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जेटली ने दिए टैक्स में छूट के संकेत

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है, कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए भारत को अब कराधान के निचले स्तर पर जाने की है जरूरत।

PTI Bhasha
26th Dec 2016
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई के भाषण के बाद पूंजी बाजार की बेचैनी को शांत करने के लिए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने स्पष्ट किया है कि शेयरों की खरीद-फरोख्त में दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर कर आरोपित करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। गौरतलब है कि निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ का मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है। प्रधानमंत्री के उस भाषण के आधार पर यह अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि उन्होंने पूंजी बाजार पर कर बढ़ाने का संकेत दिया है और वह चाहते हैं कि पूंजी बाजार के कारोबारियों समेत सभी वर्गों के लोगों को राष्ट्रीय खजाने में योगदान करना चाहिए।

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कहा जा रहा है, कि सरकार मौजूदा टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 4 लाख रुपये करने पर विचार कर रही है। वर्तमान में टैक्स छूट की लिमिट 2,50,000 रुपये हैं। अगर टैक्स स्लैब में बदलाव होता है, तो 4 लाख तक की कमाई करने को टैक्स देने से छूट मिल जाएगी।

वित्तमंत्री अरूण जेटली ने डिजि धन मेला कार्यक्रम के दौरान बातचीत में कहा, ‘मीडिया के एक हलके ने प्रधानमंत्री के भाषण की गलत व्याख्या की है और उसने यह अर्थ निकालना शुरू कर दिया कि इसमें परोक्ष रूप से प्रतिभूतियों के कारोबार में दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर कर आरोपित किए जाने का संकेत है।’ जेटली ने कहा, ‘यह व्याख्या बिलकुल गलत है।’ इस समय सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों को एक साल के अंदर बेचने पर होने वाले लाभ पर ही कर लगाया जाता है जबकि एक साल या उससे ज्यादा समय बाद शेयरों की बिक्री पर होने वाला लाभ करमुक्त है। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऐसा कोई बयान नहीं दिया, इसलिए मैं यह बिलकुल स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी के लिए इस निष्कर्ष पर पहुंचने का कोई आधार नहीं है क्योंकि प्रधानमंत्री ने ऐसा कुछ नहीं कहा है और ना ही सरकार की ऐसी कोई मंशा है जैसा कि लोग समझ रहे हैं।’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई में कहा था कि, ‘जो लोग वित्तीय बाजारों से फायदा उठा रहे हैं उन्हें कर के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में समुचित योगदान करना चाहिए। हमें इसको (योगदान को) उचित, प्रभावी और पारदर्शी तरीकों से बढ़ाने के उपायों पर विचार करना चाहिए। अब यह पुनर्विचार करने और एक अच्छी अभिकल्पना तैयार करने का समय है जो सरल और पारदर्शी हो, लेकिन साथ ही यह निष्पक्ष और प्रगतिशील भी हो। विभिन्न कारणों से उन लोगों का योगदान अभी कम है जो पूंजी बाजारों से पैसा बना रहे हैं। इसका कारण या तो गैरकानूनी कामकाज, धोखाधड़ी है या कर ढांचे की कमी है, जिसमें कुछ तरह की वित्तीय आय पर कर की दरें बहुत कम या शून्य हैं।'

भारत में अल्पकालिक (एक साल से कम की अवधि के शेयर निवेश पर) पूंजीगत लाभ कर की दर 15 प्रतिशत है। इसके अलावा प्रतिभूतियों के कारोबार पर 0.017 प्रतिशत से लेकर 0.125 प्रतिशत तक प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) लगाया जाता है।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है, कि सरकार ने कालेधन के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। विभिन्न देशों के साथ कर संधियों की समीक्षा की गई है। उन्होंने इस संबंध में आय घोषणा योजना, बेनामी संपत्तियों से संबंध कानून इत्यादि का भी जिक्र किया। नोटबंदी के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि नकदी का चलन घटे और उसकी जगह डिजिटल प्रणाली का उपयोग हो। आम लोग डिजिटल करेंसी का फायदा समझ रहे हैं, लेकिन कुछ वर्ग के लोगों को समझने में देर लगती है और हमारे कुछ राजनीतिक मित्रों को भी यह बात समझने में देर लगती है। कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था बनना हर देश के हित में है और यह बात बहुत बार लिखी जा चुकी है। पिछले डेढ़ महीने में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज हुई है, 75 करोड़ में से 45 करोड़ डेबिट-क्रेडिट कार्ड का सक्रिय इस्तेमाल हो रहा है। वित्त मंत्री ने कम नकदी वाली अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि इससे सरकार की आय बढ़ेगी और इससे सरकार को ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने और रक्षा मद पर अधिक आवंटन करने में मदद मिलेगी। साथ हू उन्होंने यह भी कहा, कि ज्यादा नकदी के चलन की बुराई यह है कि इससे सरकार को प्राप्तियां कम होती हैं और उसका घाटा ऊंचा होता है। 

सरकार का वाषिर्क बजट इस समय करीब 20 लाख करोड़ रपये का है। इसमें 16 लाख करोड़ रपये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से प्राप्त होते हैं और चार लाख करोड़ रपये का घाटा रह जाता है जिसके लिए उसे रिण आदि पर निर्भर करना पड़ता है।

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बजट के आने से पहले वित्तमंत्री अरूण जेटली का बयान ये संकेत देता है, कि सरकार टैक्स में लोगों को छूट दे सकती है।

उधर दूसरी तरफ वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है, कि अगर देश को व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था बनाना है तो दुनिया के दूसरे देशों के अनुरूप कर दरों का निम्न स्तर होना जरूरी है। यह विचार अब बीते दिनों की बात हो गयी है, कि कर की ऊंची दरों से अधिक राजस्व मिलता है, 1991 से अर्थव्यवस्था का यह सिद्धांत बदल गया है। आईआरएस अधिकारियों के पेशेवर प्रशिक्षण का उद्घाटन करते हुए जेटली ने कहा, कि आपको व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था की जरूरत है जिसके लिये आपको करों के निम्न स्तर की आवश्यकता है। आपको वस्तुओं का विनिर्माण करने और सेवाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है जो प्रतिस्पर्धी हों और इसीलिए आपके कर वैश्विक स्तर के अनुरूप होने चाहिए। प्रतिस्पर्धा केवल घरेलू नहीं है बल्कि वैश्विक है और इसीलिए पिछले ढाई दशक में सरकारें इन सिद्धांतों से निर्देशित होती रही हैं।

पिछले 70 साल के लोगों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह विचार है कि अगर सरकार को कर नहीं दिया जाता है तो इसमें कुछ भी ‘अनुचित’ या ‘अनैतिक’ नहीं माना जाता रहा है। इसे ‘वाणिज्यिक क्षेत्र में कुशलता’ के रूप में देखा जाता है और वास्तव में कुछ लोगों ने इसका गंभीर परिणाम भुगता है। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राजस्व सेवा के युवा अधिकारियों से कहा कि आने वाले दशकों में उन्हें देश में स्वैच्छिक कर अनुपालन में वृद्धि देखने को मिलेगी और करदाताओं को यह समझना चाहिए कि वैध कर का भुगतान उनकी जिम्मेदारी है और उसके बाद बदले में आप करदाता पर भरोसा कर सकते हैं। जिन मामलों में स्थिति स्पष्ट है उन्हें छोड़कर आपको करदाताओं पर भरोसा होना चाहिए और आप केवल उन्हीं चुनिंदा मामलों में व्यापक आडिट या जांच के लिये आगे बढ़ें। कर संग्रहकर्ताओं को अपने कौशल को निखारना होगा क्योंकि केंद्र तथा राज्यों का अप्रत्यक्ष कर अंतत: एक होने जा रहा है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘एक बार केंद्र तथा राज्यों का कर इस एक कर में तब्दील होता है, केंद्र तथा राज्यों के प्राधिकरणों के बीच सहयोग खुद-ब-खुद बहुत उच्च मानदंड तक पहुंच जाएगा। गतिविधियों का मानकीकरण, प्रौद्योगिकी का उपयोग तथा नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिये काफी बेहतर निगरानी कौशल की आवश्यकता होगी। आपराधिक या कर कानून में कोई अस्पष्टता नहीं है तथा नियमों के उल्लंघन का पता लगाने के लिये कड़े सिद्धांतों के अनुपालन की जरूरत है। फरीदाबाद स्थित नासेन परिसर एवं प्रशिक्षण केंद्र प्रशिक्षुओं के लिए काफी सुविधाजनक है, क्योंकि फरीदाबाद देश की राजधानी दिल्ली के साथ बिल्कुल नजदीक सटा हुआ है।

उन्होंने कहा कि इसी वर्ष अगस्त के महीने में उन्हें हैदराबाद में लगभग 500 एकड़ भूमि में विकसित होने वाले नासेन कार्यालय परिसर की भी बतौर मुख्य अतिथि आधारशिला रखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। प्रशिक्षु अधिकारी नासेन के शांतिपूर्ण माहौल व श्रेष्ठ सुविधाओं का लाभ लेकर गंभीरतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा करें। उन्होंने कहा कि देश की राजस्व वृद्घि तथा कर व्यवस्था को सु़दृढ़ करने के साथ-साथ करदाताओं की समस्याओं को भी हल करने में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों की अहम भूमिका रहती है। प्रशिक्षण प्राप्ति के बाद जब वे देश की सेवा में आएंगे तो हर फाइल उन्हें नया अनुभव दिलाएगी। नासेन के निदेशक पीके दास ने कहा कि एक अक्तूबर 1955 को दिल्ली में दरियागंज से शुरू हुआ नासेन कार्यालय एवं प्रशिक्षण परिसर का क्रम हौजखास व मदनगीर होते हुए फिर 1996 में फरीदाबाद के सैक्टर-29 में स्थापित हुआ। केंद्रीय उत्पाद शुल्क बोर्ड के चेयरमैन नजीब शाह ने कहा कि नासेन प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षुओं को एक अच्छे अधिकारी के साथ-साथ अच्छा नागरिक बनने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

साथ ही वित्त मंत्री ने सिंचाई कार्यों के लिए वित्तपोषण के लिए नाबार्ड की सराहना करते हुए आज कहा कि 'पोलावरम सहित इस तरह की परियोजनाओं के परिणाम जल्द सामने आते हैं अैर इससे ‘सामाजिक संतुष्टि’ बढ़ेगी। पहली बार नाबार्ड सिंचाई परियोजनाओं का वित्तपोषण कर रहा है, सिंचाई के जरिए कृषि में निवेश का असर अगले सीजन से ही दिखने लगता है और इन परिणामों से सामाजिक संतुष्टि आती है, आर्थिक संपन्नता आती है।’ उन्होंने कहा,‘इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वित्तपोषण का एक बड़ा भाग इस उद्देश्य के लिए आए। देश के जल संसाधनों का अधिकाधिक इस्तेमाल किसानों के फायदे के लिए करना प्रमुख उद्देश्यों में से एक है।’ उन्होंने कहा कि कुछ अन्य क्षेत्रों के लिए भी यह सच बात है।

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जेटली ने विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए महाराष्ट्र, गुजरात व आंध प्रदेश को चैक सौंपे।

आंध्र प्रदेश को बहुद्देश्यीय पोलावरम परियोजना के कार्यान्वयन क लिए 1981 करोड़ रपये का चैक दिया गया। महाराष्ट्र व गुजरात को क्रमश: 756 करोड़ रूपये व 263 करोड़ रूपये का चैक प्रदान किया गया। इन राज्यों को यह राशि इस साल के बजट में घोषित दीर्घकालिक सिंचाई कोष के तहत दी गई है। साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य के साथ सरकार ने नाबार्ड को चरबबद्ध तरीके से 77,000 करोड़ रूपये जुटाने को कहा है। इस अवसर पर शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू, जल संसाधन मंत्री उमा भारती, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, जल संसाधन राजय मंत्री संजीव कुमार बालयान व विजय गोयल भी मौजूद थे।

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