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हर रविवार को यह पुलिस स्टेशन बदल जाता है चिल्ड्रेन क्लिनिक में, फ्री में होता है इलाज

चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस थाना...

26th Jan 2018
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सरकार ने इस पुलिस स्टेशन वाले अस्पताल को स्थापित करने में काफी मदद की है और अपने कोष से 5 लाख रुपये भी दिए। सरकार का मकसद पुलिस थानों को चाइल्ड फ्रेंडली बनाना है।

फोटो साभार - कन्नूर पुलिस

फोटो साभार - कन्नूर पुलिस


इस मुहिम को इंडियन अकैडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा समर्थन भी मिल रहा है। IAP ने इसके लिए 14 बाल्य चिकित्सकों की व्यवस्था भी की है जो समय-समय पर थाने में आकर बच्चों का इलाज करते हैं।

केरल में समुद्र से सटा हुआ जिला है कन्नूर। यहां के टाउन पुलिस स्टेशन में सोमवार से लेकर शनिवार तो सामान्य तरीके से काम होता है, लेकिन रविवार को यह पुलिस स्टेशन एक अस्पताल में बदल जाता है। यहां हर रविवार को सुबह 10 बजे से 1 बजे तक बच्चों का इलाज चलता है। यह पहल कन्नूर पुलिस स्टेशन में तैनात सर्कल ऑफिसर टीके रतन कुमार ने शुरू की है। राज्य सरकार ने छह पुलिस थानों को चाइल्ड फ्रेंडली यूनिट बनाने का फैसला किया है। उन छह पुलिस थानों में से कन्नूर थाने का भी नाम है।

इंस्पेक्टर रतन कुमार ने द न्यूज मिनट को बताया कि कन्नूर में कई सारे अस्पताल हैं लेकिन बच्चों के इलाज के लिए कोई अच्छा अस्पताल नहीं है। जो एक दो क्लिनिक हैं भी वो अच्छी हालत में नहीं हैं। इस हालत में अगर कोई इमर्जेंसी होती है तो पैरेंट्स बच्चों को अस्पताल के दूसरे डॉक्टरों के पास ले जाते हैं। इंस्पेक्टर ने कहा, 'मुझे लगा कि इस समस्या का समाधान होना चाहिए औऱ इसलिए हमने पुलिस थाने में ही बच्चों का अस्पताल बना दिया।' वह बच्चों के लिए पास के मेडिकल स्टोरों से फ्री में दवाईयां भी उपलब्ध करवाने के बारे में सोच रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'फ्री में दवाईयां उपलब्ध करवाने में कई सारी दिक्कते हैं क्योंकि उसके लिए हमें अलग से एक फार्मासिस्ट रखना होगा, और पुलिस स्टेशन में ही छोटा सा मेडिकल स्टोर बनाना होगा। लेकिन अगर ऐसा हो जाएगा तो दवाओं की किल्लत नहीं होगी, इसलिए हम सोच रहे हैं कि इसे कैसे लागू किया जाए।' इस मुहिम को इंडियन अकैडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स द्वारा समर्थन भी मिल रहा है। IAP ने इसके लिए 14 बाल्य चिकित्सकों की व्यवस्था भी की है जो समय-समय पर थाने में आकर बच्चों का इलाज करते हैं।

इस क्लिनिक का उद्घाटन पिछले हफ्ते ही हुआ है। पहले हफ्ते में ही 12 अभिभावक अपने बच्चों को यहां इलाज के लिए लेकर आए। कन्नूर के कोइली अस्पताल के डॉक्टर एमजे नंदकुमार ने उन्हें देखा। एक बच्चे की हालत काफी नाजुक थी उसे तेज बुखार था। इसलिए उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सरकार ने इस पुलिस स्टेशन वाले अस्पताल को स्थापित करने में काफी मदद की है और अपने कोष से 5 लाख रुपये भी दिए। सरकार का मकसद पुलिस थानों को चाइल्ड फ्रेंडली बनाना है। इन सभी 6 पुलिस थानों में चाइल्ड वेलफेयर और डेवलपमेंट को प्रमोट करने के लिए अलग से कमरे बनाने के आदेश दिए गए हैं।

रतनकुमार ने बताया कि बाल अपराधियों की काउंसिग से इसकी शुरुआत हुई थी। उन्हें कानूनी और मानसिक सहायता दी जाती है। यहां बच्चों के लिए अलग से शौचालय, बिस्तर और खिलौने भी हैं। देश में बाल अपराध में काफी बढ़ोत्तरी हुई है, जिसका समाधान करने के लिए केरल सरकार ने इस पहल को शुरू करने का फैसला किया है। कई सारे बच्चे पीड़ित होने के बाद भी डर के मारे पुलिस स्टेशन नहीं पहुंच पाते हैं। अभी सिर्फ कन्नूर के इस पुलिस स्टेशन में बच्चों के देखरेख की शुरुआत हुई है, लेकिन रतन कुमार का कहना है कि बहुत जल्दी बाकी के स्टेशनों में भी ऐसी ही पहल शुरू की जाएगी।

यह भी पढ़ें: IIT में पढ़ते हैं ये आदिवासी बच्चे, कलेक्टर की मदद से हासिल किया मुकाम

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