इन देशों ने लगा रखी है बिटकॉइन यूजर्स पर पाबंदी

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दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (bitcoin) का चलन पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है. Allied Market Research की एक रिपोर्ट के मुताबक, ग्लोबल क्रिप्टोकरेंसी मार्केट साइज (hlobal cryptocurrency market size) 2020 में 1.49 बिलियन डॉलर था. 2030 तक इसके 4.94 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. यह 2021 से 2030 तक 12.8% की CAGR (Compound Annual Growth Rate) से बढ़ रहा है.

दुनियाभर के अलग-अलग देशों में क्रिप्टोकरेंसी सरकार या मौद्रिक अधिकारियों से लेनदेन के माध्यम के रूप में अपना अधिकार प्राप्त करने की कोशिश कर रही है. लेकिन, अलग-अलग वित्तीय क्षेत्राधिकारों में इसकी कानूनी रुपरेखा तैयार करना मुश्किल है, क्योंकि इस पर किसी भी बैंक, या सरकार का कंट्रोल नहीं है.

इसलिए कई देशों ने कई बार क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया है. कुछ देशों ने बिटकॉइन अकाउंट होल्डर्स को इसके एक्सचेंज को लेकर चेतावनी दी हुई है.

ऐसे में, आइये एक नज़र डालते हैं उन देशों पर जिन्होंने बिटकॉइन यूजर्स को बैन कर रखा है...

बोलीविया: देश के केंद्रीय बैंक ने बिटकॉइन सहित क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है.

चीन: चीन ने क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों पर प्रतिबंध लगा दिया है और बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट्स को बिटकॉइन में ट्रेड करने से भी प्रतिबंधित कर दिया है.

कोलंबिया: इस देश में बिटकॉइन में इन्वेस्ट करने और इसे इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है.

इक्वाडोर: 2014 में इक्वाडोर की नेशनल असेंबली ने बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन अपने "इलेक्ट्रॉनिक मनी" के लिए दिशानिर्देश जारी किए.

रूस: हालांकि क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ कोई मौजूदा कानून नहीं है, रूसी सरकार ने चेतावनी दी है कि "वर्चुअल करेंसी" का इस्तेमाल टेरर फंडिंग (terror funding) और मनी लॉन्ड्रिंग (money laundring) के लिए किया जा सकता है.

वियतनाम: इस देश की सरकार और स्टेट बैंक बिटकॉइन को इन्वेस्टमेंट के तौर पर रेग्यूलेट नहीं करते हैं, लेकिन वे बिटकॉइन को एक वैध पेमेंट मैथड के रूप में भी स्वीकार नहीं करते हैं.

अब अगर हम बात करें अपने देश की तो, क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत का रुख हमेशा से ही अधिक उदार नहीं रहा है. भारत में सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल, 2018 में अपने एक फैसले में क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाया था. फिर, 2 साल बाद, मार्च 2020 में एक निर्णायक फैसले में तीन-न्यायाधीशों वाली बेंच, जिसमें जस्टिस रोहिंटन नरीमन, अनिरुद्ध बोस और वी रामासुब्रमण्यन शामिल थे, ने RBI के आदेश को "असंवैधानिक" करार देते हुए पहले के आदेश को खारिज कर दिया, और साथ ही बैन भी हटा दिया.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास बार-बार इसके लेकर आगाह करते रहे हैं. RBI गवर्नर ने मई के आखरी हफ्ते में कहा था, "यह कुछ ऐसा है जिसकी कोई वैल्यू नहीं है. आप इसे कैसे रेग्यूलेट करते हैं, इस पर बड़े सवाल हैं. हमारा रुख बिल्कुल साफ है, यह भारत की मौद्रिक, वित्तीय और वृहद आर्थिक स्थिरता को गंभीर रूप से कमजोर करेगा."

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर इससे पहले बीते साल नवंबर में भी चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी ने RBI के लिए 'गंभीर चिंता' पैदा की है. शक्तिकांत दास ने तब ये भी कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेशकों की संख्या को बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है.

Budget 2022 में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि वर्चुअल असेट्स (क्रिप्टोकरेंसी आदि) पर 30 फीसदी टैक्स लगाया गया है. इसके अलावा वर्चुअल असेट्स के ट्रांसफर पर 1 फीसदी TDS भी लगेगा.

रिजर्व बैंक की चिंता के बावजूद देश में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर लोगों में क्रेज बढ़ता जा रहा है. क्रिप्टोकरेंसी में निवेश बढ़ने से बीते साल के अगस्त महीने में CoinDCX यूनिकॉर्न बन गया था. और इसके बाद अक्टूबर में CoinSwitch Kuber ने यूनिकॉर्न क्लब में एंट्री मारी थी.

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