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घर में रखा धन बैंक में जमा कर देने से सफेद नहीं हो जायेगा : अरुण जेटली

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 27 नवंबर तक जमा हुए बैंकों में 8.45 लाख करोड़ रुपये के पुराने यानी अप्रचलित नोट (500 व 1000 रुपये)।

PTI Bhasha
3rd Dec 2016
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वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कालेधन वालों को एक तरह से आगाह करते हुए आज कहा कि कोई अपने कालेधन को केवल बैंक खातों में जमा कराके ही उसे सफेद नहीं बना सकता क्योंकि ऐसे अघोषित धन पर कर चुकाना होगा।

वित्त मंत्री अरूण जेटली

वित्त मंत्री अरूण जेटली


बैंकों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होने संबंधी सवाल पर अरुण जेटली ने कहा, ‘(अघोषित धन को) जमा करवाने भर से ही आप कर चुकाने की जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।’ उन्होंने कहा कि इस तरह की जमाओं पर आयकर विभाग की नजर है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 27 नवंबर तक बैंकों में 8.45 लाख करोड़ रुपये के पुराने यानी अप्रचलित नोट (500 व 1000 रुपये) जमा हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा ने आयकर कानून में संशोधन कर दिया है जिसके तहत इस तरह की अघोषित आय पर अधिक कर व जुर्माना लगाया जा सकेगा। यह विधेयक राज्यसभा में लंबित है। संशोधित आयकर कानून के मुताबिक 30 दिसंबर तक स्वैच्छिक रूप से यदि अघोषित राशि की जानकारी सरकार को दी जाती है तो ऐसे धन पर सरकार कर और जुर्माने सहित कुल 50 प्रतिशत कर वसूलेगी। इसके बाद भी यदि कोई अघोषित राशि का पता चलता है तो उस पर कर और जुर्माने सहित कुल 85 प्रतिशत कर वसूला जायेगा। नोटबंदी के तीन सप्ताह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लाइनों के बारे में पूछे गये सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक ने 500 रुपये के नोट की आपूर्ति बढ़ाई है और स्थिति जल्दी ही सुधर जायेगी।

इनकम टैक्स अधिकारियों की पड़ताल के डर से टैक्स न चुकाने जैसी बातें बेकार का बहाना है। टैक्स न चुकाने वाला शख्स यह कहकर बच नहीं सकता, कि कर चुकाने के बाद और ज्यादा सरदर्दी मोल लेनी पड़ेगी।

टैक्स की पड़ताल कैसे की जाती है, इस प्रक्रिया को लेकर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, कि जो लोग भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं, उनके सारे डाटा सीधे कंप्यूटर सिस्टम में जाते हैं और वहां से एक सेंट्रल सिस्टम को प्रेषित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया के बीच में कोई भी इंसानी हस्तक्षेप नहीं होता। कुछ एलर्ट्स होते हैं, जो सामने आते हैं। इन अलर्ट्स के माध्यम से यह पता चलता है कि इनकम टैक्स स्क्रूटिनी (पड़ताल) के लिए किसे उठाया जाए।

जो लोग बहुत ज्यादा कैश विदड्रॉल कर चुके होते हैं, बहुत ज्यादा कैश डिपॉजिट करते हैं, बहुत ज्यादा प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन सिस्टम में दिखाई दे रहे हों, तो इस तरह के मामलों में सिस्टम रेड अलर्ट जेनरेट करता है।

साथ ही अरुण जेटली ने यह भी कहा, कि हर साल रिटर्न फाइल करने वाले लोगों में से केवल एक फीसदी यानी 3.5 लाख लोग ही जांच पड़ताल के लिए चुने जाते हैं। डिनर टेबल पर हल्के फुल्के अंदाज में यह कहना कि मैं टैक्स इसलिए नहीं भरूंगा, क्योंकि मेरी जांच पड़ताल की जा सकती है, यह बात दरअसल गलत काम करने वाले का बहाना है। 125 करोड़ की आबादी वाले देश में हर साल महज 4.5 करोड़ लोग रिटर्न फाइल करते हैं। विमुद्रीकरण से ब्लैक मनी रखने वालों की धरपकड़ की जा सकेगी और देश में टैक्स-बेस्ड सिस्टम बनेगा।

नोटबंदी के अर्थव्यवस्था पर असर को लेकर अरुण जेटली ने कहा, कि भारत पिछले साल की तरह इस साल भी दुनिया की सबसे तीव्र रफ्तार से वृद्धि कर रही प्रमुख अर्थव्यवस्था हो सकता है। अब से एक वर्ष में भारत ऊंची जीडीपी वाली साफ सुथरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगी जिसमें ब्याज दरें भी तर्कसंगत होंगी। 

अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के असर के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि रबी की बुवाई पिछले साल से अधिक है, वाहनों की बिक्री का रूझान मिला जुला है। इस बदलाव से थोड़ी उथल-पुथल हो सकती है, लेकिन दीर्घकालीन लाभ होंगे। सुरक्षा में नोटों की छपाई करने में समय लगता है और आरबीआई नोट जारी करने का काम कार्यान्वित कर रही है।

नोटबंदी से कारोबार और व्यापार बढ़ेगा लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली नकदी का स्तर घटेगा। देश ने नोटबंदी का आम तौर पर स्वागत किया है, इस तिमाही में प्रतिकूल प्रभाव का अनुमान लगाना अभी मुश्किल है, लेकिन इसका असर जरूर होगा।

साथ ही जीएसटी पर जेटली ने कहा, कि संविधान संशोधन के अनुसार, जीएसटी को लागू करने में ज्यादा देर नहीं की जा सकती। 16 सितंबर 2016 को हुए संविधान संशोधन के मुताबिक मौजूदा अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को वर्ष के दौरान चलाया जा सकता है, लेकिन इसमें किसी तरह की देरी का मतलब होगा 17 सितंबर, 2017 से कोई कर नहीं। जीएसटी और नोटबंदी दोनों ही अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने वाले होंगे, लेकिन सुधारों का विरोध करने वाले राज्यों को लेकर निवेशक सतर्कता बरतेंगे। 

और अंत में अरुण जेटली ने कहा, कि 6 सितंबर 2017 से पहले जीएसटी लागू करना संवैधानिक बाध्यता है.

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