संस्करणों

ज्ञान की नई परिभाषा देने में जुटे दो नए स्कूल

- कलकरी संगीत विद्यालय और स्कूल विदाउट वॉल्स दे रहा है बच्चों को संगीत के साथ एक अच्छा इंसान बनने के गुर।- शिक्षा का अर्थ यहां केवल किताबी ज्ञान नहीं।- विदेशी लोग आकर सिखा रहे हैं कलकरी संगीत विद्यालय में गरीब बच्चों को संगीत।

8th Jul 2015
Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share

संगीत वो माध्यम है जो भाषाओं की असमानताओं से परे है, जो दिलों को जोड़ता है और मन में उत्साह भर देता है। संगीत से जुड़कर इंसान खुद को जान पाता है और उसका मन-मस्तिष्क तरोताजा हो जाता है। कर्नाटक के धरवाड़ में कलकरी संगीत विद्यालय में आकर यही अनुभव होता है। यहां की हवा में जब संगीत घुल-मिल जाता है तो पूरी आबो हवा संगीतमयी व मधुर हो जाती है। यहां विभिन्न देशों से आए लोग गरीब बच्चों की जिंदगी सुधारने के प्रयास में लगे हैं। इस विद्यालय की शुरूआत क्यूबेकर ने की। उन्हें संगीत और समाज सुधार के कार्यों में बेहद रुचि थी।

यह विद्यालय संगीत प्रेमियों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। गांव के बीच एक ऐसा विद्यालय जहां कई देशों के लोग बसे हैं और गरीब बच्चों को संगीत की शिक्षा दे रहे हैं, है ना कमाल की बात? कलकरी संगीत विद्यालय संगीत के माध्यम से बच्चों के लिए नए अवसर खोज रहा है और उन्हें हुनर प्रदान कर रहा है जिसके जरिए वे पैसा कमा सकते हैं। इसके अलावा यहां बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। साथ ही डांस, ड्रामा और वाद्य यंत्रों की भी शिक्षा दी जाती है। आज कलकरी संगीत विद्यालय में लगभग 200 बच्चे हैं। यहां के कोर्स को काफी अच्छे तरीके से छात्रों के अनुसार डिज़ाइन किया गया है।

image


एक और ऐसा ही स्कूल है जो अलग तरह की शिक्षा देने में जुटा है। स्कूल का नाम है 'विदाउट वॉल्स' इस स्कूल का संचालन देसाई कर रहे हैं जोकि यहां से पहले प्रसिद्ध आइसक्रीम ब्रॉड बास्किन रॉबिन्स में काम कर चुके हैं। वहां के काम करने के अनुभव का लाभ देसाई को विदाउट वॉल्स में काम करने के दौरान मिला। हालांकि दोनों जगहों के कार्य में काफी अंतर था लेकिन किसी कार्य को किस बारीकी से किया जाए यह उन्होंने बास्किन में कार्य करने के दौरान सीखा। देसाई का मानना है कि शिक्षा प्राप्त करने का मक्सद कुछ सीखना होना चाहिए केवल पैसा कमाना नहीं। शिक्षा के जरिए जीवन मूल्यों के बारे में, संस्कृति के बारे में और आस पास के समाज के बारे में बताया जाना चाहिए। शिक्षा का अर्थ किताबी ज्ञान से कहीं ज्यादा होना चाहिए। स्कूल विदाउट वॉल्स का कोई पाठ्यक्रम नहीं है। वहां की प्राकृतिक छवि ही वहां का पाठ्यक्रम है। यहां आने वाले छात्रों को स्थानीय लोगों की दिक्कतों के बारे में बताया जाता है, छात्रों को पूरी छूट दी जाती है कि वे क्या पढऩा चाहते हैं। उदाहरण के लिए इन्होंने अपने किचन को ही लैबोरेट्री भी बना दिया है जहां छात्र परीक्षण कर सकते हैं।

यहां के एक छात्र ने लाल हिबिस्कस सिरप का निर्माण किया। स्कूल का 60 प्रतिशत रेवेन्यू छात्रों द्वारा स्थानीय लोगों को दी जाने वाली सेवाओं से आता है। यहां हर उम्र और विभिन्न परिवारों से बच्चे आते हैं। देसाई मानते हैं कि यदि आपको सच में ज्ञान की तलाश है तो आपको हिमालय में जाने की जरूरत नहीं। आप अपने आसपास से ही बहुत कुछ सीख सकते हैं। यह केवल आपकी क्षमता के ऊपर निर्भर करता है कि आप कितना सीखना चाहते हैं।

Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

    Latest Stories

    हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें