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'CBazaar', विदशों में पारंपरिक भारतीय परिधान उपलब्ध करवाता

वर्ष 1998 में राशन का सामन और सब्जियां उपलब्ध करवाने वाले आॅनलाइन मंच ChennaiBazaar.com के रूप में हुआ था सफर प्रारंभइसके संस्थापकों ने वर्ष 2004 में इसे पारंपरिक भारतीय परिधान उपलब्ध करवाने वाले मंच CBazaar.com का दिया रूपफिलहाल विश्व के 188 देशों में एक लाख से भी अधिक उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा रहे हैं पारंपरिक परिधानमात्र 10 लोगों की टीम से शुरू हुए सीबाजार में अब 350 से भी अधिक लोग कार्यरत हैं

Pooja Goel
13th Aug 2015
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जब हम CBazaar (सीबाजार) के बारे में बात करते हैं तो हमें पीछे मुड़कर वर्ष 1998 के उस दौर में वापस जाना पड़ता है जब यह किराने के सामान और सब्जियों की बिक्री करने वाले एक मंच के रूप में ChennaiBazaar.com (चेन्नईबाजारडाॅटकाॅम) के नाम से जाना जाता था। लेकिन उस दौर में इस व्यापार माॅडल को बहुत ही कम मुनाफे के अलावा कई प्रकार की कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि उस दौर में आज की तरह लाॅजिस्टिक्स और मोबाइल फोन का चलन न के बराबर था और अगर था भी तो वह अभिजात्य वर्ग के बीच था। वर्ष 1999 के मध्य में चेन्नईबाजार के संचालन में बदलाव करते हुए इसे प्रवासी भारतीयों के लिये उपहार भेजने वाले एक मंच के रूप में पुर्नगठित किया गया।

CBazaar.com के संस्थापक और सीईओ राजेश नाहर कहते हैं, ‘‘‘‘सीबाजार वर्ष 2000 के दौर में भारत में पहली ऐसी कंपनी थी जो ई-काॅमर्स के माध्यम से सडि़या तक आॅनलाइन बेच रही थी। तभी हमें अहसास हुआ कि विश्वभर में फैले प्रवासी भारतीयों के बीच पारंपरिक कपड़ों की बहुत अधिक मांग है।’’

वर्ष 2004 के बाद से राजेश ने वैश्विक स्तर पर पारंपरिक भारतीय परिधानों से संबंधिात ई-काॅमर्स व्यापार पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया और ChennaiBazaar.com का नामकरण CBazaar.com में कर दिया और वर्ष 2005 आते-आते उपहार उपलब्ध करवाने वाला यह मंच पूर्ण रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीयों को पारंपरिक परिधानों से रूबरू करवाने वाले मंच में तब्दील हो गया।

यह विचार मूर्त रूप तक ले पाया जब राजेश नाहर और रितेशा कटारिया चेन्नई में अपनी सायंकालीन एमबीए कक्षाओं के दौरान अपने एक और सहसंथापक से मिले और तीनों ने इंटरनेट के प्रति अपनी पारस्पािक रुची को पाया। इन लोगों ने पश्चिमी देशों में रहने वाले लोगों को लक्षित करते हुए अपने उद्यम की नींव रखी क्योंकि इन्हें विश्वास था कि चेन्नई के वो लोग जो विदेशों में अपनी मातृभूमि से दूर रह रहे हैं वे अपनी पसंद के परिधानों को आॅनलाइन खरीदने में जरूर रुचि दिखाएंगे।

वर्ष 2001 के अंत में उद्यम से पूर्व की तैयारियों और विदेशों में रह रहे भारतीयों के आॅनलाइन खरीददारी को लेकर रवैये को जानने और समझने के लिये राजेश ने ब्रिटेन का रुख किया और वहां पर दक्षिण एशियाई मूल के निवासियों द्वारा संचालित की जाने वाली दुकानों के साथ अपने कैटालाॅग प्रदर्शित करने के लिये करार करने में सफलता पाई।

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यह कंपनी पूरी तरह से अपने धन और 12 लाख रुपये के प्रारंभिक निवेष के साथ अस्तित्व में आई। बीते 10 वर्षों की एक मजबूत विरासत के साथ वर्तमान में सीबाजार अपने उपभोक्ताओं को 25 हजार से भी अधिक डिजाइनों के विकल्प प्रदान करता है जिन्हें पूरी दुनिया में कहीं भी मंगवाया जा सकता है।

10 लागों की एक छोटी सी टीम के रूप में प्रारंभ होने वाला साबाजार का कारवां अब वक्त के साथ 350 लोगों की टीम में तब्दील हो चुका है जिसमें प्रतिभाशाली फैशन डिजाइनर, ड्रेस तैयार करने वाले, प्रोग्रामर, डिजायनर इत्यादि शामिल हैं।

राजेश कहते हैं, ‘‘यह कंपनी मूलतः अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचने वाले अपने उत्पादों के लिये जानी जाती है। 188 देशों में फैले 1 लाख से भी अधिक उपभोक्ताओं के आधार के साथ सीबाजार खुद को पारंपरिक भारतीय परिधानों को उपलब्ध करवाने वाले एक ब्रांड के रूप में खुद को स्थापित करने की ओर अग्रसर हैं और हम भारत-निर्मित फैशन की सफलता की कहानी का प्रतिनिधित्व करने वाले के रूप में खुद को स्थापित करना चाहते हैं।

बीते पाँच वर्षों के दौरान सीबाजार 60 प्रतिशत की सीएजीआर से वृद्धि कर रहा है और मिलने वाले औसत आर्डर करीब 13 हजार रुपये के होते हैं। इस कंपनी ने देशभर में 450 विक्रेताओं का एक मजबूत आपूर्ती आधार तैयार किया है जिसमें शीर्ष डिजायनर, ब्रांड, रिटेलर के अलावा जमीनी स्तर से जुड़े ग्रामीण कारीगर भी शामिल हैं।

राजेश कहते हैं, ‘‘हमारे पास बाहर से पूँजी जुटाने अलावा कोई और विकल्प नहीं था इसलिये हमने हमेशा लाभ कमाने और अपने व्यापार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया। वर्ष 20005 के दौरान हम 3 से 5 प्रतिशत की पीएटी पा रहे थे।’’

सीबाजार अपने उपभोक्ताओं को अपनी स्वयं की डिजाइन टीम द्वारा तैयार किये गए विशेष डिजाइन उपलब्ध करवाता है जिनपर कोलकाता के विशेषज्ञ कारीगर काश्तकारी करते हैं। इसके अलावा यह कंपनी कपड़ों के अनुकूलन के लिये प्रख्यात है और अपनी सूची में प्रतिदिन 3000 नए डिजाइन जोड़ रही है।

राजेश कहते हैं कि चूंकि ये लोग सीधे निर्माताओं ने कच्चा माल खरीदते हैं इस वजह से इनके उपभोक्ताओं को 10 से 30 फीसदी तक कम दाम देने पड़ते हैं।

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वर्ष 2007 में सीबाजार ने विवाह के लिये पारंपरिक भारतीय परिधान उपलब्ध करवाने वाली सबसे बड़ी शाॅपिंग वेबसाइट HomeIndia.com का अधिग्रहण किया। इस अधिग्रहण के चलते सीबाजार अपने उत्पादों में विविधता लाने और एक वृहद फैशन पोर्टफोलियो तैयार करने में कामयाब रहा जिसके नतीजतन यह कंपनी खुद को एक फैशन फैक्ट्री के रूप में तब्दील करने में सफल रही।

आने वाले कुछ वर्षों में सीबाजार अपना सारा ध्यान पश्चिमी देशों के बाजारों पर केंद्रित करने की योजना बना रहा है और इनका इरादा भारतीय पारंपरिक परिधानों की समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा देने और भारतीय पहनावे को एक वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने का है।

इसके अलावा वे रितु कुमार जैसे प्रसिद्ध डिजाइनरों, जो अभी तक लोगों की नजरों से देर रहे कपड़े को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहे हैं, के साथ भी संबद्ध होने के प्रयास भी कर रहे हैं। इसके अलावा भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के हस्तक्षेप के फलस्वरूप भी पश्चिमी देशों में भारतीय पारंपरिक परिधानों की मांग में भारी इजाफा देखने को मिला है।

राजेश कहते हैं, ‘‘भारतीय पारंपरिक परिधानों की श्रेणियों को विकसित करना पश्चिमी देशों में आर्थिक रूप से अधिक बेहतर नतीजे देता है। यह एक ऐसा अनछुआ बाजार है जिसमें विकास की विशाल क्षमताएं हैं। इसके अलावा लावा ऐसा करके भारतीय वस्त्रों के लिये एक वैश्विक ब्रांड का भी निर्माण किया जा सकता है।’’

नवंबर 2014 में इस कंपनी ने फोरम सिनर्जी से 50 करोड़ की प्राइवेट इइक्विटी फंडिंग प्राप्त करने में सफलता हासिल की। इनके अन्य निवेशकों में इन्वेंटस कैपिटल और ओजस वेंचर शामिल हैं। फंडिंग के इस दौर में सीबाजार की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये आंकी गई है।

राजेश का कहना है कि उनके राजस्व का 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी बाजारों और अप्रवासी भारतीयों से आता है। भारतीय बाजार में बिक्री की बात करें तो इनकी बिक्री का अधिकतर हिस्सा बाॅलीवुड में चल रहे फैशन पर आधारित शैलियों से आता है। बाॅलीवुड फिल्मों और भारतीय टीवी धारावाहिकों के किरदारों द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों की मांग बहुत अधिक रहती है।

राजेश कहते हैं, ‘‘लहंगे, अनारकली सूट और दुल्हन द्वारा पहने जाने वाले परिधान हमारे सबसे अधिक बिकने वाले उत्पादों में से एक हैं। इसके अलावा महानगरीय जीवन शैली को दर्शाने वाले परिधान की मांग भी बहुत अधिक रहती है। दीपावली और ईद जैसे त्यौहारों के अवसर पर हम सबसे अधिक पैसा कमाते हैं।’’

पारंपरिक परिधानों का अंतर्राष्ट्रीय बाजार करीब 15 हजार करोड़ रुपये भी अधिक का आंका गया है और ऐसे में सीबाजार आगे आने वाले समय में एक बड़ा दांव लगाने का विचार कर रहा है। 

राजेश कहते हैं, ‘‘ऐसे में जब लगभग 25 मिलियन से भी अधिक भारतीय विदेशों में रह रहे हैं और वे लोग प्रतिवर्ष औसतन 40 हजार से 50 हजार अमरीकी डाॅलर कमा रहे हैं हम माॅरीशस, दक्षिण अफ्रीका, आॅस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के बाजारों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने के प्रयास कर रहे हैं।’’

सीबाजार के इस वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपये के राजस्व को छूने का अनुमान जताया जा रहा है। यह कंपनी साल-दर-साल 100 प्रतिशत की दर से वृद्धि कर रही है और उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह 200 से 300 प्रतिशत की दर से ऐसा करने में कामयाब रहेगी।

उद्यमिता की दुनिया में प्रवेश करने का इरादा करने वाले नौजवानों को प्रेरणा का संदेश देते हुउ राजेश कहते हैं, ‘‘एक उद्यमी बनने के अपने कारणों को बिल्कुल साफ रखो और समझो। जोखिम लेने से बचो और अपने साथियों का चयन बहुत सावधानी से करो। रास्ते में आने वाली बाधाओं पर नहीं बल्कि अपने उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करो। गुजर चुके कल में सामने आई परेशानियों के बारे में सोचने की बजाय आज और कल अपने सामने आने वाले अवसरों पर अपना 90 प्रतिशत समय खर्च करो।’’

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