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जंप स्टार्ट स्किल फाउंडेशन के जरिए मिल रहा है गरीब महिलाओं के करियर को बूम

नम्रता भामर और राधिका मजूमदार ने रखी जंप स्टार्ट स्किल फाउंडेशन की नीव।- दे रही हैं गरीब घरेलू महिलाओं को स्किल ट्रेनिंग।- ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है जंप स्टार्ट स्किल फाउंडेशन का मक्सद।

Ashutosh khantwal
18th Nov 2015
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नम्रता भामर पेशे से फूड टेनोलॉजिस्ट हैं। उन्होंने इलैंड और भारत की कई फूड कंपनियों में लगभग आठ साल तक ऊंचे पदों पर काम किया। जिस वजह से वे कई सेक्टर्स को बहुत करीब से देख पाईं। नम्रता के मन में हमेशा यह बात चलती रहती थी कि हमारे देश की सभी महिलाएं आत्मनिर्भर बनें। महिलाएं किसी के आगे हाथ न फैलाएं। उनके पास कोई न कोई हुनर जरूर हो ताकि जरूरत पडऩे पर वे उसका प्रयोग कर पैसे कमा सकें। लेकिन यह भी सच है कि भारत में महिलाएं अधिक पढ़ी-लिखी नहीं हैं जिस वजह से वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी नहीं हैं। ज्यादातर महिलाएं गृहणियां हैं। साथ ही गरीबी भी भारत में अधिक है और जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। नम्रता का मानना है कि भारतीय महिलाओं में हुनर की कमी नहीं है। बस उस हुनर को तराशने की जरूरत है। एक दिन उन्होंने अपनी दोस्त राधिका मजूमदार को बताया कि वे घरेलू महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती हैं। राधिका ने भी उनकी इस बात पर रुचि जाहिर की और उनके साथ काम करने का मन बना लिया।

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राधिका को शिक्षा के क्षेत्र में 11 साल का लंबा अनुभव है। वे स्कूल में प्रधानाचार्य भी रह चुकी हैं और इस दौरान उन्होंने काफी अनुभव हासिल किया। राधिका को मालूम है कि एडमिनिस्ट्रेशन और मैनेजमेंट को किस प्रकार हैंडिल किया जाता है। फिर नम्रता व राधिका ने जंप स्टार्ट स्किल फाउंडेशन की नीव रख दी। इस कंपनी का मुख्य मक्सद गरीब औरतों का स्किल डेवलपमेंट करना, उन्हें रोजगार दिलाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

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नम्रता और राधिका मानती हैं कि एक महिला का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना उसके परिवार को तो फायदा पहुंचाता ही है साथ ही यह उस महिला में आत्मविश्वास को भी भर देता है। कहीं न कहीं यह परिवार के साथ-साथ समाज और देश के लिए भी अच्छा संकेत है।

यह कार्यक्रम 18 साल से 50 साल तक की महिलाओं के लिए है। इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए महिलाओं को कम से कम 10वीं पास होना जरूरी है। जंप स्टार्ट में ज्यादातर वही महिलाएं आती हैं जो गरीब हैं या फिर वे उपेक्षित हैं। कई तलाशशुदा महिलाएं भी हैं तो कुछ विधवा व एकल जीवन जी रही महिलाएं भी इनके पास आती हैं।

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जंप स्टार्ट फाउंडेशन कई सेक्टर्स में यह जानने की कोशिश करता है कि उन्हें अपनी इंडस्ट्री में किस प्रकार के लोगों की जरूरत है। उनकी जरूरत को जानकर ही यह लोग अपने स्किल कार्यक्रमों के लिए स्लेबस तैयार करते हैं ताकि इन कोर्सेज को करने के बाद महिलाओं को अच्छी जगह रोजगार मिल सके।

अभी जंप स्टार्ट फाउंडेशन के पास दो क्लास रूम हैं। एक कंप्यूटर लैब है और नौ ट्रेनर हैं। एक कोर्स की अवधि लगभग 18 सप्ताह है और इन कोर्सेज के लिए रजिस्ट्रेशन फीस 500 रुपए है। यहां अंग्रेजी बोलना, कंप्यूटर स्किल, इमेज इंहैंसमेंट और ग्रूमिंग, व्यक्तित्व विकास व लीडरशिप और सूपरवाइज़री हुनर को निखारा जाता है। इन कोर्सेज के जरिए महिलाएं बतौर रिसेप्सनिस्ट, पर्सनल असिस्टेंट, सेकेट्री, एचआर-एडमिन वर्क, अकाउंट एज्जीक्यूटिव, कस्टर्म सर्विस एज्जीक्यूटिव, स्टोर सूपरवाइज़र, स्टोरमैनेजर आदि के पद के लिए खुद को तैयार कर पाती हैं।

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इसके अलावा यह लोग महिलाओं को कानूनी अधिकार, सेहत संबंधी जानकारी और आत्मसुरक्षा के लिए भी तैयार करते हैं। फिलहाल यह लोग अनुदान से प्राप्त राशि से ही अपने इस कार्यक्रम को चला रहे हैं। लेकिन आने वाले समय में यह लोग कंपनियों से टाईअप करना चाहते हैं और अपने काम के विस्तार के लिए निवेशकों की तलाश कर रहे हैं। एक बैच को चलाने में इन्हें लगभग सवा लाख रुपए लगते हैं।

जंप स्टार्ट ने बडोदरा में कई छोटे और मध्यम स्तर के एंटरप्राइजेज के साथ समझौता किया है। अभी जंप स्टार्ट स्किल फाउंडेशन अपना चौथा बैच चला रहा है और अब तक इनके द्वारा तैयार की गई महिलाओं में औसतन 90 से 95 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।

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नम्रता बताती हैं कि जंप स्टार्ट को इस समय केवल पैसा जुटाने में ही दिक्कत आ रही है। बाकी सभी काम बहुत सुचारु रूप से चल रहे हैं। जंप स्टार्ट अब गुजरात की अन्य जगहों पर भी अपनी पहुंच बनाना चाहता है। नम्रता बताती हैं कि हम वन स्टॉप सल्यूशन बनना चाहते हैं ताकि कोई महिला हमारे पास आए और उसे ट्रेनिंग के बाद रोजगार मिल जाए।


लेखिका-स्निग्धा सिन्हा

अनुवादक-आशुतोष खंतवाल

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