लॉकडाउन के बीच कुछ ऐसा है किसानों का हाल

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लॉकडाउन ने किसानों को बुरी तरह से प्रभावित किया है, अब सरकार द्वारा जारी राहत पैकेज उन्हें इस समस्या से बाहर लाता है ये देखने वाली बात होगी!

सांकेतिक चित्र

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कोरोना वायरस ने सभी क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है और कृषि इससे बिल्कुल भी अछूता नहीं है। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को काबू में करने के लिए लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन ने किसानों की कमर बुरी तरह तोड़ दी और कृषि तंत्र को बुरी तरह हिलाकर रख दिया। गौरतलब है कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत के किसान औसतन काफी कम मुनाफा कमाते हैं और उसके ऊपर इस समस्या ने उनके सामने बड़ा संकट लाकर खड़ा कर दिया है।


सरकार ने कोरोना वायरस के चलते प्रभावित हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है, जिसमें कृषि क्षेत्र को लेकर भी कई घोषणाएं की गई हैं। इन सभी योजनाओं को जमीन पर लागू होने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है, लेकिन वर्तमान में भी किसानों के खेतों में उनकी तमाम फसलें तैयार खड़ी हुई हैं, जिन्हे वो बेंचने के लिए मंडी नहीं ले जा पा रहे हैं।


उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर को कोरोना वायरस के अधिक मामलों के चलते रेड ज़ोन में रखा गया है। शहर में अभी भी कोरोना वायरस के नए मामले सामने आ रहे हैं, जिसके चलते सामान्य गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। कानपुर के ही एक किसान सनी कुशवाहा ने योरस्टोरी हिन्दी को बताया कि वे खेत में सब्जी उगाते हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन के चलते सब्जियों की कीमत आधे से भी कम हो गयी है और उन्हे लागत निकालने में भी मुश्किल आ रही है।


सनी ने बताया कि शुरुआत में मंडियों में बेहद अव्यवस्था रही। सब्जियाँ न बिक पाने के चलते कोई कमाई नहीं हो सकी, जिससे अब उन्हे सिंचाई और खेती की अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद परेशान होना पड़ रहा है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने किसानों को एक-एक हज़ार रुपये की आर्थिक मदद जरूर मुहैया कराई है, लेकिन किसानों के लिए यह मदद लगभग न के बराबर है।





इस बारे में सनी कहते हैं,

“आमतौर पर किसानों के परिवार संयुक्त और बड़े होते हैं ऐसे में एक हज़ार रुपये के साथ गुज़ारा असंभव है।”

सनी ने बताया कि जब लॉकडाउन की शुरुआत हुई तो पुलिस ने उन्हे उनके खेतों में भी जानें से रोक दिया, जिसके चलते उनकी फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है। सनी के अनुसार उन्हे इस बार 10 रुपये की फसल के लिए 2 रुपये तक मिले हैं, ऐसे में अब उनके पास बीज और सिंचाई जैसी बुनियादी चीजों के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।


सनी ने बताया कि पास में एक कैनाल है, जिससे सिंचाई विभाग मोटर के जरिये किसानों को पानी सप्लाई करता है, लेकिन बीते कुछ दिनों से मोटर खराब है और लॉकडाउन के चलते विभाग के इंजीनियर भी वहाँ नहीं आ रहे हैं, इसके चलते सिंचाई के सभी साधन ठप पड़े हैं।


सनी कहते हैं,

“हमारे पास सिंचाई का कोई साधन नहीं है, सब्जियाँ सस्ती हो रही हैं और डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में हम किसानों के लिए अपने खेतों की सिंचाई करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।”

किसान से सुनें उसका हाल-




हालांकि देश में लॉकडाउन 4 लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मंडियों के संदर्भ में थोड़ी छूट दे दी है, लेकिन फिर भी शहरी क्षेत्रों में साप्ताहिक मंडी पर अभी रोक लगी हुई है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में साप्ताहिक मंडी को सोशल डिस्टेन्सिंग के साथ खोलने की दिशा में कदम उठाया गया है।


राज्य सरकार के आदेश के अनुसार मुख्य सब्जी मंडियों को सुबह 4 बजे से 7 बजे तक खोला जाएगा, जबकि इसका रिटेल वितरण सुबह 6 बजे से 9 बजे तक किया जाएगा, हालांकि इन मंडियों को खुले स्थान पर स्थापित करने के बाद इन्हे सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक भी सामान्य लोगों के लिए खोला जा सकेगा।


केंद्र सरकार ने राहत पैकेज के तहत किसानों को 30 हज़ार करोड़ रुपये अतिरिक्त देने का फैसला किया है, यह राशि नाबार्ड की तरफ से उपलब्ध कराई जा रही 90 हज़ार करोड़ रुपये राशि के अतिरिक्त होगी। इस योजना से देश के तीन करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को फायदा होगा।


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