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बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता है जोड़ो का दर्द?

प्रज्ञा श्रीवास्तव
11th Aug 2017
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वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन विश्वविद्यालय के ऑर्थोपेडिक्स और स्पोर्ट्स मेडिसिन डिपार्टमेंट की तरफ से ये शोध अमेरिका के 45 शहरों में किया गया। कुछ लोगों को तो जोड़ों के दर्द से अंदाजा होता है कि बारिश आने वाली है या तापमान कम होने वाला है।

<b>सांकेतिक तस्वीर</b>

सांकेतिक तस्वीर


बरसात के दिनों में या तापमान कम हो जाने पर अक्सर ही जोड़ों और कूल्हों में दर्द की समस्या जन्म लेती है। उम्र बढ़ने पर यह समस्या और ज्यादा सताती है। 

शोधकर्ता स्कॉट टेलफर के मुताबिक, हमने इस शोध में सर्च इंजन गूगल का भी इस्तेमाल किया। और बारिश के मौसम में उसके वैश्विक उपयोग का निरीक्षण किया। हमने पाया कि ऐसे में लोगों ने कूल्हे के दर्द, घुटने के दर्द, गठिया, पेट के दर्द जैसे शब्दों की काफी खोज की।

अक्सर लोगों को बारिश के मौसम में उनके जोड़ों में दर्द की शिकायत होने लगती है। बदलता मौसम लोगों के शरीर को प्रभावित करता है। ये बात अब सिर्फ बातों-बातों में नहीं रह गई है, बल्कि अमेरिका में हुआ एक शोध भी इस बात की तस्दीक करता है। वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन विश्वविद्यालय के ऑर्थोपेडिक्स और स्पोर्ट्स मेडिसिन डिपार्टमेंट की तरफ से ये शोध अमेरिका के 45 शहरों में किया गया। शोध के जरिए साफ किया गयाकि मौसम सच में लोगों के जोड़ों के दर्द को प्रभावित करता है। बरसात के दिनों में या तापमान कम हो जाने पर अक्सर ही जोड़ों और कूल्हों में दर्द की समस्या जन्म लेती है। उम्र बढ़ने पर यह समस्या और ज्यादा सताती है। कुछ लोगों को तो जोड़ों के दर्द से अंदाजा होता है कि बारिश आने वाली है या तापमान कम होने वाला है।

शोध का निष्कर्ष कैसे निकला

शोधकर्ताओं ने उच्च तापमान पर कम बारिश होने पर घुटने के दर्द को मापा और जब बारिश बंद हो गई तब भी दर्द की जांच की। निष्कर्ष निकला कि असल में बारिश के बाद उस दर्द में गिरावट आई। शोधकर्ता स्कॉट टेलफर के मुताबिक, हमने इस शोध में सर्च इंजन गूगल का भी इस्तेमाल किया। और बारिश के मौसम में उसके वैश्विक उपयोग का निरीक्षण किया। हमने पाया कि ऐसे में लोगों ने कूल्हे के दर्द, घुटने के दर्द, गठिया, पेट के दर्द जैसे शब्दों की काफी खोज की। इस डेटा के आधार में तापमान, वर्षा, सापेक्षिक आर्द्रता और बैरोमेट्रिक प्रेशर जैसे तत्व शामिल थे। रिसर्च में से उन आंकड़ों को हटा दिया गया जो अधूरे थे।

तापमान के कम-ज्यादा होने का सीधा प्रभाव

ये शोध बताता है कि मौसम के कारकों के साथ घुटनो का दर्द ही नहीं बल्कि कूल्हे के दर्द के साथ भी सीधा संबंध है। मौसम जोड़ों में गठिया को सीधा प्रभावित करता है। सामान्य मौसम में जब तापमान अधिक न हो उस समय में घुटने और कूल्हे-दर्द की खोज बढ़ती है। बारिश में होने वाले संक्रमणों से लोगों में पेट और हाजमे से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। बारिश अपने साथ तमाम बीमारियों के कारकों को भी लाती है। साथ ही उस वक्त होने वाली नमी और ठंड से हड्डियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे मौसम में हड्डी रोगों और पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए।

क्या मायने हैं इस शोध के?

आपको बता दें कि ये पूरा रिसर्च हाल ही में अमेरिका की जाने-माने जरनल प्लॉस वन में प्रकाशित किया गया है। इस शोध के निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए पूरी टीम ने अमेरिका के सबसे घनी आबादी वाले शहरों को चिन्हित किया और चार सालों तक लोगों के जोड़ों वालों दर्द का माप लिया। एक शोधकर्ता के मुताबिक, लोगों को ये कहते तो सुना जाता है कि बारिश के वक्त उनक आर्थराइटिस वाली समस्या कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन अब तक इस विषय पर निर्णायक स्टडी नहीं हुई थी। चिकित्सकों का मानना था कि ऐसा होता तो है। पर इसकी वजह, इसकी सही माप और इसके अलग-अलग तापमान पर बढ़ने घटने वाले असर के बारे में एकदम सटीक रिसर्ट नहीं थी। हमारी ये रिसर्च इन सब बातों को एक जगह दिखाती है।'

पढ़ें: महिलाओं के पास होता है पुरुषों से तेज दिमाग

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