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ई-वॉलेट का इस्तेमाल हुआ और सुरक्षित, RBI ने कड़े किए नियम

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13th Oct 2017
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आरबीआई ने वॉलेट में ट्रांसफर की जाने वाली रकम की ऊपरी सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी है। इसमें अब फॉरेन करेंसी में 50,000 रुपये तक की रकम ली जा सकेगी। 

सांकेतिक तस्वीर  (फोटो साभार- लाइवमिंट)

सांकेतिक तस्वीर  (फोटो साभार- लाइवमिंट)


नए नियमों के मुताबिक, अब पेमेंट कंपनियों को आरबीआई ऑथराइजेशन मिलने के बाद तीन साल के भीतर उसको 15 करोड़ रुपये तक ले जाना होगा।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने भारत में ई-वॉलेट यूजर्स के लिए कई कड़े प्रावधान कर दिए हैं। इससे अब इसका इस्तेमाल करना और भी सुरक्षित हो गया है। इसके साथ ही अब ग्राहकों को दो अलग-अलग ई-वॉलेट के बीच पैसों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा। लेकिन ई-वॉलेट कंपनियों का मानना है कि इससे उनके बिजनेस पर असर पड़ेगा क्योंकि केवाईसी जैसी सुविधा को और जटिल बना दिया गया है। अब ग्राहकों को बैंकों की तरह ही केवाईसी करनी होगी। अभी वॉलेट का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को इस साल के अंत तक फुल केवाईसी फॉर्मेट में कन्वर्ट होना पड़ेगा।

मार्केट में बिजनेस करने वाली वॉलेट कंपनियों का मानना है कि कस्टमर की पहचान (KYC) के लिए हाल ही में घोषित नॉर्म्स से कड़े कॉम्पिटिशन वाले मार्केट में बिजनस करने की उनकी लागत बढ़ जाएगी। पेयू इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर, जितेन्द्र गुप्ता ने ईटी से बात करते हुए कहा, 'इससे पेमेंट के लिए वॉलिट के विकल्प का आइडिया नष्ट हो जाएगा और कस्टमर्स बैंक एकाउंट का ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं।' आरबीआई ने इस स्पेस के प्लेयर्स के लिए नेटवर्थ की जरूरत भी बढ़ा दी है। पीपीआई लाइसेंस के लिए कंपनियों के पास एप्लिकेशन के समय पांच करोड़ रुपये की पॉजिटिव नेटवर्थ होना चाहिए। पहले मिनिमम सिर्फ दो करोड़ रुपये की नेटवर्थ की जरूरत थी।

आरबीआई ने कहा है कि मिनिमम केवाईसी वॉलेट में 10,000 रुपये से ज्यादा बैलेंस नहीं रखा जा सकता। उस पैसे का इस्तेमाल सामान और सेवाओं की खरीदारी में किया जा सकता है। उसे किसी और वॉलेट या बैंक में ट्रांसफर भी नहीं किया जा सकता। आरबीआई ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स ऑफर करने वाली कंपनियों के लिए शुरुआती पॉजिटिव नेटवर्थ बुधवार को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी थी। इसके साथ ही ऑथराइजेशन मिलने की तारीख से अगले तीन फाइनेंशियल ईयर के अंदर इन कंपनियों को नेटवर्थ 15 करोड़ रुपये करनी होगी।

पेमेंट प्लेयर्स की इंडस्ट्री बॉडी पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन नवीन सूर्या ने कहा, 'वॉलेट्स को फुल केवाईसी में बदलने के लिए 12 महीने का वक्त दिया गया है। उनके पास कस्टमर्स को इसके लिए राजी करने के लिए पर्याप्त समय है। मुझे भरोसा है कि मोबाइल नंबर्स का केवाईसी डेडलाइन तक कंपलीट हो सकता है और आधार कनेक्शन बेहतर हो सकता है। इससे केवाईसी फॉर्मेलिटी पूरा करने में आसानी होगी।' जिस वॉलेट अकाउंट का फुल केवाईसी होगा, उसी में अधिकतम एक लाख रुपये रखे जा सकते हैं। इसमें फंड ट्रांसफर की पूरी सुविधा होगी। वॉलेट इंडस्ट्री मिनिमम केवाईसी नॉर्म्स पर जोर दे रही थी, लेकिन आरबीआई के गाइडलाइंस से लगता है कि पेमेंट स्पेस में सिर्फ बड़े और गंभीर कंपनियां आ सकेंगी।

नए नियमों के मुताबिक, अब पेमेंट कंपनियों को आरबीआई ऑथराइजेशन मिलने के बाद तीन साल के भीतर उसको 15 करोड़ रुपये तक ले जाना होगा। पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने कहा, 'वॉलेट के लिए ज्यादा पॉजिटिव नेटवर्थ जरूरी थी क्योंकि आरबीआई वॉलेट्स को सीरियस फाइनेंशियल सर्विसेज सेगमेंट मान रहा है। अगर पैसा एक कंपनी के वॉलेट से दूसरी कंपनी के वॉलेट में भेजा जाएगा तो उसे ऐसे ट्रांजैक्शंस को सपोर्ट देने के लिए ज्यादा पूंजी की जरूरत होगी।' आरबीआई ने वॉलेट में ट्रांसफर की जाने वाली रकम की ऊपरी सीमा बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी है। इसमें अब फॉरेन करेंसी में 50,000 रुपये तक की रकम ली जा सकेगी।

यह भी पढ़ें: भारतीय सेना के रौबीले ऑफिसर कुलमीत कैसे बने एडोब इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर

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