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साइकिल ठीक करने वाले की बेटी का फैशन की दुनिया में बड़ा काम, बनाया 'येलोफैशन'

पारंपरिक भारतीय परिधानों को उपलब्ध करवाने वाला जाना माना आॅनलाइन स्टोर है येलोफैशन...बचपन में अपने पिता को साइकिल ठीक करते देखकर भविष्य में कुछ करने का सपना देखती थीं पल्लवी...शादी के बाद पति के सहयोग से घर के पास ही किराये की जगह लेकर प्रारंभ किया व्यापार...

17th Oct 2016
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यह कहानी शुरू होती है मध्य प्रदेश के दूरदराज के इलाके में स्थित एक छोटे और से गुमनाम से गांव हतपीपल्या से। एक व्यक्ति गांव की टूटी-फूटी और धूलभरी सड़क के किनारे पर स्थित अपनी एक छोटी सी साइकिल की दुकान में अलग-अलग प्रकार के काम कर रहा है और उसकी बेटी कहीं कोने में बैठकर अपने पिता को तन्मयता से कड़ी मेहनत करते हुए देख रही है।

अपने पिता को इतने धैर्य और दृढ़संकल्प के साथ काम को करते हुए देखकर उस बेटी के अंदर एक मजबूत भावना विकसित होती है और वह यह निश्चय करती है कि युवावस्था में कदम रखने के बाद वह अपने दम पर कुछ करके जरूर दिखाएगी और अपने पिता का नाम रोशन करेगी। और भविष्य मेें अपने इस सपने को मूर्त रूप देते हुए वह अपने लिये एक उचित व्यवसाय का निर्माण करती है। आज वही लड़की महिलाओं के लिये पारंपरिक भारतीय परिधान उपलब्ध करवाने वाले एक आॅनलाइन फैशन स्टोर येलोफैशनडाॅटइन (Yellowfashion.in) की संस्थापक के रूप में जानी जाती हैं।

पल्लवी

पल्लवी


इंदौर से 50 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव में बड़ी होने वाली पल्लवी के लिये बचपन की यादें बहुत खुशनुमा रही हैं। उन्हें अपने बचपन से शिकायत है तो सिर्फ इतनी कि उनके गांव में पढ़ने के लिये एक उचित स्कूल नहीं था और जो था वह पढ़ाई की बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित था। कक्षाओं के नाम पर उस स्कूल में सिर्फ एक बोर्ड औैर मेज मौजूद होती थी और उनके साथ अन्य बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी।

पल्लवी कहती हैं, ‘‘मेरे माता-पिता शिक्षा के मामले में बहुत जागरुक और सहयोगी थे और उन्होंने हमेशा हमें अपनी मर्जी से आगे बढ़ने के लिये प्रोत्साहित किया। हमारे अपने शहर में शिक्षा का कोई बेहतर विकल्प न होने के बावजूद मेरे माता-पिता ने यह सुनिश्चित किया कि मैं और मेरी बहन, हम दोनों अपने घर से दूर दूसरे शहरों में जाकर परस्नातक की शिक्षा प्राप्त कर सकें।’’ नतीजतन पल्लवी इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से संबद्ध एक गुजराती काॅलेज से अर्थशास्त्र में एमए की डिग्री हासिल करने में कामयाब रहीं।

जल्द ही उनका विवाह हो गया और वे दो बच्चों की माँ बन गईं लेकिन उन्होंने किसी दिन एक उद्यमी बनने के अपने सपने को जीवित रखा। वे अपने दम पर कुछ करने के लिये इतनी आतुर थीं कि उन्होंने चुपचाप इसकी तैयारियां प्रारंभ कर दीं। वे पारंपरिक परिधानों से संबंधित एक आॅनलाइन स्टोर शुरू करना चाहती थीं।

पल्लवी ने अपने पति के सहयोग से घर के नजदीक ही एक किराये की एक छोटी सी जगह लेकर अपने उद्यम की स्थापना की। उन्होंने घर के पास का स्थान इसलिये चुना ताकि वे काम के साथ-साथ अपने बच्चों का भी ध्यान रख सकें। प्रारंभ में उन्होंने अपने उत्पादों के फोटोशूट इत्यादि के लिये अपनी बचत के अलावा प्रोविडेंट फंड और म्यूचुअल फंड के पैसे का इस्तेमाल किया। इसके अलावा इन्होंने अपनी सूची में विभिन्न उत्पादों की एक विविध रेंज प्रस्तुत करने के लिये व्यापारियों को अग्रिम भुगतान करने की भी व्यवस्था कर ली।

इस उद्यम की नींव रखने का विचार पल्लवी को एक अस्पताल में चल रही चर्चा के दौरान आया जहां उनके पति एक सर्जरी के बाद स्वास्थ्यलाभ ले रहे थे।

पल्लवी बताती हैं, ‘‘वे काम पर वापस आने के लिये व्याकुल थे और मैं हमेशा से ही अपने दम पर कुछ व्यापार करना चाहती थी। ऐसे में हम दोनों ने परस्पर सहमति से एक साथ मिलकर कुछ शुरू करने का इरादा किया।’’ विचार-विमर्श के कुछ गंभीर दौर के बाद येलोफैशन दुनिया के सामने आने के लिये तैयार था। आखिर येलोफैशन नाम ही क्यों? आखिरकार यह इस युगल का पसंदीदा रंग जो है।

हालांकि प्रारंभ में तो यह विचार काफी आकर्षक था लेकिन समय के साथ व्यापार के प्रारंभिक दौर में आने वाली चुनौतियों ने इनकी परीक्षा लेने में कसर नहीं छोड़ी और शुरू के कुछ महीने तो बहुत ही मुश्किल थे। पहले तीन महीनों में तो इनका व्यापार कछुए की गति से आगे बढ़ा और इन्हें सिर्फ 20 से 25 साडि़यों के आॅर्डर ही मिले। हालांकि इनका मंच साडि़यों से भरा हुआ था लेकिन खरीददार नहीं थे। इसके बाद इन्होंने अपनी व्यापार की रणनीति पर ध्यान देना शुरू किया लेकिन इनकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि क्या कारण है कि तीन महीने से भी अधिक के समय में सिर्फ 20 से 25 आॅर्डर मिलने का क्या कारण है और आने वाला समय इन्हें और भी अधिक चुनौतीपूर्ण लग रहा था। इसके बाद इन्होंने अपनी वेबसाइट में सुधार लाने का काम प्रारंभ किया और इसके अलावा विभिन्न सोशल मीडिया साइटों की सहायता से संभावित उभोक्ताओं तक अपनी पहुंच बनाने के प्रयास प्रारंभ करने के साथ-साथ डिस्काउंट की भी पेशकश करनी प्रारंभ कर दी।

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इसके अलावा एक और बात जो इनके पक्ष में गई वह यह थी के चूंकि इनका कार्यालय एक आवासीय काॅलोनी में था इसलिये आसपास रहने वाली महिलाएं अक्सर नई-नई साडि़यों को छूने और उन्हें महसूस करने के लिये इनके पास आती रहती थीं और उनमें से कुछ वहां से जाते-जाते उन्हें खरीद भी लेती थीं।

बस इसी प्रकार येलोफैशन ने सफलता का स्वाद चखना प्रारंभ कर दिया था। हालांकि इन्हें समय लगा लेकिन आज के समय में यह ब्रांड फैशन जगत में अपना एक अलग नाम बनाने मं सफल रहा है। इसके अलावा अब ये विस्तार करने का भी विचार कर रहे हैं। इसके अलावा अब ये विभिन्न पेशेवर महिलाओं की पसंद को पूरा करने के लिये साडि़यों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल करने पर विचार कर रही हैं - चाहे वे डाॅक्टर हों या प्रोफेसर हों या फिर गृहणी ही क्यों न हों और गुजरात से लेकर दक्षिणी राज्यों तक की महिलाएं इनके निशाने पर हैं। इसके अलावा ये महिलाओं की पसंद और जरूरत को पूरा करने के लिये उनकी पसंद के अनुकूलित ब्लाउज़ तैयार करने के विचार पर भी काम कर रही हैं। इसके अलावा जल्द ही ये साडि़यों के अपने निजी लेबल भी लेकर आने वाले हैं।

पल्लवी कहती हैं, ‘‘प्रारंभिक दौर में जब हमने काम शुरू किया था तब हमारी टीम बहुत छोटी थी और हम सबको कई काम करने पड़ते थे। मुझे बहुत अच्छी तरह से याद है कि उस दौरान मैं विक्रेताओं के साथ बैठकों के दौरान और बच्चों को पढ़ाते समय और यहां तक कि कई बार तो खाना पकाते समय कस्टमर केयर नंबर के तौर पर अपने मोबाइल नंबर का प्रयोग करती थी और ये सब काम करते हुए उपभोक्ताओं के सवालों के जवाब देती रहती थी।’’

इसके अलावा पल्लवी के लिये सबसे बड़ी गर्व की बात यह है कि वे अपने उद्यम को एक निजी स्पर्ष दे पाती हैं। एक उद्यमी पल्लवी कहती हैं, ‘‘हमने प्रारंभिक दौर में मुंबई के अपने उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत तौर पर उत्पादों की डिलीवरी करी। अभी भी हम महीने में कम से कम एक-दो बार ऐसा करने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार से हम अपने उपभोक्ताओं को और अधिक नजदीक से जानने और समझने में सफल होते हैं और इसके अलावा उपभोक्तओं और हमारे बीच व्यक्तिगत संबंध स्थापित होने के अलावा एक बेहतर बंधन भी बनने में सफलता प्राप्त होती है।’’

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