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एमबीए ग्रैजुएट और सीए ने मंहगी नौकरी छोड़ साथ में शुरू किया फूलों का बिजनेस

10th Jan 2018
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जयपुर की शिवानी माहेश्वरी औचर दिल्ली की वामिका बेहती ने हरियाणा में फूलों के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिये अपनी अच्छी सैलेरी वाली नौकरियां छोड़ दीं।

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23 साल की शिवानी एमबीए ग्रैजुएट हैं और 25 साल की वामिका चार्ट्रड अकाउंटेंट हैं। दोनों ने मिलकर फूलों का व्यवसाय शुरू किया है। इन दोनों के उद्यम यूनिस्टार एग्रो को अब हरियाणा सरकार की सहायता मिलने लगी है। वामिका और शिवानी की पढ़ाई और जानकारी की वजह से ऑर्गेनिक खेती करने के लिये कई किसानों को सहायता मिल रही है।

जयपुर की शिवानी माहेश्वरी औचर दिल्ली की वामिका बेहती ने हरियाणा में फूलों के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिये अपनी अच्छी सैलेरी वाली नौकरियां छोड़ दीं। 23 साल की शिवानी एमबीए ग्रैजुएट हैं और 25 साल की वामिका चार्ट्रड अकाउंटेंट हैं। दोनों ने मिलकर फूलों का व्यवसाय शुरू किया। अपनी पढ़ाई का पूरा फायदा इन्हें इस व्यवसाय में मिल रहा है। साथ में मिल रही वामिका को उनके बिजनेसमैन पति की उपयोगी सलाह। इन दोनों के उद्यम यूनिस्टार एग्रो को अब हरियाणा सरकार की सहायता मिलने लगी है। वामिका और शिवानी की पढ़ाई और जानकारी की वजह से ऑर्गेनिक खेती करने के लिये कई किसानों को सहायता मिल रही है।

सबसे पहले 2015 में शिवानी को फूलों का व्यवसाय करने का ख्याल तब आया जब वो रोहतक-दिल्ली जाने के क्रम में पॉलीहाउस फार्मिंग नेट देखने पहुंची। वहां से कुछ तस्वीरें क्लिक कर लाईं और इस व्यवसाय पर इंटरनेट पर रिसर्च शुरू किया। फूलों के इस व्यवसाय को शुरू करने में उनका साथ दिया वामिका बेहती ने। वामिका की एक फैक्ट्री बहादुरगढ़ में है, और झजर जिले में तंडाहेरी गांव में खाली जमीन। इंडियाटाइम्स के मुताबिक यूनिस्टार एग्रो ने लिलियम, गेरबेरा, गुलाब, रजनीगंधा और ग्लेडियोलस की खेती शुरू की।

हरियाणा खास तौर पर किसानों और उनकी खेती के लिये मशहूर है, तो दोनों के लिये व्यवसाय से जुड़ी सारी चीजें खुद-ब-खुद पटरी पर आ गईं। आज इनका फूलों का व्यवसाय खूब फल-फूल रहा है। इनकी मेहनत और किसानों के फायदों को देखते हुए सरकार ने इन्हें ना सिर्फ पुरस्कार दिया, बल्कि इन्हें सब्सिडी और इनसेनटिव बी देना शुरू कर दिया। वामिका और शिवानी अब अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाना चाहती हैं, और पूरे देश के किसानों को इससे पायदा पहुंचाना चाहती हैं। और मौका मिला तो विदेशों तक अपने कारोबार को फैलाना चाहती हैं।

भारत में हर साल तकरीबन 30 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ फ्लोरिकल्चर 2015 तक में 8000 करोड़ तक का व्यवसाय कर रहा था। जो अब और तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में वामिका और शिवानी की पहले ने किसानों की मदद तो की ही है, साथ ही आगे अंतर्राष्ट्रीय लेवल पर बेहतर करने के सपने भी देखती हैं। 

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