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देसी स्टाइल में ऑनलाइन और ऑफलाइन शॉपिंग को साथ लाया गुड़गांव आधारित यह स्टार्टअप

ऑनलाइन शॉपिंग को आसान और विश्वसनीय बना रहा है ये स्टार्टअप...

10th Apr 2018
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कार्ट-टू-होम सर्विस के ज़रिए यह स्टार्टअप आपको अपने घर पर मनपसंद प्रोडक्ट चुनने का विकल्प दे रहा है। अगर आपको ऑनलाइन दिखने वाले प्रोडक्ट पर किसी तरह का संदेह है तो आप क्रॉस-चेक करने के लिए कॉटेज की गाड़ी को घरपर बुला सकते हैं और अपनी तसल्ली कर सकते हैं।

रत्नेश जायसवाल

रत्नेश जायसवाल


2017 में शुरूआत के पहले महीने से ही कॉटेज मुनाफ़े में है। इसके पीछे की एक ख़ास वजह यह भी है कि कंपनी के को-फ़ाउंडर रत्नेश, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नॉलजी और एक्सएलआरआई जैसे बड़े संस्थानों से पढ़े हैं।

स्टार्टअप: कॉटेज

फ़ाउंडर्स: रत्नेश जायसवाल और रंजीत कुमार

शुरूआत: 2017

आधारित: गुड़गांव

सुविधाः ऑनलाइन शॉपिंग को आसान और विश्वसनीय बनाना

सेक्टर: ई-कॉमर्स

फ़ंडिंग: बूटस्ट्रैप्ड

ऑनलाइन शॉपिंग का मार्केट भारत में लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ यह पहलू भी गौर करने लायक है कि एक बड़ा तबका अभी भी देख-परख कर सामान ख़रीदने में भरोसा रखता है। इसके अलावा ऑनलाइन प्लैटफ़ॉर्म्स पर जो प्रोडक्ट बेहद आकर्षक लगते हैं, वे कई बार सामने आने पर फीके लगते हैं और ग्राहकों को पसंद नहीं आते। साथ ही, डिलिवरी के दौरान भी कई बार गड़बड़ियां हो जाती हैं और गलत या नकली सामान आपके पास आ जाता है। इन सभी पहलुओं के आधार पर भारत में ग्राहकों के दो वर्ग बन जाते हैं।

एक तो वे जो ऑनलाइन शॉपिंग की तरफ़ ही आकर्षित होते हैं और एक वे जो अभी भी पास की दुकान या किसी परिचित की दुकान से सामान लेना पसंद करते हैं। आपको बता दें कि गुड़गांव आधारित एक स्टार्टअप ने दोनों ही वर्गों की सहूलियत का उपाय खोजा है। इस स्टार्टअप का नाम है, 'कॉटेज'। कॉटेज के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर जाकर आप अपने मन-पसंद प्रोडक्ट चुन सकते हैं और चाहें तो व्यक्तिगत रूप से उन्हें देखने के लिए कार्ट-टू-होम का विकल्प भी चुन सकते हैं।

क्या है कार्ट-टू-होम सर्विस?

कार्ट-टू-होम सर्विस के ज़रिए यह स्टार्टअप आपको अपने घर पर मनपसंद प्रोडक्ट चुनने का विकल्प दे रहा है। अगर आपको ऑनलाइन दिखने वाले प्रोडक्ट पर किसी तरह का संदेह है तो आप क्रॉस-चेक करने के लिए कॉटेज की गाड़ी को घरपर बुला सकते हैं और अपनी तसल्ली कर सकते हैं। कंपनी के को-फ़ाउंडर रत्नेश जायसवाल कहते हैं कि लोगों को पुराना समय याद आता है, जब वे ठेले या गाड़ी वालों से सामान ख़रीदा करते थे और अब कॉटेज, उन लोगों को दोबारा उस दौर का अनुभव दिलाने में मदद कर रहा है। फ़िलहाल कंपनी सिर्फ बेडशीट्स, टॉवेल सेट और चादर वगैरह बेच रही है, लेकिन कंपनी का पूरा इरादा है कि जल्द ही उत्पादों की रेंज और बढ़ाई जाए।

2017 में शुरूआत के पहले महीने से ही कॉटेज मुनाफ़े में है। इसके पीछे की एक ख़ास वजह यह भी है कि कंपनी के को-फ़ाउंडर रत्नेश, नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन टेक्नॉलजी और एक्सएलआरआई जैसे बड़े संस्थानों से पढ़े हैं। फ़ैशन हो या ऑनलाइन/डिजिटल मार्केटिंग, उनके पास देश-विदेश में काम करने का 17 सालों का लंबा अनुभव है। रत्नेश रीटेल और आईटी इंडस्ट्रीज़ में भी काम कर चुके हैं। गांवों से लेकर शहरों तक, सभी तरह के ऑडियंस को जानने का उनके पास पर्याप्त अनुभव भी है। इतना ही नहीं, फ़िलहाल रत्नेश इंडियन मार्केटिंग और पीआर कंपनी, टीम पंपकिन के सीईओ और को-फ़ाउंडर भी हैं।

रत्नेश की लगन और समर्पण का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पहले दिन वह ख़ुद गाड़ी लेकर ग्राहकों के पास तक गए थे। उन्होंने गुड़गांव के कई इलाकों में गाड़ी घुमाई और इत्तेफ़ाक़ से उन्हें एक ग्राहक मिला भी। यह ग्राहक इसके बाद कॉटेज का रेग्युलर कस्टमर हो गया। रत्नेश मानते हैं कि भारतीय बाज़ार में कॉटेज, अपने आप में अनूठा प्रयोग है।

कॉटेज आपको ऑनलाइन शॉपिंग और होम-डिलिवरी का विकल्प तो देता ही है, साथ में ग्राहक कार्ट के प्रोडक्ट्स को व्यक्तिगत तौर पर चेक करने का आग्रह भी कर सकते हैं। इस काम के लिए कॉटेज, स्थानीय डिलिवरी सर्विसों का सहारा लेता है। पेमेंट के लिए कैश-ऑन-डिलिवरी, पे यू मनी, डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स के विकल्प मौजूद हैं।

रत्नेश कहते हैं कि कॉटेज ने शॉपिंग के अनुभव को एक बेहतरीन मोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन और ऑफ़लाइन शॉपिंग के इस मेल को वह 'वीटेल (Vetail)'कहते हैं। रत्नेश कहते हैं कि यह बिल्कुल ऐसा है कि पूरी दुकान ख़ुद चलकर ग्राहक के पास आ रही है। रत्नेश मानते हैं कि यही बात उन्हें बाक़ी मार्केट प्लेयर्स से अलग करती है। उन्होंने जानकारी दी कि फ़िलहाल कंपनी एक महीने में लगभग 500 प्रोडक्ट्स की सेल कर रही है और मासिक ग्रोथ रेट 25 प्रतिशत का है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप का औसत टिकट साइज़ 1,900 रुपए का है।

रत्नेश के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक़, कॉटेज की शुरूआत दोनों ही को-फ़ाउंडर्स की पर्सनल सेविंग्स से हुई। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप बिज़नेस मॉडल इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि पहले ही दिन के कंपनी के पास भुगतान करने वाले ग्राहक हैं। उन्होंने बताया कि आगामी 6-8 महीनों में कंपनी पोस्ट-सीड फ़ंडिंग की कोशिश करेगी। कंपनी फ़िलहाल सिर्फ़ गुड़गांव में ही अपनी सुविधाएं मुहैया करा रही है, लेकिन कंपनी की योजना है कि जल्द ही, पूरे एनसीआर, चेन्नई और बेंगलुरु में भी इसे फैलाया जाए।

यह भी पढ़ें: बेंगलुरु के इस दंपती ने अपने स्टार्टअप के माध्यम से उठाया पर्यावरण को सुधारने का जिम्मा

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