बहाना खेल का, सीख पढ़ाई की, 'Skidos'

By Bhagwant Singh Chilawal
July 06, 2015, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:20:58 GMT+0000
बहाना खेल का, सीख पढ़ाई की, 'Skidos'
Skidos कैसे बच्चों को गेम के द्वारा सीखने में मदद कर रहा है?
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बच्चों को पढ़ाना सबसे मुश्किल काम है| किताबों से लेकर खिलौनों तक, अलग-अलग सिखाने के तरीके हैं| आदित्य प्रकाश ने जब सीखने के स्वरूप को जाना तो उनका नजरिया बदल गया और उन्होंने इसे खेल के रूप में ढाल दिया| उन्होंने 2010 में खेल-आधारित शिक्षा को लागू करने के लिए अपनी कंपनी स्किदोस(skidos) का शुभारंभ किया|

स्किदोस(skidos) आदित्य प्रकाश और राजदीप सेठी ने शुरू की| दोनों इंडियन स्कूल बिज़नस(ISB) में साथ में पढ़ते थे| ISB से शिक्षा लेने के बाद, आदित्य ने एयरटेल के लिए काम किया| भारत में आई फ़ोन कों उतरने वाली टीम का भी नेतृत्व भी किया| इसके बाद उन्होंने एचटी मोबाइल के लिए, मोबाइल VAS पर काम किया| राजदीप सेठी सीरियल व्यवसायी है, जिन्होंने विटामिन वाटर ब्रैंड ‘प्रो-वी’ लॉन्च किया और स्किदो शुरू करने से पहले कंपनी हेक्टर बेवरेजेज को बेच दी|

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स्किदोस के बारे में बताते हुए आदित्य कहते हैं, “अधिकतर स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए कंप्यूटर क्लास का कोई महत्व नहीं है| तब हमारे दिमाग में खेल आधारित शिक्षा का विचार आया| हमने एनसीआर(NCR) के बहुत से स्कूलों में कंप्यूटर क्लास के बदले इसे शुरू करवाया| हलाकि, सोफ्टवेयर को स्कूलों को बेचना एक चुनौती थी और इसके सफलता की दर भी कम थी| फिर हमने इसे सीधे मोबाइल के माध्यम से उपभोक्ता तक पहुँचने का निर्णय लिया| ”

शुरुआत में इन्होंने स्कूलों के लिए 150 गेम बनाये, जो 3 से 12 साल के बच्चों के लिए थे| धीरे-धीरे गेम की गुणवत्ता को बेहतर किया| गेम जांचें और बच्चों के पसंद के थे जिसमे बच्चें प्रतिक्रिया भी दे सकते थे| आदित्य कहते हैं, “हमारा दृष्टिकोण गेम खेलने और उससे सीखने के बीच में संतुलन बनाने का हैं| जिससे लगातार बच्चों में उत्सुकता बनी रहें| हमारे अनुभवों ने हमें अच्छे गेम बनाने और सीखाने वाले उत्पाद की समझ पैदा की| हम अपने गेम डिज़ाइनर, बच्चों और अध्यापक के साथ बैठ कर इस संतुलन कों सुनिश्चित करतें हैं|”


इस ऐप की प्रतिक्रिया सराहनीय है| बहुत से लोग इसे अपना रहे हैं| 30 प्रतिशत लोग इस ऐप का उपयोग कर रहे हैं| जिसमें से 10 प्रतिशत लोग प्रतिदिन लगभग 5 मिनट इस पर बिताते हैं| भारत में केवल 5 प्रतिशत लोग ही इसे उपयोग कर रहे हैं| अमेरिका और यूरोप के लोग इसका ज्यादा इस्तमाल कर रहे हैं| आदित्य कहते हैं, “भविष्य में हम अपने इस ब्रैंड को बहुत आगे ले जाना चाहतें हैं और इसे बच्चों के लिए सीखने और मनोरंजन का सबसे बेहतर ब्रैंड बनाना चाहतें हैं|”

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