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धत्कर्मी बाबाओं से स्त्रियों को नफरत

23rd Sep 2017
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हाल फिलहाल बाबा राम रहीम और अलवर (राजस्थान) के जगद्गुरु कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी महाराज उर्फ शिवपूजन गौतम मिश्र की करतूतें पूरे देश-दुनिया के दिमाग में इन दिनो गूंज रही हैं। 

गुरमीत राम रहीम

गुरमीत राम रहीम


प्राचीन काल से स्त्री का शोषण सबसे ज़्यादा धर्म के माध्यम से होता आ रहा है। धर्म द्वारा निर्मित स्त्री संबंधी मिथकों का मुख्य लक्ष्य स्त्री को पुरुष के अधीन करना है।

डेरे में राम रहीम ने बिग बॉस जैसा एक गेम ऑर्गेनाइज किया। गेम में हनीप्रीत समेत छह कपल्स को एंट्री दी। गलती करने वाले को सजा के तौर पर एक कमरे में जाकर सिमरन करने का रूल बनाया। 

निवेदिता लिखती हैं- हमारे देश में धर्म के नाम पर बाबाओं ने जो धत् कर्म किए हैं, उनकी वजह से मुझे बाबाओं से नफरत हो गई है। दुनिया आधुनिकता के जिस दौर से गुजर रही है, खतरनाक धार्मिक रूढ़ियां और मान्यताएं, आज भी स्त्री का पीछा कर रही हैं, बल्कि किन्ही अर्थों में पहले से अधिक। बाजारवादी चमक-दमक और बड़बोलापन जैसी कहानी सुनाता रहे। प्राचीन काल से स्त्री का शोषण सबसे ज़्यादा धर्म के माध्यम से होता आ रहा है। धर्म द्वारा निर्मित स्त्री संबंधी मिथकों का मुख्य लक्ष्य स्त्री को पुरुष के अधीन करना है।

इस्लाम ने साढ़े चौदह सौ साल पहले स्त्री को दुनिया में आने के साथ ही अधिकारों की शुरुआत कर दी और उसे जीने का अधिकार दिया, जबकि आज सऊदी के धार्मिक नेता शेख साद अल हजारी ने कहा है कि 'महिलाएं गाड़ी नहीं चला सकतीं, क्योंकि उनके पास एक चौथाई दिमाग होता है।' अगर रोड सेफ्टी अथॉरिटी को पता चले कि किसी पुरुष में आधा दिमाग है तो क्या वो उसे ड्राइविंग लाइसेंस देंगे? नहीं। तो फिर आधे दिमाग वाली महिला को ड्राइविंग लाइसेंस कैसे मिलेगा? महिलाएं शॉपिंग करने जाती हैं तो उनका दिमाग और भी कम हो जाता है और तब उनके पास केवल एक चौथाई दिमाग ही रह जाता है।'

चर्च ऑफ़ इंग्लैंड का एक समूह अपनी दैनिक प्रार्थना के दौरान ईश्वर को 'ही' (पुरुषवाचक) के साथ ही 'शी' (स्त्रीवाचक) के रूप में भी संबोधित करने की मांग कर रहा है। ईश्वर के पुरुष या स्त्री होने का सवाल ईसाई चर्च के इतिहास जितना ही पुराना है। वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं। वेदों में स्त्रियों की शिक्षा, शील, गुण, कर्तव्य, अधिकार और सामाजिक भूमिका का सुन्दर वर्णन किया गया है, लेकिन बाबा तुलसीदास कहते हैं- ढोल, गंवार , शूद्र ,पशु, नारी, सकल ताड़ना के अधिकारी। और आज के बाबाओं ने तो हद ही कर दी है।

हाल फिलहाल बाबा राम रहीम और अलवर (राजस्थान) के जगद्गुरु कौशलेन्द्र प्रपन्नाचार्य फलाहारी महाराज उर्फ शिवपूजन गौतम मिश्र की करतूतें पूरे देश-दुनिया के दिमाग में इन दिनो गूंज रही हैं। शादीशुदा फलाहारी बाबा से शोषित बिलासपुर की एक युवती के पिता का आरोप है कि उसकी घिनौनी करतूतों से ही आजिज आकर उसके शिष्य सुदामा, वीरेंद्र, कपिल, रज्जन, नारायण, अवधेश, रामचंद्र, रामानुज दास, बेती, शुभम, मयंक, बालकृष्ण, मुकेश भारद्वाज आदि उसका साथ छोड़ चुके हैं। पुलिस फलाहारी के आश्रम की गतिविधियों के संबंध में इन दिनो पूछताछ कर रही है।

बाबा राम रहीम के संबंध में इन दिनो जैसी जानकारियां सामने आ रही हैं, उन्हीं में एक है, हनीप्रीत के पूर्व पति विश्वास गुप्ता के ताजा खुलासे। विश्वास गुप्ता ने मीडिया को बताया है कि डेरे में राम रहीम ने बिग बॉस जैसा एक गेम ऑर्गेनाइज किया। गेम में हनीप्रीत समेत छह कपल्स को एंट्री दी। गलती करने वाले को सजा के तौर पर एक कमरे में जाकर सिमरन करने का रूल बनाया। इस दौरान हनीप्रीत जानबूझकर गलतियां करती थी और राम रहीम से कमरे में जाकर मिलती थी। गुप्ता ने कहा है कि हनीप्रीत के साथ बाबा की नाजायज करतूतें उसने अपनी आंखों से देखी हैं। उसे जान की धमकी दी गई। हत्या के लिए 10 लाख की फिरौती भी एक गैंग को दी गई।

स्री अकेली हो या घर में, हर जगह उसे आज भी सामंती शोषण का शिकार होना पड़ रहा है। शास्त्रों में भी आगाह किया गया है कि मनुष्य को अपनी बहन, बेटी, भाभी, बहू पर कभी बुरी नजर नहीं डालनी चाहिए लेकिन धार्मिक कठमुल्ले उत्पीड़नकारी मूल्यों को हवा देते रहते हैं। इन्हीं सब हालात के मद्देनजर सरकार को घरेलू हिंसा विरोधी कानून बनाने पड़े हैं। इस क़ानून के तहत घरेलू हिंसा के दायरे में अनेक प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं। इसका भी भारतीय समाज पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है।

इससे जुड़े ज्यादातर मामले सामने आ ही नहीं पाते हैं। कई बार घर-परिवार के डर से, तो कई बार समाज में इज्जत खोने के डर से लोग इसे जाहिर नहीं होने देते हैं। भारत के कानून निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर ने भी समाज में स्त्रियों की स्थिति को बहुत ही करीब से अनुभव किया और उन्हें यह महसूस हुआ कि भारतीय समाज में पुरुष वर्चस्व के जड़े काफी गहरे तक धंसी हुई हैं। निवेदिता लिखती हैं- हमारे देश में धर्म के नाम पर बाबाओं ने जो धत् कर्म किए हैं, उनकी वजह से मुझे बाबाओं से नफरत हो गई है। धर्म के ठेकेदार स्त्रियों को मंदिर और मस्जिद जाने पर प्रतिबंध लगाते हैं। 

यह भी पढ़ें: राष्ट्रकवि दिनकर जन्मदिन विशेष: दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो

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