आगे बढ़ने के लिए वातावरण बनाने की जरूरत : अरविंद पनगढ़िया, नीति आयोग

By PTI Bhasha
October 18, 2016, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:17:15 GMT+0000
आगे बढ़ने के लिए वातावरण बनाने की जरूरत : अरविंद पनगढ़िया, नीति आयोग
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने तीव्र आर्थिक वृद्धि के लिए देश में आवश्यक परिस्थितियों का निर्माण करने की जरूरत पर बल दिया ताकि संपत्ति का सृजन हो और गरीबी को दूर किया जा सके। उन्होंने 31वें सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति व्याख्यान में कहा, कि गरीबी से निपटने के लिए आर्थिक वृद्धि का ऊंचा होना बहुत आवश्यक है।

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अरविंद पनगढ़ियां ने गरीबी उन्मूलन और आर्थिक वृद्धि के संबंधों का निरूपण करते हुए पूर्वी एशिया की हांगकांग, दक्षिण कोरिया और ताइवान की तुलना भारत से की। पूर्वी एशिया की इन अर्थव्यवस्थाओं को जादुई अर्थव्यवस्थाएं कहा जाता है, जिन्होंने तीव्र आर्थिक वृद्धि हासिल करते हुए गरीबी जैसी समस्याओं से निजात पाया है।

अरविंद पनगढ़िया : इससे धन-संपत्ति के वितरण की रणनीति के बजाय तीव्र आर्थिक वृद्धि के जरिए रोजगार सृजन के बारे में नयी रोशनी दिखती है, जो गरीबी को तेजी से दूर करने में सहायक हो सकती है।

इस कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय पुलिस सेवा के 109 प्रशिक्षु, राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) 68 और 15 विदेशी प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। सरकारी शोध संस्थान नीति आयोग ने देश में इस्पात व खनन क्षेत्रों के लिए स्वतंत्र नियामक बनाने का समर्थन किया है ताकि इन दोनों उद्योगों को लाभप्रद बनाया जा सके।

इसके साथ ही नीति आयोग ने नयी व गतिशील इस्पात नीति का समर्थन किया है ताकि 100 अरब डालर से अधिक राशि के इस उद्योग को पटरी पर लाया जा सके और 2025 तक 30 करोड़ टन के लक्ष्य को हासिल कर लिया जाए।

नीति आयोग ने एक परिपत्र में कहा है,‘चूंकि इस्पात नियंत्रणमुक्त क्षेत्र है, प्रभावी नियमन के लिए एक स्वतंत्र नियामक की जरूरत है जिसका फिलहाल अभाव है।’ इसके अनुसार,‘ इसी तरह खनन क्षेत्र में हालांकि एनएमडीसी को नियामक के रूप में काम करना चाहिए लेकिन चूंकि यह खुद लौह अयस्क खनन में कार्यरत है जिससे हितों का टकराव हो सकता है। इसलिए खनन क्षेत्र में भी नये स्वतंत्र नियामक की जरूरत है।’ इस्पात कंपनियों की बिगड़ती वित्तीय हालत के बारे में नीति आयोग ने कहा है कि आपूर्ति व मांग कारकों के चलते बीते कुछ वर्षों से कंपनियों पर भारी ऋृण भार है।

यह परिपत्र नीति आयोग के सदस्य वी के सारस्वत व नीति आयोग पेशेवर रिपुंजय बंसल ने तैयार किया हेै।

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