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बाज़ार में आयेंगे प्लास्टिक के नोट, नकली नोटों पर लगेगी लगाम

नोटबंदी के बाद सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेने की राह पर है। वह जल्द ही प्लास्टिक करेंसी लाने वाली है, ताकि कालेधन पर लगाई जा सके लगाम।

9th Dec 2016
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सरकार ने संसद को बताया है, कि उन्होंने प्लास्टिक करेंसी छापने का निर्णय ले लिया है। इस निर्णय के अंर्गत मटीरियल की खरीद भी शुरू की जा चुकी है। संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्र अर्जुन मेघवाल ने संसद को बताया है, कि "प्लास्टिक और पॉलीमर सब्सट्रेट से प्लास्टिक के नोटों की छपाई का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए शुरुआती प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है।"

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आरबीआई ने दिसंबर 2015 में जानकारी दी थी, कि उनके पास 1000 रुपये के कुछ ऐसे नोट आए हैं, जिनमें सिक्‍योरिटी धागा नहीं है। ये नोट करेंसी नोट प्रेस नाशिक में छपे थे। इसके लिए पेपर होशंगाबाद स्थित सिक्‍योरिटी पेपर मिल से भेजा गया था। इसके बाद जांच शुरू की गई। नोटों की गुणवत्‍ता की प्रकिया मजबूत करने और ऑनलाइन इंस्‍पेक्‍शन के लिए स्‍पेशल ट्रेनिंग दी गई है, जिससे के भविष्‍य में खामियों को टाला जा सके : अर्जुन मेघवाल

केंद्र सरकार अब प्‍लास्टिक के करेंसी नोट शुरू करने जा रही है। इसके लिए कच्‍चे माल की खरीद शुरू हो गई। केंद्रीय वित्‍त राज्‍य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार, 9 दिसंबर को लोकसभा में बताया है, कि प्‍लास्टिक और पॉलीमर आधारित बैंक नोट छापने का फैसला लिया जा चुका है, जिसके लिए प्रकिया शुरू हो चुकी है। रिजर्व बैंक काफी लंबे समय से प्लास्टिक करेंसी लाने की योजना बनाता रहा है। फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था, कि 10 रुपये के नोट के रूप में 1 अरब रुपये के प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। ट्रायल के लिए इन्हें पांच शहरों, कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में चलाया जाएगा।

प्लास्टिक नोट का औसत जीवन लगभग 5 साल का होता है, जिनका नकली रुप तैयार करना मुश्किल है। इसके अलावा, प्लास्टिक से बने नोट कागजी नोटों की तुलना में काफी साफ भी होते हैं। जाली नोटों से निपटने के लिए पहली बार अॉस्ट्रेलिया में प्लास्टिक के नोट छापे गए थे।

साथ ही सरकार ने यह भी बताया कि नकदी रहित लेनदेनों को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार द्वारा इस तरह के अनेक कदम उठाये गए हैं, जिसमें डेबिट कार्ड्स के अधिक प्रयोग को बढावा देना, जरूरी भुगतान चेक से करना और इलेक्ट्रानिक साधनों के प्रयोग को प्रोत्साहन देना शामिल है। लोकसभा में आलोक संजर के प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री अजरुन राम मेघवाल ने कहा कि उच्च मूल्य वर्ग के पुराने बैंक नोटों के वैध मुद्रा स्वरूप के निरसन के बाद जनता की असुविधा को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने दूरभाष हेल्पालाइन नंबर भी स्थापित कर दिया है। 

डेबिट कार्ड्स के अधिक प्रयोग को बढावा देने के लिए 31 दिसंबर 2016 तक एमडीआर प्रभार माफ करने, बैंकिंग और भुगतान संबंधी लेनदेन के निए ट्राई द्वारा यूएसएसडी प्रभारों को वर्तमान 1.50 रूपये प्रति सत्र से कम करके 0.50 रूपये प्रति सत्र करना शामिल है। मेघवाल ने कहा कि इसके अलावा जरूरतों का भुगतान चेक से करने और इलेक्ट्रानिक साधनों के प्रयोग को प्रोत्साहन देने की भी पहल की गई है।

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