरूलिया जिले कि किसान किस तरह की दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

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रूबी ने जब DRCSC के सदस्यों के साथ इस इलाके में घूमी तो उन्होने पाया कि यहां पर मिट्टी का कटाव और अंधाधुंध पेड़ों की कटाई के कारण खेती की जमीन बर्बाद हो गई है। जिसके बाद इन लोगों ने खेती के वैकल्पिक पहलुओं का पता लगया और उन जगहों पर जुताई करने की सलाह दी जहां पर प्राकृतिक रुप से पानी को जलाशय में इकट्ठा तीन स्तरों पर किया जाता है। ताकि पानी की जरा भी बर्बादी ना हो। यह तरकीब बेहद सफल साबित हुई और किसान एक बार फिर ऑर्गेनिक खेती के सहारे अच्छी फसल हासिल करने में कामयाब हो सके।

रूबी का पुरूलिया के किसानों के साथ जुड़ाव दिन ब दिन बढ़ता जा रहा था। जिसके बाद वो किसानों से सीधे उनकी पैदावार खरीदती और कोलकता में उसे बेचने का काम करने लगी। रूबी का कहना है कि वो जानती थी कि किसान अपनी जरूरत से ज्यादा की पैदावार करते हैं लेकिन बाकि बची फसल को उनको नुकसान में बेचना पड़ता है। जिसके बाद उन्होने फैसला लिया कि वो इस कारोबार को करेंगी। इस तरह जहां रूबी को एक ठोस काम मिल गया था, वहीं किसानों की आमदनी बढ़ने का रास्ता भी खुल गया था।

शुरूआत में उन्होने किसानों से खरीदे उत्पाद को अपने खास दोस्तों को बेचना शुरू किया। इन उत्पादों में सब्जियां और दूसरी चीजें शामिल थी। रूबी हर हफ्ते की शुरूआत में अपने ग्राहकों को अपने उत्पाद की जानकारी दे देती थीं जिसके बाद ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक उनको ऑर्डर कर देते थे। जिसके बाद वो एक लिस्ट बनाकर किसानों को भेज देती थी और अगले दिन किसान उन चीजों को रूबी के पास भेज देते थे। जिसको बाद में रूबी ग्राहकों में बांट देती थी। वो ये काम सिर्फ कोलकता में ही कर रही है। इस काम के लिए उन्होने छह डिलीवरी बॉय रखे हैं। जो सामान को लाने ले जाने का काम करते हैं।

रूबी का कहना है कि जब भी किसी उत्पाद की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो वो उसे थोक व्यापारी को बेच देते हैं। रुबी के पास FMCG और रिटेल के क्षेत्र का 12 साल का अनुभव है। जो उनके इस काम में काफी मददगार साबित होता है। एक ओर रूबी ऑर्गेनिक फार्मिंग से जुड़ी हैं तो दूसरी ओर अपने इस काम की मार्केटिंग के काम को पूरी तरह डिजिटल करने जा रही हैं। फिलहाल वो किसी जल्दबाजी में नहीं हैं लेकिन अगर चीजें ऐसे ही आगे बढ़ती रहीं तो वो इस क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों से भी हाथ मिला सकती हैं ताकि वो अपने उत्पाद को एक ब्रांड में बदल सकें। हालांकि उनकी योजना ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए अलग स्टोर खोलने की भी है लेकिन फिलहाल उनका ध्यान अपने काम को और विस्तार देने पर है।

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