संस्करणों
विविध

चिकित्सा-सेवा सुविधाओं के क्षेत्र में नयी क्रांति लाई है प्रैक्टो ने

मरीज़ों के लिए मनपसंद डॉक्टर तक पहुंचना हुआ आसानएक लाख से ज्यादा डाक्टर और हर महीने औसत ३० हज़ार बुकिंग प्रैक्टो ने दिया है चिकित्सा-सेवा सुविधाओं को नया आयाम

15th Mar 2015
Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share

यह कहानी २००8 से शुरु होती है जब शशांक एनडी के पिताजी बीमार थे और डॉक्टरों ने कहा कि उनका ऑपरेशन करना होगा। लेकिन शशांक ऑपरेशन से पहले एक-दो और डॉक्टरों की राय लेना चाहते थे लेकिन काफी कोशिशों के बाद भी वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए। इसका मुख्य कारण एक तो समय की कमी रहा और दूसरा ऑनलाइन मेडिकल सर्विस का आभाव। इस स्थिति ने शशांक को महसूस कराया कि आज हम जिस दौर में जी रहे हैं उसमें ऑनलाइन मेडिकल सर्विस बहुत बड़ी जरूरत है। इसलिए कोई एक ऐसा डिजि़टल मंच बनाया जाए जहां मरीज़ के रिकॉर्ड हों, जहां कई तरह के विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से उपलब्ध हों और आप अपने मनपसंद डॉक्टर से मिलने का समय ले सकें। अपने इस आइडिया को शशांक ने अपने मित्र अभिनव लाल को बताया। आइडिया नया तो था ही साथ ही बहुत क्रिएटिव भी। अभिनव ने तुरंत इस दिशा में काम करने के लिए हां कह दिया। उसके बाद २००8 में ही बैंगलोर में प्रैक्टो टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना हुई। इस समय शशांक और अभिनव इंज़ीनियरिंग के फाइनल के छात्र थे। प्रैक्टो की स्थापना के बाद इस तरह की कई और कंपनियों की स्थापना हुई लेकिन बेहतरीन सर्विस और क्वालिटी के कारण प्रैक्टो उन सभी से कई आगे है।

जुलाई 2012 तक चार बिलियन डॉलर का इनवेस्ट भी कंपनी में हुआ। लेकिन अब कंपनी का लक्ष्य बीस मिलियन डॉलर तक पहुंचने का है।

image

विकास के आंकड़े -

असल में प्रैक्टो रे एक ऐसा ऑनलाइन मंच है जिसके ज़रिए अच्छे और होनहार डॉक्टरों से मरीज सीधा जुड़ सकते हैं। प्रैक्टो रे की वेवसाइट पर जाकर अपने बारे में जानकारी दीजिए और फिर डॉक्टर से संपर्क कीजिए। मतलब घर बैठे पहले डॉक्टर्स की जानकारी प्राप्त कीजिए फिर उनसे अपनी बीमारी के बारे में बताइए, और ये सब ऑनलाइन। आज प्रैक्टो रे से दस हज़ार से अधिक डॉक्टर जुड़ चुके हैं। इसके अलावा दस मिलियन से अधिक मरीज़ों का रिकॉर्ड भी यहां दर्ज है जो कि प्रतिवर्ष दोगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। साथ ही सालाना लगभग सात मिलियन लोग डॉक्टर्स से प्रैक्टो के ज़रिए अप्वाइंटमेंट लेते हैं। सिंगापुर में मार्किट शेयर के हिसाब से प्रैक्टो रे सबसे बड़ा ऑनलाइन क्लीनिक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर है और यह उपलब्धि उसने दो साल से भी कम समय में प्राप्त की है। वहीं प्रैक्टो डॉटकॉम से लगभग एक लाख डॉक्टर्स जुड़े हुए हैं। जो कि भारत के ३१० शहर और कस्बों से हैं। यहां हर महीने में तीस हज़ार से अधिक डॉक्टर्स की अप्वाइंटमेंट बुक की जाती हैं। और यह आंकड़ा चौबीस प्रतिशत हर महीने के हिसाब से बढ़ रहा है। कंपनी के मुंबई, दिल्ली, बैज्लोर, चेन्नई, हैदराबाद और पूना में सात ऑफिस हैं और एक सिंगापुर में स्थित हैं। राजस्व की बात की जाए तो क्वार्टर टू क्वार्टर इसमें पचास से सौ प्रतिशत का इजाफा हो रहा है।

राजस्व का खाका -

प्रैक्टो डॉक्टर और मरीज़ों को फ्री सर्विस देता है। लेकिन राजस्व प्राप्ति के लिए अस्पतालों व क्लीनिक द्वारा दिए गए विज्ञापनों से पैसा कमाता है।

प्रैक्टो के सफलता के राज -

प्रैक्टो की सफलता के कई कारण हैं। लगभग 85 से 90 प्रतिशत लोग प्रैक्टो की सेवाओं का इस्तेमाल कर इसके बारे में अपनी अच्छी राय रखते हैं। इसी अच्छी छवि से कंपनी की माउथ टू माउथ पब्लिसिटी हो जाती है। इससे कंपनी की लोकप्रियता में इजाफा हो रहा है।

हेल्थ केयर के क्षेत्र में भारत को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भारत के बड़े-बड़े अस्पताल भी मरीज़ के साथ उसके सारे रिकॉर्ड शेयर नहीं करते। जबकि प्रैक्टो का मुख्य मक्सद ही रिकॉर्ड को रखना व उसे शेयर करना है। जिसके कारण लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

प्रैक्टो की सफलता के मुख्य सूत्रधार प्राइवेट डॉक्टर्स हैं जो बड़ी संख्या में प्रैक्टो से जुड़े हुए हैं। चूंकि प्रैक्टो एक सास (सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस)प्रोडक्ट है इसलिए कई बार इंटरनेट में किसी भी प्रकार की दिक्कत आने पर इसकी सेवाएं बाधित हो जाती हैं। और हर जगह आप कंप्यूटर भी इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसलिए हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स के लिए प्रैक्टो ने टेबलेट कंप्यूटर निकाले हैं जिन्हें बाजार में बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

प्रैक्टो की सफलता से सीख -

प्रैक्टो की सफलता यह सीख देती है कि तरक्की पाने के लिए सबसे पहले आपकी सोच बहुत व्यापक और दूरगामी होनी चाहिए। किसी भी विकट परिस्थिति का डट कर सामना करना जरूरी है। निरंतर खुद को अपडेट करते रहना भी बहुत जरूरी है। साथ ही अपनी टीम को भी नई-नई चुनौतियों के लिए तैयार करना होता है। आपको नए लोगों को अपने साथ जोडऩा होता है जो रचनात्मक हों, कुछ नया और सकारात्मक कंपनी को दें। साथ ही कंपनी की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसा माहौल ऑफिस का बनाए रखे कि सभी कर्मचारी खुद को काफी फ्री व सहज महसूस कर सकें। कंपनी की तरक्की के लिए दिल से काम करें। यही सब बातें प्रैक्टो की तरक्की का कारण हैं।

फंड रेजि़ंग का फंडा -

फंड रेजि़ंग के लिए जो सबसे सफल तरीका प्रैक्टो ने अपनाया वह नायाब था। प्रैक्टो ने इंवेस्टर्स को यह यकीन दिलाया कि प्रैक्टो खुद को हमेशा अपडेट करता रहेगा। नई तकनीकों का सहारा लेगा और कुछ भी नया करने से नहीं हिचकेगा। यह जरूरी है कि आपका प्रोडक्ट जबरदस्त हो और आपका दृष्टिकोण सकारात्मक हो। ऐसा है तो इंवेस्टर आप पर जरूर भरोसा करेगा।

प्रैक्टो का रोड मैप -

कंपनी पेशेंट के लिए वन स्टॉप डेस्टीनेशन के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती है। पेशेंट को हर तरह की सहूलियत देना, उन्हें समझाना ही कंपनी का मक्सद है। आने वाले वर्षों में कुछ नए हेल्थ केयर उत्पाद भी कंपनी लाने की सोच रही है। साथ ही भारत के अलावा दुनिया के हर हिस्से में पहुंचने की चाह रखती है। कंपनी ने लगभग दो साल पहले भारत से बाहर अपनी पहली ब्रांच सिंगापुर में खोली। इस ब्रांच को काफी सफलता भी मिल चुकी है। इस साल के आखिर तक एक और देश तक अपनी पहुंच बनाने का लक्ष्य कंपनी का है। फिलहाल फिलिपिन्स, मलेशिया के बाजार में कंपनी अपनी संभावनाएं तलाशने की कोशिश कर रही है।

Add to
Shares
0
Comments
Share This
Add to
Shares
0
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags