संस्करणों
प्रेरणा

‘स्लम क्रिकेट लीग’ से पूरा होता दिल्ली के गरीब बच्चों का ख्‍़वाब

30th Oct 2015
Add to
Shares
5
Comments
Share This
Add to
Shares
5
Comments
Share

गरीब बच्चों को नशे और अपराध के रास्ते पर जाने से रोकने के उद्देश्य के लिए शुरू हुई लीग...

दक्षिण दिल्ली के बाद उत्तर, पश्चिम, पूर्व और मध्य दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले बच्चोंं के लिए आयोजित होगी लीग....


भारत में क्रिकेट को धर्म की संज्ञा दी जाती है और हर कोई क्रिकेट खेलना चाहता है। लेकिन क्रिकेट खेलने में उपयोग होने वाले महंगे सामान के कारण सही तरह से क्रिकेट खेलना गरीबों के लिए एक ख़्वाब ही रहता है। दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों के इस सपने को ‘स्लम क्रिकेट लीग’ के जरिये पूरा किया जा रहा है।

image


दिल्ली के आरकेपुरम में रहने वाले बीएस पुंडीर अकसर झु‍ग्गी –बस्तियों में रहने वाले गरीब बच्चों को इधर-उधर क्रिकेट खेलते देखा करते थे। इन बच्चों में खेलने का उत्साह था, लेकिन उनके पास खेलने की सुविधाएं नहीं थीं। उनके पास न तो ठीक बल्ला होता था और न ही सही गेंद। इनमें से कई बच्चे अच्छा क्रिकेट खेलते थे। इनको देखकर पुंडीर के मन में ख्याल आया की इन बच्चों के लिए कुछ किया जाए। गैर सरकारी संगठन सीएफसीटी इंडिया के अध्यक्ष बीएस पुंडीर ने एक दिन अपने बेटे राजेश पुंडीर से इन बच्चों को सही तरह से क्रिकेट खिलाने के बारे में चर्चा की। राजेश ने बताया कि पहले उन्होंने सोचा कि क्यों न इन बच्चों को क्रिकेट की किट दे दी जाए। फिर इस संबंध में कुछ और लोगों से बातचीत की गई जिसमें दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अंपायर एमपी नारंग भी शामिल थे। चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि सिर्फ क्रिकेट किट देने से समस्या का हल नहीं होगा। इन बच्चों के लिए हमें व्यवस्थित रूप से क्रिकेट खेलने का प्रबंधन करना पड़ेगा। इस तरह ‘स्लम क्रिकेट लीग’ के विचार का जन्म हुआ।

image


राजेश ने बताया- "सबसे पहले हमने दक्षिण दिल्ली में मौजूद झुग्गियों का रुख किया और वहां रहने वाले बच्चों और उनके माता-पिता को अपनी बात बताई। इसके बाद बच्चे हम से जुड़ते चले गए। सबसे पहले हमने दक्षिण दिल्ली की दस झुग्गियों में रहने वाले 120 बच्चों की दस टीम बनाईं और अक्तूबर के मध्य में पहली ‘स्लम क्रिकेट लीग’ कराई। इस लीग में खेलने वाले बच्चे पहले कभी पूरी किट और बड़े मैदान में नहीं खेले थे।" सिर पर हेलमेट, पैरों पर पैड और हाथों में ग्लव्स पहनकर हर बच्‍चा किसी बड़े क्रिकेटर तरह ही मैदान में उतरा। 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए आयोजित हुई इस लीग में कुसुमपुर पहाड़ी स्लम की टीम मोगली इलेवन ने मिक्की माउस इलेवन को हराकर पहला स्थान प्राप्त किया। बच्चों को मैन ऑफ द मैच, सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज और बल्लेबाजो को भी पुरस्कार दिया गया। एमपी नारंग इस टूर्नामेंट के निदेशक हैं। दिसंबर में उत्तर दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाले बच्चों की लीग आयोजित कराई जाएगी। इसके बाद पश्चिम, पूर्व और मध्य दिल्ली के गरीब बच्चों की लीग कराई जाएगी।

image


राजेश के मुताबिक ‘स्लम क्रिकेट लीग’ का उद्देश्य झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को एक उम्मीद भरी और बेहतर जिन्दगी का रास्ता दिखाना है, ताकि वे नशे और अपराध के रास्ते से बच सकें और अपने जीवन की कीमत को समझ सकें। बाल मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक झुग्गियों और बस्तियों में रहने वाले गरीब बच्चे अकसर नशे और अपराध के रास्ते पर मुड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनमें आत्मविश्वास की भी कमी हो जाती है। इस तरह के आयोजन का हिस्सा बनने से वे कुछ करने के सपने देखने लगते हैं और उन्हें एक बेहतर भविष्य की उम्मीद नजर आने लगती है।

image


इसके अलावा जिन बच्चों ने इन टूर्नामेंट में अच्छा खेला है, उन्हें हम अपनी 'स्लम क्रिकेट अकादमी' में लेकर मुफ्त कोचिंग देंगे। ताकि वो इस खेल में अपना करियर बना सकें। हम चाहते हैं कि हमारी अकादमी से कुछ बच्चे राष्ट्रीेय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलें और अपने जैसे अन्य‍ बच्चों के प्रेरणा स्रोत बनें। लीग के बाद बच्चों ने बताया की यहां खेलने के बाद उनकी सोच में बड़ा परिवर्तन आया है और उनकी सोच सकारात्मक हो गई है। एक बच्चे ने बताया कि वह अब जिंदगी में कुछ बड़ा करने सोच सकता है और उसे लगता है की समाज उसके जैसे बच्चों की परवाह करता है जबकि पहले उसे लगता था की गरीब बच्चों की किसी को कोई परवाह नहीं है।

Add to
Shares
5
Comments
Share This
Add to
Shares
5
Comments
Share
Report an issue
Authors

Related Tags

Authors

Latest Stories

हमारे दैनिक समाचार पत्र के लिए साइन अप करें