इस कपल का दमदार आइडिया देख रतन टाटा ने भी किया निवेश, तेजी से आगे बढ़ रही है इनकी कंपनी

अदिति वलुंज और चेतन वलुंज ने रेपोस एनर्जी नाम के स्टार्टअप की नींव रखी, जो आज IoT, क्लाउड और अपने पेमेंट समाधानों के साथ देश के 65 से अधिक शहरों में डोर-टू-डोर फ्यूल डिलीवर करने का काम कर रहा है।
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आज लोगों की दैनिक समस्याओं के समाधान का उद्देश्य लेकर देश में रोजाना नए स्टार्टअप की शुरुआत हो रही है। कुछ स्टार्टअप आज वैश्विक स्तर पर नाम कमा रहे हैं तो कुछ स्टार्टअप को अपने शुरू होने के महज कुछ ही महीनों बंद होना पड़ जाता है। इन सब के बीच कपल द्वारा शुरू किया गया एक स्टार्टअप ऐसा भी है जो लोगों को ना सिर्फ एक बड़ी समस्या का समाधान उपलब्ध करा रहा है बल्कि अपने बेहतरीन आइडिया के दम पर ही इस स्टार्टअप ने देश के मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट रतन टाटा से निवेश भी जुटा लिया है।

अदिति वलुंज ने फोरेंसिक और इंटरनेशनल रिलेशन की पढ़ाई की है जबकि चेतन वलुंज अपने घर के पेट्रोल पंप के कारोबार को संभालते थे। साल 2015 में जब दोनों की शादी हुई तो इस कपल ने यह निर्णय लिया कि वह सामान्य से इतर अपनी इस जोड़ी को व्यवसाय की तरफ भी लेकर जाएंगे।

मिला रतन टाटा का साथ

अदिति वलुंज और चेतन वलुंज ने रेपोस एनर्जी नाम के स्टार्टअप की नींव रखी, जो आज IoT, क्लाउड और अपने पेमेंट समाधानों के साथ देश के 65 से अधिक शहरों में डोर-टू-डोर फ्यूल डिलीवर करने का काम कर रहा है। सरल भाषा में आप इस स्टार्टअप को ईंधन का स्विग्गी या ज़ोमैटो भी बुला सकते हैं।

इस स्टार्टअप को उनका सबसे बड़ा समर्थन तब हासिल हुआ तब रतन टाटा ने स्टार्टअप में निवेश करने का निर्णय लिया। हालांकि रतन टाटा ने इस स्टार्टअप में कितना निवेश किया है इसे अभी गुप्त रखा गया है, लेकिन फाउंडर्स के अनुसार रतन टाटा के निवेश के बाद स्टार्टअप को स्केल करने में बड़ी मदद मिली है।

सरकार ने बना दिया रास्ता

साल 2017 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पेट्रोल और डीजल की होम डिलीवरी की घोषणा की, जिसका प्रमुख उद्देश्य था कि पेट्रोल पंप पर लगने वाली ट्रकों की लंबी कतार को कम किया जा सके और इसी के साथ ईंधन बिक्री के लिए डिजिटल लेन-देन को भी बढ़ाया जा सके।

सरकार के इस फैसले ने तेल कंपनियों के लिए ई-कॉमर्स जैसा एक मॉडल उपलब्ध करा दिया, जबकि अन्य उद्यमियों के लिए भी यह किसी बड़ी संभावना से कम नहीं था। इसी पर अमल करते हुए जून 2017 में रेपोस एनर्जी ने अपनी स्थापना के साथ इस क्षेत्र में पहला और प्रभावी कदम रख दिया।

कैसे काम करता है स्टार्टअप?

पुणे आधारित रेपोस अपने ग्राहकों को रेपोस पेट्रोल पंप (RPPs) के जरिये सेवा उपलब्ध कराता है। आप इसे चलता-फिरता पेट्रोल पंप भी कह सकते हैं, क्योंकि इसमें पहियों पर चल-फिर सकने के अलावा बाकी सेवाएँ बिल्कुल स्थायी पेट्रोल पंप जैसी ही हैं। RPPs के जरिये ग्राहकों को उनके दरवाजे पर थोक मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जाता है।

कंपनी की ऐप के जरिये ग्राहक अपने वाहन के लिए ईंधन ऑर्डर कर सकते हैं और फिर कंपनी के RPPs ग्राहक की बताई हुई लोकेशन पर निश्चित समय पर ईंधन लेकर पहुँच जाते हैं।

ग्राहक ईंधन के लिए डिलीवरी की मात्रा, दूरी और समय के अनुसार पेमेंट करते हैं, जिसकी गणना ऐप में मौजूद एक एल्गोरिद्म द्वारा की जाती है। स्टार्टअप का दावा है कि उसकी इस सेवा के जरिये साल क साल में 16 लाख लीटर डीजल को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है, इसी के साथ इससे कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आ सकती है।

Edited by Ranjana Tripathi

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