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टमाटर के दाम से हाल बेहाल, इंजीनियर सिखा रहा है किसानों को टमाटर का सही इस्तेमाल

10th Aug 2017
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कई बार किसानों को उनकी लागत का पैसा भी नहीं मिल पाता। किसानों की हालत बदलने और टमाटर का और बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश में जुटे हैं वाराणसी में रहने वाले 24 साल के हिमांशु पांडे।

गांव की महिलाओं के साथ काम करते हिमांशू पांडेय

गांव की महिलाओं के साथ काम करते हिमांशू पांडेय


पेशे से इंजीनियर हिमांशु किसानों को जागरूक कर न केवल टमाटर की बढ़िया खेती के गुर सीखा रहे हैं, बल्कि टमाटर के जरिये कैसे ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है इसकी भी जानकारी दे रहे हैं।

हिमांशु ने जब किसानों से बात की तो उनको पता चला कि सबसे बड़ी समस्या फसल को बेचने की है, जहां पर किसान को उनकी लागत मूल्य भी नहीं निकल पाता।

आजकल बाजारों में टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं। और ये हाल तब हैं जब दुनिया भर में भारत का टमाटर उत्पादन में दूसरा स्थान है। इसकी बड़ी वजह है देश में पैदा होने वाला ज्यादातर टमाटर उचित रख-रखाव न होना। जिसके कारण टमाटर खराब हो जाते हैं। इस हालत में कई बार किसानों को उसे सस्ते दाम पर बिचौलियों को बेचने के लिये मजबूर होना पड़ता है। ऐसे हालात में कई बार किसानों को उनकी लागत का पैसा भी नहीं मिल पाता। किसानों की हालत बदलने और टमाटर का और बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश में जुटे हैं वाराणसी में रहने वाले 24 साल के हिमांशु पांडे

पेशे से इंजीनियर हिमांशु किसानों को जागरूक कर न केवल टमाटर की बढ़िया खेती के गुर सीखा रहे हैं, बल्कि टमाटर के जरिये कैसे ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है इसकी भी जानकारी दे रहे हैं। हिमांशु पांडे ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान महाराष्ट्र के विदर्भ में किसानों की आत्महत्या के बारे में सुना था। जब उन्होने किसानों की आत्महत्या का कारण जानने की कोशिश की तो उनको पता चला कि ज्यादातर किसानों पर बैंको का काफी कर्ज है। हिमांशु ने जब किसानों से बात की तो उनको पता चला कि सबसे बड़ी समस्या फसल को बेचने की है। जहां पर किसान को उनकी लागत मूल्य भी नहीं निकल पाता।

इसके बाद हिमांशु ने इस समस्या पर काम करने का फैसला लिया। हिमांशु ने इस समस्या से निपटने के लिये करीब एक महीने रिसर्च की और उसके बाद मैसूर जिले के नरसीपुरा तहसील के बन्नूर इलाके से करीब 8 किलोमीटर दूर सिंहहल्ली गांव में आकर किसानों के बीच काम करने लगे। यहां उन्होने देखा कि बाजार में टमाटर की मांग के मुताबिक सप्लाई ज्यादा थी इस वजह से टमाटर के दाम काफी नीचे गिर गये थे और किसान टमाटर को एक से दो रूपये तक बेचने के लिये मजबूर हो गये थे। ऐसी स्थिति में किसान फसल को तोड़ते भी नहीं थे और उसे खेत में ही जला देते थे।

इन हालात से निपटने के लिये हिमांशु ने तय किया कि अगर टमाटर का इस्तेमाल दूसरी चीजों जैसे टोमैटो सॉस को बनाने के लिये किया जाये तो इससे किसानों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि देश में टोमैटो सॉस की मांग दिन ब दिन बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक देश में टोमैटो सॉस में इस्तेमाल होने वाला करीब 60 फीसदी टमाटर दूसरे देशों से आयात किया जाता है। वहीं देश में उत्पादित होने वाले टमाटर का केवल 1 प्रतिशत ही प्रोसेसिंग यूनिट में जाता है, जबकि पश्चिमी देशों में ये 30 प्रतिशत तक है। इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए हिमांशु ने इलाके की कुछ महिलाओं को अपने साथ जोड़ा और उनको मैसूर की डिफेंस फूड रिसर्च लेबोरेटरी में एक हफ्ते की ट्रेनिंग दिलाई।

दूसरी ओर उन्होने किसानों को इस बात के लिये प्रोत्साहित किया कि वे सॉस में इस्तेमाल होने वाले जामुन प्रजाति के टमाटर की खेती करें, क्योंकि इस टमाटर में गूदा ज्यादा होता है जिससे टोमैटो कैचप की गुणवत्ता बेहतर होती है। आज इलाके की कई महिलाएं टोमैटो कैचप के काम को बखूबी अंजाम दे रही हैं। अब हिमांशु की कोशिश है कि आसपास के इलाकों में बिक रहा टोमैटो सॉस को दूसरे इलाकों में भी पहुंचाया जाये। ताकि किसानों को ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिल सके।

-गीता बिष्ट

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