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...क्योंकि ये 'Free Kaa Maal' है...

Sahil
24th Jun 2015
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2 लाख यूजर और 45 लाख मंथली ट्रैफिक...

सालभर में एक ब्लॉग से वेब पोर्टल तक का सफर...

17 लोगों की शानदार टीम...

2010 में हुई शुरुआत...


एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले रवि कुमार ने 2009 में नोएडा के जेएसएस एकेडमी ऑफ टेक्निकल एजुकेशन से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने एक साल तक वेब डेवलपर के रूप में काम किया और मुंबई के NITIE से एमबीए कोर्स में दाखिला भी लिया। 2010 का साल था और भारत में ई-कॉमर्स अपनी ऊंचाई पर था। इसी दौरान रवि ने ई-कॉमर्स से जुड़े सेकेंडरी इंडस्ट्री यानी डील्स और कूपंस के शानदार भविष्य को पहचाना। और इस तरह से FreeKaaMaal अस्तित्व में आया। इस क्षेत्र में CashKaro, CouponRani और इनके जैसे दूसरे प्लेयर्स से तगड़ी प्रतिस्पर्धा थी। आइए रवि से जानते हैं कि कैसे उन्होंने इस प्रतिस्पर्धा से पार पाकर अपनी कामयाबी की दास्तां लिखी...

YS- आपने ये यात्रा कैसे शुरू की?

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रवि कुमार- मेरी हमेशा से ये इच्छा रही कि मैं कुछ अपना करूं। इसके लिए कॉलेज के दिन बेस्ट होते हैं क्योंकि उस समय न आप पर कोई दबाव होता है और सबसे अहम बात ये है कि आपके पास खोने के लिए भी कुछ नहीं होता है। 2010 में ई-कॉमर्स बूम कर रहा था और हर कोई डेली डील्स और ग्रुप बाइंग साइट्स के बारे में बात कर रहा था। उस समय मैंने कम कीमत वाले डील्स, ऑफर्स और अपने पाठकों के लिए मुफ्त की सामग्री मुहैया कराने के मकसद से FreeKaaMaal.com शुरू किया। एक ऐसी वेबसाइट जो 1500 रुपये के निवेश के साथ एक सामान्य ब्लॉग के साथ शुरू हुई और साल भर के भीतर ही वो एक बड़े पोर्टल के रूप में विकसित हो गई और रोजाना 50,000+ यूजर्स को सेवा देने लगी।

एमबीए के फाइनल ईयर के दौरान मेरा गाती लिमिटेड में एससीएम कंस्लटेंट के रूप में सलेक्शन हुआ मगर मैंने ज्वॉइनिंग का इरादा छोड़ दिया. एक आकर्षक कॉर्पोरेट ऑफर को छोड़ने के बाद मैंने अपना एमबीए पूरा किया. 2 मई 2012 को मैंने ग्रेटिका लैब्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की अपनी कंपनी शुरू की और कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी.

YS- बिजनेस मॉडल कैसे विकसित हुआ?

रवि कुमार- फिलहाल हमारे पास 17 प्रतिभाशाली लोगों की एक टीम है जो ऑपरेशन से लेकर मार्केटिंग तक हर काम संभालती है। टीम में आइडिया, मॉन्सटर्स जैसे विभिन्न एमएनसी के प्रोफेशनल और आईआईटी, डीसीई जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के ग्रेजुएट शामिल हैं।

FreeKaaMaal.com की नींव उस समय रखी गई जब भारत में हर कोई ई-कॉमर्स की बात कर रहा था, मगर ई-कॉमर्स से इतर एक सेकेंडरी इंडस्ट्री भी थी- डील्स और कूपंस की। शुरुआत में FreeKaaMaal.com का उद्देश्य FMCG कंपनियों की तरफ से चलाए जा रहे फ्री सैंपलिंग कैंपेन के बारे में सिर्फ सूचना देना था। मगर ई-कॉमर्स के बूम के साथ ही हमने कम कीमत वाले डील्स और कूपन्स की भी जानकारी देना शुरू कर दिये। हमारा मॉडल कलेक्टिव इंटेलिजेंस के सिद्धांतों पर काम करता है जहां दूसरे शॉपर्स हमारे साथ डील्स शेयर करते हैं और हम उनमें से बेस्ट डील को सेलेक्ट कर उसे होमपेज पर प्रमोट करते हैं।

आज, FreeKaaMaal.com साढ़े तीन साल का हो चुका है और यहां औसतन 45 लाख विजिटर हर महीने विजिट करते हैं।


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YS- भारत में ई-कॉमर्स स्पेस के बारे में आप क्या सोचते हैं?

रवि कुमार- पिछले कुछ सालों में भारत में ई-कॉमर्स मार्केट ने तेज विकास दर्ज किया है। फिलहाल भारत में 11% इंटरनेट यूजर्स हैं मगर आने वाले समय में इनकी तादाद तेजी से बढ़ेगी और इसी तरह ई-कॉमर्स का मार्केट भी बढ़ेगा। कई सर्वे बताते हैं कि आने वाले तीन सालों में भारत में ई-कॉमर्स 8 अरब डॉलर की इंडस्ट्री होगी। हमारा बिजनेस मॉडल ई-कॉमर्स साइट्स के समांतर चलता है और अगर वो विकास करते हैं तो हमारा भी विकास होता है।

ग्लोबल प्लेयर्स की एंट्री के साथ ई-कॉमर्स से जुड़ी हुई मार्केटिंग इंडस्ट्री में भी विकास हो रहा है। पिछले साल अमेजॉन.इन की एंट्री के साथ हमने अपने रेवेन्यू में 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया. ग्लोबल कंपनियां एफ्लिएट मार्केंटिंग की अहमियत समझती हैं और कंपटीशन बढ़ने के साथ हर तरह की छोटी-बड़ी ई-कॉमर्स साइट्स बिक्री के इस मॉडल का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। हमारी तरह की साइट्स भी इससे सीधे-सीधे फायदा पा रही हैं।

YS- आपने कंपनी को कैसे सस्टेन रखा है?

रवि कुमार- FreeKaaMaal.com ने कभी भी इन्वेस्टर्स या परिवार वालों से पैसा इकट्ठा नहीं किया। हमने सेल्स के जरिये हो रही आमदनी को ही निवेश किया और ये समय के साथ बढ़ती रही। थोड़े ही समय में हमारा सेल प्रति दिन 5 ट्रांजेक्शन से बढ़कर 1500+ हो गया। हम पहले दिन से ही प्रॉफिट बना रहे हैं और हर महीने 45 लाख से ज्यादा हिट पा रहे हैं। इस समय हम भारत में 450+ मर्चेंट्स के साथ काम कर रहे हैं।

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