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फूलों के रंग से दिल की कलम से...'मधुमिता' ने बदली उनकी अधूरी कहानी...

- 2008 में आवचयम् की औपचारिक शुरूआत मधुमिता पुरी ने की- आवचयम् पुराने फूलों से ऑरगेनिक रंगों को बनाता है- कई शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को नौकरी दे रहा है आवचयम्

18th Aug 2015
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हर प्रयास जरूरी होता है, हर आविष्कार का अपना महत्व होता है और हर हुनर की अपनी कीमत होती है। कोई भी चीज छोटी नहीं होती कहते हैं न कि जो कार्य एक सुई कर सकती है वो तलवार भी नहीं कर पाती इसलिए हमें हर कार्य का सम्मान करना चाहिए, हर हुनरबाज को उसके हुनर के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। विश्व इस समय कई दिक्कतों का सामना कर रहा है जैसे प्रदूषण, जनसंख्या वृद्धि, आंतकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण इत्यादि ऐसे में कई लोग अपनी कोशिशों से इन्हें कम करने का प्रयास कर रहे हैं इनमें से कई प्रयास बहुत छोटे स्तर पर किये जा रहे हैं तो कई वैश्विक स्तर पर हो रहे हैं। लेकिन हर प्रयास का अपना महत्व है क्योंकि वे कई और प्रयासों की नीव रखते हैं। ऐसा ही एक प्रयास किया है आवचयम् ने।

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आवचयम् एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है फूलों को इक्ट्ठा करना। 2008 में मधुमिता पुरी ने अवक्यम की शुरूआत की ये लोग दिल्ली में एक मंदिर के पड़ोस में ही एक ऑफिस से अपना काम करते हैं। मधुमिता बताती हैं कि मंदिर में हर दिन काफी फूलों की जरूरत होती है और अगले दिन वो फूल पुराने हो जाते हैं और किसी काम के नहीं रहते। उस मंदिर में भी हर दिन काफी फूल आते मंदिर प्रशासन ने एक लड़के को रखा जो प्रतिदिन उन फूलों को यमुना नदी में बहा के आता लेकिन कुछ समय बाद वो काम में सुस्ती दिखाने लगा और कई-कई दिन के फूल इक्ट्ठा करके एक साथ डालने जाता जिससे काफी बदबू आने लगती अब वहां पर काम कर रहे लोगों के पास दो ही विक्लप थे या तो वे उन फूलों को सड़ने दें और बदबू झेलें या फिर खुद साफ करें और उन्होंने खुद ही उन्हें साफ करना उचित समझा। उस दौरान मधुमती को एक आइडिया आया कि क्यों न वे उन पुराने फूलों का कुछ उपयोग करें जिससे इस समस्या का हमेशा के लिए निपटारा हो सके और फिर शुरू हुआ अवक्यम।

पुराने फूल किसी काम के नहीं होते और धीरे-धीरे उनकी खुशबू खत्म हो जाती है लेकिन आवचयम् में पुराने फूलों से डाई, विभिन्न रंग और अगरबत्तियां बनाए जाने लगी। ये रंग नैचुरल व ऑरगेनिक थे जो किसी भी तरह से पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं थे बल्कि पहले जहां उन फूलों को पानी में डालकर जल प्रदूषण हो रहा था वो आवचयम् के बाद नहीं हो रहा था साथ ही कई लोगों को रोजगार मिल रहा था औऱ बाजार में इस तरह के ऑरगेनिक रंगों के आने से लोगों को सस्ता और बेहतरीन विकल्प भी मिला।

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ये लोग सबसे पहले पुराने फूल को सुखाते हैं फिर उनको अलग अलग करते हैं, काटते हैं और फिर पीसते हैं। इन लोगों ने 2004 से इस कार्य की शुरूआत की लेकिन पहले ये हर तरह से चेक करना चाहते थे कि पूरा प्रोसेस कॉस्ट एफिशियेंट है और क्या इसे लंबे समय तक चलाया जा सकता है वे काम में कूदने से पहले हर छोटे- बड़े पहलू को जांचना चाहते थे। लोगों को ट्रेनिंग दी गई पूरा खांचा तैयार किया गया विभिन्न टेस्ट किये गए जब सब कुछ सकारात्मक आया तो सन 2008 में आवचयम् को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया। प्रोडक्शन इस तरह से किया जाता है जिससे ये काफी सस्ता रहे और मुनाफा हो और साथ ही रंगों को सस्ते में बेचा जा सके।

रॉ मटीरियल के लिए इन लोगों को ज्यादा दिक्कत नहीं होती और आसानी से मिल जाता है। दिल्ली के विभिन्न मंदिरों और होटल्स से फूल लाये जाते हैं। त्यौहारों के समय में ये काफी ज्यादा मात्रा में मिल जाते हैं। एनवायरमेंट मिनिस्ट्री से भी इन्हें काफी मदद मिल रही है और दिल्ली हॉट और विभिन्न जगहों पर सरकारी आउटलेट्स में इनके प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे हैं।

आवचयम् काफी लोगों को नौकरी द रहा है। लगभग 85 शारीरिक औऱ मानसिक रूप से अक्षम लोग इस कार्य में लगे हुए हैं ये लोग होली के रंग व रंगोली के लिए रंग बना रहे हैं इसके अलावा 15 दृष्टिहीन लोग अगरबत्ती निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं। आवचयम् को दिल्ली के 60 मंदिरों से और 11 होटल्स से फूल मिल रहे हैं इसके अलावा 250 अन्य मंदिर और 8 होटल्स 6 अन्य एनजीओ को फूल दे रहे हैं ये सारे एनजीओ आवचयम् के साथ मिलकर ही काम करते हैं।

आवचयम् जिस मिशन में लगा है वो बहुत ही काबिलेतारीफ है एक तरफ तो ये जल प्रदूषण को रोक रहा है साथ ही लोगों को रोजगार भी दे रहा है।

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. 2014-15 में आवचयम् ने 248 टन फूलों को इक्ट्ठा किया जिनसे 5 लाख अगरबत्तियां और 15 टन रंग बनाए गए। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान तमिल नाडु और केरला के 2822 अक्षम लोगों को ट्रेनिंग दी गई जिससे वे लोग कुछ काम करके कमा सकें इस कार्य को निपोन फाउंडेशन की मदद से किया गया। इसके अलावा विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर लोगों को ट्रेन किया जा रहा है ताकि शारीरिक रूप से अक्षम लोग भी मेहनत करके और अपने हुनर के बल पर पैसा कमा सकें।

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