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उत्तर प्रदेश में बीजेपी नेता को जेल भेजने वाली महिला पुलिस अफसर का ट्रांसफर

श्रेष्ठा ठाकुर को बुलंदशहर से भेजा गया बहराइच। कहीं ये ईमानदारी की सज़ा तो नहीं?

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3rd Jul 2017
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कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक महिला पुलिस अफसर श्रेष्ठा ठाकुर ने बिना कागज गाड़ी चलाने पर बीजेपी नेता का चालान कर दिया था। उस नेता ने बाद में उनके साथ अभद्रता भी की थी जिस वजह से उसे जेल भेज दिया गया था। पुलिस अफसर की इस 'गुस्ताखी' पर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने उन्हें ट्रांसफर कर दिया है। श्रेष्ठा को बुलंदशहर से बहराइच भेजा गया है। बहराइच नेपाल की सीमा से जुड़ा हुआ जिला है।

श्रेष्ठा ठाकुर। फोटो साभार: सोशल मीडिया

श्रेष्ठा ठाकुर। फोटो साभार: सोशल मीडिया


अब श्रेष्ठा सिंह का ट्रांसफर किए जाने का मुद्दा भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोगों का मानना है कि श्रेष्ठा को बीजेपी नेताओं के साथ की गई 'गुस्ताखी' की सजा मिली है, तो कुछ की दलील है कि यह सामान्य बात है क्योंकि श्रेष्ठा के साथ पूरे 244 अफसरों का ट्रांसफर हुआ है।

अपने ट्रांसफर पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रेष्ठा ठाकुर ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है, 'चिंता करने की जरूरत नहीं है, मैं खुश हूं। मैं इसे अपने अच्छे कामों के पुरस्कार के रूप में स्वीकार कर रही हूं। आप सभी बहराइच में आमंत्रित हैं।' एक वेबसाइट से बात करते हुए श्रेष्ठा ने कहा कि उन्हें आठ महीने के अंदर ही तबादले का सामना करना पड़ा है, जबकि उनके बैच के किसी दूसरे अधिकारी का ट्रांसफर अभी नहीं हुआ है। अब श्रेष्ठा ठाकुर का ट्रांसफर किए जाने का मुद्दा भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोगों का मानना है कि श्रेष्ठा को बीजेपी नेताओं के साथ की गई 'गुस्ताखी' की सजा मिली है, तो कुछ की दलील है कि यह सामान्य बात है क्योंकि श्रेष्ठा के साथ पूरे 244 अफसरों का ट्रांसफर हुआ है। लेकिन बीजेपी नेताओं पर कार्रवाई करने के सिर्फ एक हफ्ते के भीतर तबादला होने पर सबको संदेह हो रहा है।

उस दिन क्या हुआ था श्रेष्ठा के साथ, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,

यूपी में बीजेपी नेता ने की अभद्रता, महिला पुलिस अफसर ने सिखाया सबक

श्रेष्ठा ठाकुर की फेसबुक वॉल से

श्रेष्ठा ठाकुर की फेसबुक वॉल से


यह पूरा मामला 22 जून का है, जब स्याना पुलिस थाने की सीओ श्रेष्ठा ठाकुर गाड़ियों की चेकिंग कर रही थीं। रास्ते में स्थानीय बीजेपी नेता प्रमोद लोधी बिना हेलमेट लगाए अपनी बाइक से चले जा रहे थे। उनके पास गाड़ी के पूरे कागजात भी नहीं थे। सीओ ने जब उन्हें रोककर चालान काट दिया, तो वे भड़क गए। नेता ने काफी देर तक सीओ से नोकझोक की। बात ज्यादा बढ़ने पर कार्यकर्ता की पुलिस से बहस हो गई थी। इसके बाद कई बीजेपी कार्यकर्ताओं ने महिला CO श्रेष्ठा ठाकुर से बदसलूकी की। इतना ही नहीं, जिन कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़ा था, उन्हें भी कोर्ट परिसर से छुड़ाने की कोशिश की गई। कार्यकर्ताओं और महिला CO के बीच भी जमकर बहस हुई। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि पुलिस बीजेपी से जुड़े ही लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है और ट्रैफिक नियमों के नाम पर घूसखोरी की जाती है। हालांकि सीओ ने इन आरोपों की सिरे से नकार दिया।

उस वक्त भी भीड़ से घिरीं श्रेष्ठा ने कहा था, कि एक नहीं सौ को भी बुला लाओगे तो मैं डरने वाली नहीं हूं। इस बार ट्रांसफर होने के बाद उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि जहां भी जाएगा, रौशनी लुटाएगा....किसी चराग का अपना मकां नहीं होता। वाकई श्रेष्ठा जैसी बहादुर महिला अफसर समाज में किसी चराग से कम नहीं हैं।

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