सिंगापुर में इन्सानों पर शुरू होगा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का परीक्षण

By भाषा पीटीआई
June 11, 2020, Updated on : Thu Jun 11 2020 11:01:30 GMT+0000
सिंगापुर में इन्सानों पर शुरू होगा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का परीक्षण
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

टायचन जल्द ही सिंगापुर में इंसानों पर प्रायोगिक परीक्षण शुरू करने वाली पहली कंपनी बन सकती है।

(सांकेतिक चित्र)

(सांकेतिक चित्र)



सिंगापुर, सिंगापुर की एक जैवप्रौद्योगिकी कंपनी कोविड-19 के लिए संभावित मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचार पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करेगी। उम्मीद है कि इस उपचार से मरीजों में बीमारी फैलने की रफ्तार कम होगी और इससे मरीजों को तेजी से ठीक होने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही संक्रमण से अस्थायी तौर पर बचाव भी होगा।


कंपनी टायचन ने बुधवार को एक बयान में कहा है कि प्रायोगिक परीक्षण के पहले चरण के लिए सिंगापुर के स्वास्थ्य विज्ञान प्राधिकरण (एचएसए) से उसे अनुमति मिल गयी है। इस चरण में स्वस्थ लोगों पर इस उपचार को आजमाया जाएगा ।


कंपनी ने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी टीवाई027 को विकसित किया है जो कि खास तौर पर सार्स-सीओवी-2 को निशाना बनाता है। इसी कोरोना वायरस के कारण कोविड-19 का संक्रमण हुआ है।


शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनते हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्राकृतिक एंटीबॉडी का अनुसरण करते हैं और इन्हें अलग कर मरीजों में बीमारी के उपचार के लिए बड़े पैमाने पर इनका उत्पादन किया जा सकता है।


टायचन ने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 के उपचार के लिए कोई प्रमाणित एंटीबॉडी नहीं है। सार्स-सीओवी-2 संक्रमण को रोकने के लिए भी कोई टीका नहीं है।


टायचन सिंगापुर में इंसानों पर प्रायोगिक परीक्षण शुरू करने वाली पहली कंपनी बन सकती है। हालांकि, दुनियाभर में एंटीबॉडी आधारित उपचार की दिशा में प्रयास हो रहा है।


चैनल न्यूज एशिया के मुताबिक इस तरह के उपचार के लिए प्रायोगिक परीक्षण को लेकर केवल टायचन ने ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण कराया है।






नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर तथा कंपनी के सह संस्थापक ओई इंग ओंग ने कहा कि परीक्षण के परिणाम के आधार पर विभिन्न तरीके से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।


प्रोफेसर ओई ने कहा,

‘‘कोविड-19 के सभी मरीजों के उपचार तथा गंभीर बीमारी को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों पर भी इसे आजमाया जा सकता है और श्वास संबंधी परेशानी को बढ़ने से रोक सकते हैं।’’

उन्होंने इस दवा के बारे में बताया कि जिन लोगों को पहले से ही ऑक्सीजन की जरूरत है, उनके लिए उम्मीद है कि इस दवा से उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी । जो मरीज पहले से वेंटिलेटर पर हैं, उनको वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी।


उन्होंने कहा,

‘‘अगर उपचार कोविड-19 के लिए कारगर रहा तो हम काफी कुछ बदल सकते हैं । आज जिन समस्याओं का हम सामना कर रहे हैं, उससे निजात मिल सकेगी ।’’

साथ ही उन्होंने कहा कि बेहद गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सहायता की जरूरत पड़ेगी। इसके बिना उनकी मौत हो जाएगी।


ओई ने कहा,

‘‘हमें उम्मीद है कि इस उपचार से गंभीर रूप से बीमार हो रहे लोगों की संख्या कम होगी और कोविड-19 से मरने वालों की संख्या भी घटेगी।’’

टायचन ने कहा है कि दवा से इसका भी आकलन होगा कि सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के खिलाफ अस्थायी बचाव में क्या यह कारगर है।


टायचन ने कहा कि 23 स्वस्थ लोगों के खून में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी की खुराक दी जाएगी और शोध करने वाली टीम सुरक्षा का आकलन करेगी । सिंग हेल्थ इन्वेस्टिगेशनल मेडिसिन यूनिट में पहले चरण का परीक्षण छह सप्ताह तक चलेगा।