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आॅनलाइन खरीदी-बिक्री को आसान बनाती शॉपलिस्ट

इंफोसिस के साथ कई वर्षों का अनुभव रखने वाले चार व्यक्तियों के दिमाग की उपज शॉपलिस्ट एक ऐसा मंच है, जो आॅनलाइन खरीददारी के दौरान उपभोक्ताओं के सामने आने वाली दिक्कतों को दूर करने के इरादे से किया तैयार किया गया है। 

31st Oct 2015
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आज के समय में बाजार में आॅनलाइन खरीददारी के लिये नित-नए एप्स और ई-स्टोर की आमद होती जा रही है और उनकी संख्या में निरंतर वृद्धि होती जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने विकल्पों का ढेर सा लगता जा रहा है। लेकिन एक उपभोक्ता के रूप में विभिन्न एप्प और वेबसाइटों के माध्यम से अनगिनत टैब और आॅनलाइन शाॅप को खोजना एक काफी दुष्कर और समय लेने वाली प्रक्रिया है। अधिकतर डिजिटल खरीददारों के सामने विभिन्न एप्स के माध्यम से तलाशे गए उत्पादों को खरीदने में सामने बारम्बार आने वाली दिक्कतों से मुक्ति दिलवाने के इरादे से इंफोसिस के चार पूर्व कर्मचारियों ने शाॅपेलिस्ट (Shopalyst) को तैयार किया।

शाॅपेलिस्ट के सहसंस्थापकों में से एक गिरीश रामचंद्र बताते हैं, ‘‘हमारा इस काम को शुरू करने के पीछे कोई विशेष कारण नहीं था लेकिन हमारे मन में सिर्फ एक विचार था कि हमें डिजिटल खरीददारी को सिर्फ आसान और सर्वव्यापी बनाना है।’’ वर्ष 2014 में अस्तित्व में अपने वाली शाॅपेलिस्ट ने ‘शाॅपलिस्ट’ नामक एक मंच तैयार किया जिसमें प्रकाशक और डवलपर्स चित्र, वीडियो, पोस्ट, चैट, लिस्ट, समाचार और सोशल शेयर सहित कई अन्य सामग्रियों की खरीददारी के लिये प्रेरित करने के लिये आसानी से एक एप्प बाय बटन जोड़ सकते हैं।

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उपभोक्ताओं और दुकानदारों की मदद का कार्य

गिरीश का कहना है कि इसकी मदद से न सिर्फ उपभोक्ता को कोई भी उत्पाद आॅनलाइन खरीदने में सहूलियत होती है बल्कि यह आॅनलाइन खुदरा विक्रेताओं को भी अपनी पहुंच के विस्तार करते हुए उन्हें सीधे लोकप्रिय एप्स के माध्यम से अपने उत्पाद बेचने में मदद करता है। गिरीश कहते हैं, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपभोक्ता भी एक सार्वभौमिक शाॅपिंग कार्ट की सुविधा का आनंद लेते हैं क्योंकि यह उनकी सभी पसंदीदा आॅनलाइन खरीददारी की वेबसाइटों के साथ काम करता है।’’ इसके चारों सहसंस्थापक इंफोसिस में काम करने के दौरान कई विचारों पर बड़ी गंभीरता से विचार-विमर्श कर रहे थे। गिरीश कहते हैं, ‘‘अपना संस्थान प्रारंभ करने से पहले मैं इंफोसिस के साथ वाइस प्रेसिडेंट के रूप में कार्यरत था और मैं उपभोक्ता खुदरा के क्षेत्र में आधारित कई उत्पादों के व्यापार के सफल निर्माण में भागीदारी निभा चुका था। मेरे सहसंस्थापक इंफोसिस की मेरी टीम में ही प्रौद्योगिकी, डेटा साईंस और यूज़र एक्सपीरिएंस के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।’’

वे आगे कहते हैं कि उनके द्वारा किये गए कार्य ने नाॅर्डस्टाॅर्म, टार्गेट, सीयर्स, एडिडास और वेटराॅस सहित दुनिया के कुछ सर्वश्रेष्ठ ई-काॅमर्स खिलाडि़यों की ताकत में इजाफा किया है। उनका कहना है कि वैश्विक मान्यता के अलावा उनके इनोवेशन को गार्नर, फोरेस्टर, एमआईटी टेक रिव्यू, बिजनेस वीक और फास्ट कंपनी सहित कई अन्यों के द्वारा उद्धृत भी किया गया है।

शाॅर्टलिस्ट की तकनीकी कार्यप्रणाली

इस टीम ने हाल ही में अपना बीटा प्रोग्राम बाजार में उतारा और इनका दावा है कि इन्हें बाजार से एक बेहतरीन प्रतिक्रिया मिली है। गिरीश का कहना है कि भारत की 20 शीर्ष ई-काॅमर्स वेबसाइटों के एकीकरण के साथ इनकी उत्पाद सूची में 10 मिलियन से भी अधिक एसकेयू हैं जिन्हें तुरंत किसी भी एप्प के माध्यम से खरीदा जा सकता है। गिरीश कहते हैं, ‘‘हमारे मंच को प्रारंभ में ही अपनाने वालों में समाचार साइट, चैट, मनोरंजन और लाइफस्टाइल एप्प, ब्रांड मीडिया, ब्लाॅग और फैशन एग्रीगेशन एप्स शामिल हैं।’’

जब भी कोई उपभोक्ता किसी विशेष फैशन ट्रेंड के बारे में पढ़ रहा होता है तो उसके सामने पेज पर उत्पाद को खरीदने का एक विकल्प मौजूद होता है। खरीदो या बाय के बटन पर क्लिक करते ही शार्टलिस्ट उस विशेष सामग्री से संबंधित खुदरा विक्रेताओं के उत्पाद प्रस्तुत कर देता है।

यह मंच किसी भी एप्प या डिवाइस पर उत्पाद की खोज और खरीद को आसान करने के उद्देश्य से अपने साथ जुड़ी सभी ई-काॅमर्स वेबसाइटों से उत्पाद से संबंधित जानकारी को समायोजित करता है। बड़ी मात्रा के डाटा और गतिमान प्रकृति के मद्देनजर ये मशीन लर्निंग द्वारा समर्थित एक व्यापाक समानांतर डाटा प्रोसेसिंग आर्किटेक्चर का प्रयोग करते हैं। गिरीश कहते हैं, ‘‘हमारा यूनिवर्सल शाॅपिंग एपीआई अपने मंच और उसके आसपास कैचिंग के कई स्तरों के साथ कम विलंबता और बड़े पैमाने पर स्केलेबल ई-काॅमर्स सेवाओं कोे एक प्रोग्रामेटिक एक्सेस के लिये सक्षम बनाता है।’’

निवेश और विस्तार

यह टीम बहुत तेजी से अपने कैटालाॅग में नित नई श्रेणियों और ई-काॅमर्स वेबसाइटों को जोड़ने के साथ अपने पार्टनर नेटवर्क में और अधिक डेवलपर्स और प्रकाशकों को साथ लाने के प्रयास कर रहा है। एक तकनीकी कंपनी होने के चलते यह कंपनी अपने क्षेत्र में गहन विशेषज्ञता को अतिरिक्त महत्व देती है। यह टीम मुख्यतः तकनीकी क्षेत्र में कुशलता रखने वाले लोगों की तलाश में रहती है और अधिकतर मौकों पर विश्लेषणात्मक या प्रोग्रामिंग चुनौतियों के माध्यम से संभावित साथियों के काम का मूल्यांकन करती है। गिरीश कहते हैं कि वे लोग ऐसे लोगों को अपनी टीम का सदस्य बनाते हैं जो उनके मिशन में विश्वास करते हैं और टीम में जुड़ने के बाद अपने साथ ऊर्जा और जुनून का संचार लाने के प्रति जागरुक होते हैं।

 शाॅपेलिस्ट ने कालारी कैपिटल से दो मिलियन अमरीकी डाॅलर का ए सीरीज का निवेश पाने में सफलता पाई है। यह टीम इस निवेश का उपयोग भौगोलिक स्तर पर विस्तार करते हुए अपने उपभोक्ता आधार को बढ़ाने में करने का इरादा रखती है। वर्तमान में शाॅर्टलिस्ट फैशन और सौंदर्य के क्षेत्र में क्रियशील है और जल्द ही ये कई अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार करना चाहते हैं।

योरस्टोरी का निष्कर्ष

भारत में डिस्कवरी काॅमर्स बहुत तेजी से अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हो रहा है। इनमोबी ने हाल ही में पेटीएम और अमेजन के साथ हाथ मिलाते हुए अपने एक डी-काॅमर्स मंच एमआईआईपी (डपपच्) को लाने की घोषणा की है। इस टीम का मानना है कि नए उत्पादों की खोज में से करीब 80 प्रतिशत एमआईआईपी के माध्यम से सफल होंगी।

उम्मीद है कि वर्ष 2020 तक करीब 650 मिलियन लोग आॅनलाइन होंगे और भारत में मोबाइल फोन के बढ़ते हुए प्रयोग के मद्देनजर इनमें से अधिकतर मोबाइल के माध्यम से आॅनलाइन आएंगे। गूगल पर होने वाली सर्च क्वेरीज़ में से 60 प्रतिशत मोबाइल फोन के माध्यम से होती हैं। इसके अलावा फ्लिपकार्ट जैसे आॅनलाइन खिलाडि़यों के 70 प्रतिशत से भी अधिक लेनदेन मोबाइल फोन के माध्यम से होते हैं।

एशिया पैसिफिक की एक रिपोर्ट के अनुसार अगले पांच वर्षों में बिकने वाले स्मार्टफोन में से 80 प्रतिशत के खरीददार एशिया पैसिफिक, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के देशों से होंगे। और दुनियाभर में कुल मिलाकर स्मार्टफोन की संख्या में 3.5 बिलियन से भी अधिक की बढ़ोत्तरी होने की सभावना है। इसके अलावा वर्ष 2020 तक इस पारिस्थितिकीतंत्र में प्राप्त होने वाला राजस्व 2897 बिलियन अमरीकी डाॅलर से अधिक होने की संभावना है। ये सभी रुझान इस खोज को और भी अधिक प्रासंगिक बनाते हैं।

इसके अलावा यूट्यूब, टिवट्र, गूगल, पिनट्रस्ट और फेसबुक जैसे दिग्गज भी इस एप्प आधारित खरीद के क्षेत्र पर अपनी पैनी नजरें गड़ाये बैठे हैं।

विशेषः कालारी कैपिटल याॅरस्टोरी में एक निवेशक हैं।

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