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IIT मुंबई के होनहार 'स्क्रैपक्रो' के ज़रिए, बेच रहे हैं कबाड़...

स्क्रैप डिस्पोज़ल के लिए कस ली कमर

Sahil
15th Jul 2015
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पवई वैली बी2बी स्टार्टअप्स के लिए टेस्टिंग ग्राउंड बन रही है। आईआईटी मुंबई के कई छात्र यहां मोबाइल-बेस्ड सर्विसेज लॉन्च कर रहे हैं। Housing, TinyOwl, HandyHome जैसे स्टार्टअप्स यहां फल-फूल रहे हैं और निवेशकों के साथ-साथ इलाके में भी खुशहाली ला रहे हैं। यहां इन स्टार्टअप्स से अलग एक नया स्टार्टअप लॉन्च हुआ है, जो वेस्ट की देखभाल करता है। Scrapcrow एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो किसी के स्क्रैप को सुविधाजनक और पारदर्शी तरीके से डिस्पोज़ करती है।

Scrapcrow के को-फाउंडर्स में से एक रजत शर्मा अपने मेल में बताते हैं,

 “हमारा लक्ष्य लोगों के दरवाजे पर बेस्ट प्राइस में स्क्रैप रिसाइक्लिंग करने वाले सबसे भरोसेमंद साथी बनने की है। लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की बदौलत हमारा ब्रांड स्क्रैप कलेक्शन और उनके डिस्पोजल को गति देना चाहता है। हम धरती के रहने वाले एक बेहतर जगह बनाने में लोगों के योगदान को बढ़ाना चाहते हैं।” ये एक श्रेष्ठ आइडिया है और पहले ही महीने में कंपनी ने पवई से 70 रिक्वेस्ट्स हासिल किए।
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Scrapcrow में रजत के अलावा तीन अन्य लोग भी हैं जिनमें से प्रत्येक के पास दो साल का कॉर्पोरेट एक्सप्रिएंस है। देवेश वर्मा ट्रिंबल नेविगेशंस में काम कर चुके हैं और Terra Wizard Mapping Solutions के को-फाउंडर हैं। इहतिशाम खान आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में मैनेजर हैं और प्रणव कुमार सिस्को में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। टीम अभी सीड राउंड फंड रेज कर रही है और ये प्रक्रिया अभी चल रही है।

Scrapcrow स्क्रैप डिस्पोजल संबंधी आम आदमी की समस्या के समाधान के लिए एक पहल है। इसका उद्देश्य गो ग्रीन इनिशिएटिव को प्रमोट करना है और लोगों के जेहन में रिसाइक्लिंग को एक आवश्यक चीज बनाना है। रजत कहते हैं- “आज के इस टेक्नोलॉजिकली एडवांस्ड मोबाइल एज में भी स्क्रैप कलेक्शन के लिए कोई फॉर्मल बुकिंग सिस्टम नहीं है। लोगों को अपने पड़ोस में स्थित स्क्रैप डीलर पर निर्भर होना पड़ता है। इससे मोनोपोली और अनफेयर प्रैक्टिस का जन्म होता है।”Scrapcrow टीम ने बुकिंग के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया है जो कस्टमर को अपनी सुविधा के अनुसार स्क्रैप डीलर को बुलाने का मौका देता है। वे जल्द ही मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च करने वाले हैं। ऑपरेशन का काम सिर्फ कलेक्शन तक सीमित नहीं है। Scrapcrow अपने ऑन-बोर्ड स्क्रैप डीलर द्वारा एकत्रित स्क्रैप की रिसाइक्लिंग सुनिश्चित करता है। रजत बताते हैं- “हम बिचौलियों की लंबी चेन को क्रॉस करके एकत्रित स्क्रैप को सीधे रिसाइक्लिंग प्लांट और डीलर को देते हैं।”

वे जल्द ही कॉर्पोरेट और रिटेल हाउसेज से पेपर से लेकर ई-वेस्ट तक सभी तरह के वेस्ट के डिस्पोजल के लिए टाई-अप्स करने वाले हैं। इसके अलावा वे कंपनियों के लिए श्रेडिंग और डेटा सेनिटाइजेशन सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं। फिलहाल, Scrapcrow के पास 5 ऑन-बोर्ड स्क्रैप डीलर्स हैं और पवई और उससे सटे इलाकों में सेवा देने के लिए 10 और स्क्रैप डीलर्स को जोड़ने की योजना है। रजत बताते हैं-

 “हम ये सुनिश्चित करते हैं कि ये डीलर्स प्रोफेशनल मैनर में काम करें। इसके लिए हम उन्हें कम्यूनिकेशन और फेयर प्रैक्टिस की बेसिक ट्रेनिंग भी देते हैं।” मौजूदा बुकिंग स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स, इंस्टीट्यूशंस और रिटेल शॉप्स से आती है।

इससे पहले भी इस तरह की कोशिशें की गई हैं जैसे भोपाल का TheKabadiwala, Paperman आदि। और ये अपने-अपने इलाके में अच्छा काम कर रही हैं। Scrapcrow एक ऐसा वेंचर है जो काम तो यही कर रहा है मगर लार्ज स्केल पर। ये मुनाफा कमाने पर भी फोकस करेगी। जब क्लीन एनर्जी और रिसाइक्लिंग की बात आती है तो Attero संभवतः भारत की सबसे बड़ी सक्सेज स्टोरी है। और अब समय आ गया है कि भारतीय ऐसी और कंपनियों की नींव रखें।

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