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केरल का यह शिक्षक प्रतिदिन तैरकर बच्चों को पढ़ाने जाता है और आजतक कभी छुट्टी नहीं ली है

Pooja Goel
8th Dec 2015
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टीम वाईएसहिंदी

लेखकः थिंकचेंज इंडिया

अनुवादकः निशांत गोयल


आईये आज हम आपको रूबरू करवाते हैं केरल के मलप्पुरम के पडिजट्टुमारी के मुस्लिम लोअर प्राइमरी स्कूल के गणित के 42 वर्षीय अध्यापक अब्दुल मलिक से। बीते 20 वर्षों से वे सड़क मार्ग से 24 किलोमीटर लंबी यात्रा में खराब होने वाले समय को बचाने के लिये प्रतिदिन अपने घर से स्कूल और स्कूल से वापस घर तैरकर जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने आज तक अपने स्कूल से एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है।

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उन्हें तैरकर जाने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि वे एक लंबी दूरी की सड़क यात्रा से बच जाते हैं जिसे पूरा करने के लिये उन्हें तीन बसों को बदलना पड़ता और इस पूरी प्रक्रिया में उनका बहुत कीमती समय बर्बाद होता। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक साक्षात्कार में उनका कहना है, ‘‘मैंने अपने पहले वर्ष के दौरान तो सड़क मार्ग से ही यात्रा की। लेकिन अपने एक सहयोगी की सलाह के बाद मैंने नदी को तैरकर पार करके आना-जाना प्रारंभ किया। मेरा स्कूल तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है और ऐसे में परिवहन के किसी अन्य साधन का उपयोग करने के मुकाबले तैरकर वहां पहुंचना अधिक बेहतर है।’’ वे अपने साथ कपड़ों और काॅपी-किताबों को भीगने से बचाने के लिये उन्हें एक प्लास्टिक के बैग में लेकर जाते हैं। एक बार तैरकर नदी पार करने के बाद वे अपने साथ लाए सूखे कपड़े बदलते हैं और फिर स्कूल जाते हैं।

इसके अलावा अब्दुल एक बड़े पर्यावरण प्रेमी भी हैं और वे बीते कुछ वर्षों में नदी में बढ़ती हुई गंदगी और प्रदूषण को देखकर काफी दुखी हो जाते हैं। वे अक्सर अपने छात्रों को भी तैराकी के लिये ले जाते हैं और छात्र भी अपने इस बेहतरीन शिक्षक से बहुत प्रेम करते हैं। नदी के किनारे पर पहुंचकर वे लोग मिलकर प्लास्टिक, कचरा और नदी के किनारों और सतह पर तैर रही अन्य गंदगी को हटाने का काम करते हैं। वे कहते हैं, ‘‘लेकिन हमें अपनी नदियों को प्रदूषण से बचाना चाहिये क्योंकि प्रकृति धरती को भगवान का एक अमूल्य उपहार है।’’

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