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कॉल करके परेशान करने वालों की खैर नहीं, 'ट्रूकॉलर' सब बताता है...

25 मिलियन भारतीयों के फोन में है ट्रूकॉलर2009 में शुरू हुई थी ट्रूकॉलर की सेवाभारतीय कंपनी ने किया 18.8 मिलियन डॉलर का निवेश

26th Jun 2015
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ये बात सही है कि लोगों की जिंदगी में स्मार्टफोन क्या आया जैसे उनका संसार ही बदल गया। बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके लिए ये सिर्फ फोन नहीं, उससे बढ़कर है। स्मार्टफोन से आप ना सिर्फ किसी से बात कर सकते हैं बल्कि इंटरनेट के संसार को उंगलियों में नचा सकते हैं। लेकिन तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है और वो ये है कि फोन में आने वाली अनचाही या अनजानी कॉल। जो वक्त बेवक्त कभी भी आकर आपको परेशान कर सकती हैं और आप चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। आप फोन उठाने से पहले इतना भी नहीं जान पाते कि आपको ये फोन कॉल कौन कर रहा है। इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा था ऐलन ममेदी और नामी ज़र्रिन्गलम को भी। इसी दिक्कत को दूर करने के लिए उन्होने ट्रूकॉलर बना डाला। ये दोनों लोग स्वीडन की केटीएच रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलिजी से ग्रेजुएट हैं।

ऐलन ममेदी और नामी ज़र्रिन्गलम

ऐलन ममेदी और नामी ज़र्रिन्गलम


ट्रूकॉलर की शुरूआत साल 2009 में हुई। तब ये फोन करने वाले का सिर्फ नाम बताता था। दोनों दोस्तों ने तय किया कि फिलहाल इसको कुछ दोस्तों के बीच में शुरू किया जाए इसके बाद जब इन लोगों ने इसे ऑनलाइन किया तो पहले ही हफ्ते में 10 हजार डाउनलोड इस एप्लिकेशन के हो चुके थे। इससे ना सिर्फ इनका उत्साह बढ़ा बल्कि इनमें कुछ करने का आत्मविश्वास भी आया। ऐलन जो अपने उत्पाद से जुड़े विकास के काम को देखते हैं वो अपनी इस कंपनी में बराबर के भागीदार हैं। आज इनका बनाया ऐप हर ऐप स्टोर पर मौजूद है। इनके मुताबिक इस ऐप को बनाने के पीछे सोच ये थी कि हर फोन नंबर किसी ना किसी व्यक्ति का होता है और उस नंबर में कई जानकारियां छिपी होती हैं। ऐसे में छोटी सी जानकारी जुटाकर नए इनोवैशन की ढेरों संभावनाएं रहती हैं। उनके मुताबिक ये फोन करने वाली की सटीक जानकारी उपलब्ध कराता है। इसे आप दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल डायरेक्टरी भी कह सकते हैं। ये फोन में आने वाली उस कॉल के बारे में भी जानकारी देता है जो आपकी फोन बुक में भी नहीं है। ऐसे में कोई आपको मिस कॉल कर परेशान करता है तो आप ट्रूकॉलर ऐप या वेबसाइट में जाकर पता लगा सकते हैं कि ऐसा कौन कर रहा है।

ट्रूकॉलर के जरिये अनजाने नंबर से कोई भी अपने फोन में आने वाले कॉल देखकर ये फैसला ले सकता है कि उसको ये कॉल लेनी चाहिए या नहीं। साथ ही ट्रूकॉलर की मदद से किसी को लगे की ये स्पैम कॉल है तो वो इसे ब्लॉक भी करा सकता है। इसके लिए ट्रूकॉलर के स्पैम में उस नंबर को डालना होता है। तो दूसरी ओर ट्रूकॉलर इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति इस ऐप को ज्यादा ताकत तो देता ही है साथ ही इस समुदाय की सूची को बढ़ाता है। ट्रूकॉलर से जुड़ने वालों की संख्या दिन ब दिन तो बढ़ ही रही है साथ ही इसका डेटाबेस भी लगातार बढ़ रहा है। इस कारण इसकी डायरेक्टरी निरंतर अपडेट हो रही है। इस ऐप का डिजाइन लोगों की जरूरतों को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है साथ-साथ बिना छेड़छाड़ उनकी गोपनियता का ख्याल भी रखा गया है।

ट्रूकॉलर का मुख्यालय स्वीडन में है जबकि इस सेवा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने बाले ग्राहक भारत में हैं। दुनिया में ट्रूकॉलर के 45 मिलियन उपयोगकर्ता हैं। इनमें से करीब आधे 25 मिलियन भारत में हैं। ऐलन ममेदी और नामी ज़र्रिन्गलम ने शुरूआत से ही इतने बड़े बाजार को ध्यान में रखा था और जिस तरीके से यहां के लोगों ने उनके ऐप पर विश्वास जताया और उसे हाथों हाथ लिया उसे लेकर इन दोनों को गर्व होता है कि भारत जैसे बाजार में उनका ऐप अच्छा काम कर रहा है। ऐलन का विश्वास है कि भारत में दो तिहाई विकास शहरों में होगा। इतना ही जैसे जैसे स्मार्टफोन का बाजार बढेगा वैसे वैसे उनके ऐप की मांग भी बढ़ेगी। ट्रूकॉलर को हाल ही में सिकोइया कैपिटल इंडिया से 18.8 मिलियन डॉलर की निधी प्राप्त हुई है। कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल ना सिर्फ अपने ऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ाने में खर्च करेगी बल्कि भारत में और कर्मचारियों की भी नियुक्ति करेगी। हाल ही में ट्रूकॉलर ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के साथ भागादारी की है। ताकि मिस्ड कॉल की जानकारी उपयोगकर्ताओं को ट्विट से भी मिल जाए। फिलहाल इनकी नजर और दूसरी कंपनियों के साथ भी भागीदारी करने की है। बावजूद इन लोगों का कहना है कि बाजार में नये नये उत्पाद यूं ही अपने साथ जोड़ते रहेंगे। अब इन लोगों का लक्ष्य अपने ग्राहकों की संख्या 45 मिलियन से बढ़ाकर 200 मिलियन करने की है। इसके लिए ये लोग भारत के अलावा उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के कुछ और देश जैसे इंडोनेशिया पर खास ध्यान देना चाहते हैं। फिलहाल चार स्मॉर्टफोन उपभोक्ताओं में से एक के फोन में ट्रूकॉलर की सुविधा है। इन लोगों का कहना है कि आगे बढ़ने के लिए जरूरी है कि हमें अपने ग्राहकों की जरूरतों को समझना चाहिए साथ ही उनकी बात भी सुननी चाहिए।

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