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दिल्ली सरकार ने शुरु किया 'रैन बसेरा' में मुफ्त भोजन

दिल्ली में अस्थायी रैन बसेरों को मिलाकर अभी 261 रैन बसेरे हैं। जहां तकरीबन 19 हजार बेघरों के रहने के इंतजाम हैं।

13th Dec 2016
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दिल्ली में सर्दी का प्रकोप बढ़ने के बाद भी बेघर जिस तरह रैन बसेरों से दूरी बनाए हुए हैं, इसे देखते हुए सरकार ने अब बेघरों को भोजन देने का निर्णय लिया है। यहां दिन व रात का भोजन दिया जाएगा। हालांकि अभी यह सुविधा दिल्ली के अलग-अलग इलाके में बने 10 स्थायी रैन बसेरों में ही मिलेगी। गरीब लोगों की मदद के लिए आम आदमी पार्टी सरकार आगे आई है। उसने मुफ्त खाना खिलाने की सेवा शुरू की है। पार्टी का मकसद है, कि नोटबंदी की वजह से जिन लोगों का रोजगार छिन गया है, जिनको मजदूरी नहीं मिल पा रही, दिहाड़ी नहीं मिल पा रही, ऐसे लोगों को भुखमरी से बचाया जा सके।

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दिल्ली में करीब पौने दो लाख बेघर अलग-अलग इलाकों में रहते हैं। इनमें रिक्शा व रेहड़ी पर खुले आसमान के नीचे रात बिताने वाले शामिल नहीं हैं।

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया और शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने उत्तर दिल्ली के दांडी पार्क आश्रय में जरूरतमंदो को तीन वक्त का भोजन मुहैया कराने की सुविधा शुरू की। इस पहल की शुरूआत करते हुए सिसौदिया ने कहा कि बड़े नोटों की नोटबंदी के चलते कोई भी भुखमरी का शिकार नहीं होगा। जिन केंद्रों पर इस तरह के भोजन केंद्र संचालित होंगे उनमें गीता घाट, यमुना पुश्ता, दांडी पार्क, जामा मस्जिद, सराय काले खां, निजामुद्दीन नीला गुम्बद, सराय फूस, झंडेवालान आश्रय एक, कोटला मुबारकपुर और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास फतेहपुरी शामिल हैं।

वर्तमान में रैन बसेरों में रहने वाले लोगों को मुफ्त चाय और नाश्ते की सुविधा दी जाती है। दिल्ली में अस्थायी रैन बसेरों को मिलाकर अभी 261 रैन बसेरे हैं। जहां तकरीबन 19 हजार बेघरों के रहने के इंतजाम हैं।

यहां सुबह नाश्ता, दिन में लंच और रात में डिनर भी दिया जाएगा। खाना खिलाने की व्यवस्था केवल नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के गरीब लोगों के लिए भी है। इसकी शुरुआत दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने की। सबसे पहले उप-मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री, गीता घाट स्थिति रैन बसेरे में पहुंचकर इसकी शुरुआत की। 

एक अनुमान के अनुसार स्थायी और अस्थायी रैन बसेरों को मिलाकर अभी 261 रैन बसेरे हैं। जहां तकरीबन 19 हजार बेघरों के रहने के इंतजाम हैं। लेकिन सरकार की तमाम कोशिश व अभी तक मुफ्त रहने, सुबह चाय-बिस्किट देने तथा अब स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के बावजूद 30 फीसद भी बेघर यहां नहीं आ रहे। 

रैन बसेरे की देखभाल करने वाले दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) के अधिकारियों का कहना है कि शहरी बेघरों को ऐसी बेहतर सुविधा देश के किसी भी महानगर में नहीं मिलती होगी।

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